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बाबा साहेब के सपनों को करें साकार
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श्रावस्ती। भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर का रविवार को परिनिर्वाण दिवस मनाया गया। इस दौरान सेहनिया के मजरा कोडऱी खुर्द स्थित अंबेडकर पार्क में श्रद्धांजलि कार्यक्रम व गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता श्याम लाल गौतम ने की।
सेहनिया के ग्राम कोडऱी खुर्द स्थित अंबेडकर पार्क में आयोजित सभा में मौजूद लोगों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबा साहेब के सपनों को साकार करने का संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम के दौरान श्याम लाल गौतम ने कहा कि भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने छुआछूत और जातिवाद जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, वंचितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए न्योछावर कर दिया। समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले डॉ. आंबेडकर ने छह दिसंबर को दिल्ली में अंतिम सांस ली थी।
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जिसे महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। आनंद बाल्मीकि ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के छोटे से गांव महू में हुआ था। वह अपने पिता रामजी मालोजी सकपाल और माता भीमाबाई की 14वीं संतान थे। डॉ. आंबेडकर ज्यादातर समय सामाजिक कार्यों में ही व्यस्त रहते थे। आज उनकी पुण्यतिथि मनाई जा रही है।
वहीं आशुतोष आजाद ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए सांप्रदायिक सौहार्द बहुत जरूरी है। हम सभी को आपसी सद्भाव को कायम करने के लिए भेदभाव को मिटाना होगा। हमें सामाजिक समरसता को बढ़ावा देकर उनके सपनों को साकार करना होगा।
सामाजिक समरसता के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना को पैदा करना होगा। इस मौके पर आशा भारती, किरन भारती, मानवती, संतोष यादव, माता प्रसाद, मोहम्मद नईम, संत कुमार, जगदीश प्रसाद, बद्री प्रसाद, मोती लाल भारती, सर्वजीत, इन्द्रजीत, प्रदीप, राजकुमार चौधरी, उदयराज सिद्धार्थ, अनोखी लाल, गंगाराम, राधेश्याम कनौजिया, विजयपाल गौतम, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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सेहनिया के ग्राम कोडऱी खुर्द स्थित अंबेडकर पार्क में आयोजित सभा में मौजूद लोगों ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की। बाबा साहेब के सपनों को साकार करने का संकल्प भी लिया।
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कार्यक्रम के दौरान श्याम लाल गौतम ने कहा कि भारतीय संविधान के रचयिता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने छुआछूत और जातिवाद जैसी सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने अपना पूरा जीवन गरीबों, वंचितों और समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए न्योछावर कर दिया। समाज के पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले डॉ. आंबेडकर ने छह दिसंबर को दिल्ली में अंतिम सांस ली थी।
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जिसे महापरिनिर्वाण दिवस के रूप में मनाया जाता है। आनंद बाल्मीकि ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के छोटे से गांव महू में हुआ था। वह अपने पिता रामजी मालोजी सकपाल और माता भीमाबाई की 14वीं संतान थे। डॉ. आंबेडकर ज्यादातर समय सामाजिक कार्यों में ही व्यस्त रहते थे। आज उनकी पुण्यतिथि मनाई जा रही है।
वहीं आशुतोष आजाद ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के विकास के लिए सांप्रदायिक सौहार्द बहुत जरूरी है। हम सभी को आपसी सद्भाव को कायम करने के लिए भेदभाव को मिटाना होगा। हमें सामाजिक समरसता को बढ़ावा देकर उनके सपनों को साकार करना होगा।
सामाजिक समरसता के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रवाद की भावना को पैदा करना होगा। इस मौके पर आशा भारती, किरन भारती, मानवती, संतोष यादव, माता प्रसाद, मोहम्मद नईम, संत कुमार, जगदीश प्रसाद, बद्री प्रसाद, मोती लाल भारती, सर्वजीत, इन्द्रजीत, प्रदीप, राजकुमार चौधरी, उदयराज सिद्धार्थ, अनोखी लाल, गंगाराम, राधेश्याम कनौजिया, विजयपाल गौतम, राजकुमार आदि मौजूद रहे।