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सामंजस्य और एकता के लिए ध्यान जरूरी: देवानंद
Tue, 21 Jul 2026 12:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Tue, 21 Jul 2026 12:54 AM IST
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बोधि वृक्ष की पूजा करते बौद्ध अनुयायी।
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को म्यांमार से आए अनुयायियों के 40 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में पारंपरिक तरीके से बोधि वृक्ष का दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा में भिक्षु देवानंद ने कहा कि ध्यान एक शांत मन बनाने का समाधान है, जो लालसा और घृणा से मुक्त करता है। जब तक मन शांत नहीं होगा, हम अपने भीतर सामंजस्य और एकता का अनुभव नहीं कर सकते। ध्यान व्यक्ति को अधिक तेज, खुशहाल और अंतर्ज्ञानी बनाता है, जिससे मानसिक स्पष्टता आती है। वासना, लोभ व अहंकार से मुक्त मन प्रकृति से जुड़ता है और सही विचार लाता है। पूजन के बाद अनुयायियों ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, संघाराम बुद्ध विहार, गंध कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, कौशाम कुटी, शिवली स्तूप, राहुल कुटी आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
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बौद्ध सभा में भिक्षु देवानंद ने कहा कि ध्यान एक शांत मन बनाने का समाधान है, जो लालसा और घृणा से मुक्त करता है। जब तक मन शांत नहीं होगा, हम अपने भीतर सामंजस्य और एकता का अनुभव नहीं कर सकते। ध्यान व्यक्ति को अधिक तेज, खुशहाल और अंतर्ज्ञानी बनाता है, जिससे मानसिक स्पष्टता आती है। वासना, लोभ व अहंकार से मुक्त मन प्रकृति से जुड़ता है और सही विचार लाता है। पूजन के बाद अनुयायियों ने कच्ची कुटी, पक्की कुटी, संघाराम बुद्ध विहार, गंध कुटी, सूर्यकुंड, सभा मंडप, कौशाम कुटी, शिवली स्तूप, राहुल कुटी आदि का भ्रमण कर उनके इतिहास के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त की।
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