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प्रवासी कामगारों को मिला खेती किसानी का प्रशिक्षण
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श्रावस्ती। कृषि विज्ञान केंद्र भिनगा द्वारा प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार योजना के तहत प्रवासी कामगारों को सोमवार से रबी खाद्यान्न फसलों की बीज उत्पादन तकनीक का प्रशिक्षण दिलाया गया। आईटीआई भिनगा सभागार में आयोजित प्रशिक्षण की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक द्वारा किया गया।
प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विनय कुमार ने कहाकि प्रवासी श्रमिक अपनी भूमि पर गांव में एफपीओ गठित करके बीच विकास निगम के सहयोग से बीज उत्पादन कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह कृषि विज्ञान केेंद्र के तकनीकि परामर्श से धान एवं गेहूं का बीज उत्पादन करके आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षण के उद्ेश्य एवं महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
केंद्र के वैज्ञानिक डा. उमेश कुमार ने बीज के प्रकार, न्यूक्लीयस सीड, अभिजनक सीड, आधारीय बीज तथा प्रमाणित बीज एवं ट्रूथकुल बीज के बारे में विस्तार से जानकारी दिया। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न खाद्यान्न फसलों की कृथक करण दूरी व शेगिंग सहित विधायन तकनीकि के बारे में जानकारी दिया। केंद्र के ज्ञानवेंद्र बहादुर सिंह द्वारा बीज उत्पादन तकनीकियों के बारे में जानकारी दी गई।
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एडीओ कृषि इकौना डा. अरविंद कुमार ने खाद्यान्न फसलों के अवशेषों को न जलाने की सलाह दी। साथ ही फसल काटने के पश्चात फसल अवशेष को लाभ के लिए यूरिया डालकर सिंचाई के बाद सड़ने के लिए छोड़ने की सलाह दिया। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए हैपीसीडर चोपर व डी कंपोजर का प्रयोग करने को कहा। तकनीकि अधिकारी कृषि संचित ने पोषण प्रबंधन, खर पतवार प्रबंधन के बारे में बताया। प्रशिक्षण में डा. अहतियाम ने बीज उत्पादन में कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी दिया। इस मौके पर काफी संख्या में प्रशिक्षणार्थी मौजूद रहे।
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प्रशिक्षण के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. विनय कुमार ने कहाकि प्रवासी श्रमिक अपनी भूमि पर गांव में एफपीओ गठित करके बीच विकास निगम के सहयोग से बीज उत्पादन कर सकते हैं। आवश्यकता पड़ने पर वह कृषि विज्ञान केेंद्र के तकनीकि परामर्श से धान एवं गेहूं का बीज उत्पादन करके आय अर्जित कर सकते हैं। उन्होंने प्रशिक्षण के उद्ेश्य एवं महत्व के बारे में भी जानकारी दी।
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केंद्र के वैज्ञानिक डा. उमेश कुमार ने बीज के प्रकार, न्यूक्लीयस सीड, अभिजनक सीड, आधारीय बीज तथा प्रमाणित बीज एवं ट्रूथकुल बीज के बारे में विस्तार से जानकारी दिया। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न खाद्यान्न फसलों की कृथक करण दूरी व शेगिंग सहित विधायन तकनीकि के बारे में जानकारी दिया। केंद्र के ज्ञानवेंद्र बहादुर सिंह द्वारा बीज उत्पादन तकनीकियों के बारे में जानकारी दी गई।
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एडीओ कृषि इकौना डा. अरविंद कुमार ने खाद्यान्न फसलों के अवशेषों को न जलाने की सलाह दी। साथ ही फसल काटने के पश्चात फसल अवशेष को लाभ के लिए यूरिया डालकर सिंचाई के बाद सड़ने के लिए छोड़ने की सलाह दिया। उन्होंने फसल अवशेष प्रबंधन के लिए हैपीसीडर चोपर व डी कंपोजर का प्रयोग करने को कहा। तकनीकि अधिकारी कृषि संचित ने पोषण प्रबंधन, खर पतवार प्रबंधन के बारे में बताया। प्रशिक्षण में डा. अहतियाम ने बीज उत्पादन में कीट एवं रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी दिया। इस मौके पर काफी संख्या में प्रशिक्षणार्थी मौजूद रहे।