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Shravasti News: एक दशक से झोपड़ियों में बीत रही कटान पीड़ितों की जिंदगी
Fri, 19 Jun 2026 11:59 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 19 Jun 2026 11:59 PM IST
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घाटेपुरवा के निकट बह रही राप्ती नदी
श्रावस्ती/तुलसीपुर। राप्ती नदी के किनारे बसे गांवों को हर वर्ष बाढ़ व कटान की त्रासदी झेलनी पड़ती है। ऐसे में जिले का अधिकांश हिस्सा बाढ़ की विभीषिका हर वर्ष महीनों तक झेलता है, लेकिन जमुनहा क्षेत्र के कुछ ऐसे गांव हैं जो पहाड़ों पर बारिश होने के कुछ ही घंटों बाद बाढ़ के पानी से घिर जाते हैं। वहीं, कटान का दंश झेल रहे हसनापुर के ग्रामीणों को सड़क पर अपनी जिंदगी बिताने को मजबूर हैं।
हसनापुर निवासी रामप्रसाद ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व आई बाढ़ में हसनापुर गांव पूरी तरह कट गया, जो तभी से सड़क की पटरी पर बसा हुआ है। प्रशासन की ओर से अब तक ग्रामीणों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। इससे लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। राप्ती के कछार में बसे वीरपुर लौकिहा के मजरा वीरपुर, कथरा माफी के मजरा घाटेपुरवा व शिकारी चौड़ा के ग्रामीण आशंकाओं में घिर जाते हैं कि न जाने कब बाढ़ का पानी उनके घरों में घुस जाएगा। नेपाल में पानी छोड़े जाने के मात्र छह घंटे के अंदर ही राप्ती बैराज में पानी पहुंच जाता है। वहीं, राप्ती बैराज से पानी छूटते ही एक घंटे में जमुनहा क्षेत्र के इन गांवों में पानी घुसने लगता है।
तटबंध बनने से दूर हो सकती है बाढ़ की समस्या
वीरपुर निवासी साबितराम बताते हैं कि राप्ती नदी का पानी जमुनहा क्षेत्र में सबसे पहले वीरपुर लौकिहा के मजरा वीरपुर, कथरामाफी के मजरा घाटेपुरवा, शिकारी चौड़ा गांव में तबाही मचाता है। इससे अक्सर बाढ़ के दौरान मल्हीपुर-भंगहा मोड़ मार्ग कट जाता है। राप्ती नदी के पश्चिमी छोर पर यदि तटबंध बन जाए तो बंदरहा बाबा कुट्टी, कथरा माफी, हसनापुर, बरंगा, सलारूपुरवा, लौकिहा प्रथम, लौकिहा द्वितीय, लौकिहा तृतीय, वीरपुर, शिकारी चौड़़ा व हरिहरपुर गांव को बाढ़ व कटान से बचाया जा सकता है।
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नहीं मिला कोई मुआवजा
हसनापुर निवासी रामप्रसाद के मुताबिक 10 वर्ष पूर्व आई बाढ़ से पूरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गया। इससे वहां के लोग सड़क की पटरियों पर रहने को मजबूर हैं। यहां के लोगों पर अब तक शासन की नजर नहीं गई। इससे न तो उन्हें आवास मिला और न ही किसी भी प्रकार का मुआवजा।
नदी में समा गया खेत
घाटेपुरवा निवासी शत्रोहन भार्गव ने बताया कि राप्ती नदी के कटान में उनका खेत कट गया, बचे खेत में बाढ़ का पानी भर जाता है। इससे वह खेती भी नहीं कर पाते हैं। अब तक न तो आवास की व्यवस्था हो सकी है और न ही खेत का कोई मुआवजा मिला है।
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हसनापुर निवासी रामप्रसाद ने बताया कि 10 वर्ष पूर्व आई बाढ़ में हसनापुर गांव पूरी तरह कट गया, जो तभी से सड़क की पटरी पर बसा हुआ है। प्रशासन की ओर से अब तक ग्रामीणों को किसी प्रकार की सहायता नहीं मिली है। इससे लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। राप्ती के कछार में बसे वीरपुर लौकिहा के मजरा वीरपुर, कथरा माफी के मजरा घाटेपुरवा व शिकारी चौड़ा के ग्रामीण आशंकाओं में घिर जाते हैं कि न जाने कब बाढ़ का पानी उनके घरों में घुस जाएगा। नेपाल में पानी छोड़े जाने के मात्र छह घंटे के अंदर ही राप्ती बैराज में पानी पहुंच जाता है। वहीं, राप्ती बैराज से पानी छूटते ही एक घंटे में जमुनहा क्षेत्र के इन गांवों में पानी घुसने लगता है।
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तटबंध बनने से दूर हो सकती है बाढ़ की समस्या
वीरपुर निवासी साबितराम बताते हैं कि राप्ती नदी का पानी जमुनहा क्षेत्र में सबसे पहले वीरपुर लौकिहा के मजरा वीरपुर, कथरामाफी के मजरा घाटेपुरवा, शिकारी चौड़ा गांव में तबाही मचाता है। इससे अक्सर बाढ़ के दौरान मल्हीपुर-भंगहा मोड़ मार्ग कट जाता है। राप्ती नदी के पश्चिमी छोर पर यदि तटबंध बन जाए तो बंदरहा बाबा कुट्टी, कथरा माफी, हसनापुर, बरंगा, सलारूपुरवा, लौकिहा प्रथम, लौकिहा द्वितीय, लौकिहा तृतीय, वीरपुर, शिकारी चौड़़ा व हरिहरपुर गांव को बाढ़ व कटान से बचाया जा सकता है।
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नहीं मिला कोई मुआवजा
हसनापुर निवासी रामप्रसाद के मुताबिक 10 वर्ष पूर्व आई बाढ़ से पूरा गांव बाढ़ की चपेट में आ गया। इससे वहां के लोग सड़क की पटरियों पर रहने को मजबूर हैं। यहां के लोगों पर अब तक शासन की नजर नहीं गई। इससे न तो उन्हें आवास मिला और न ही किसी भी प्रकार का मुआवजा।
नदी में समा गया खेत
घाटेपुरवा निवासी शत्रोहन भार्गव ने बताया कि राप्ती नदी के कटान में उनका खेत कट गया, बचे खेत में बाढ़ का पानी भर जाता है। इससे वह खेती भी नहीं कर पाते हैं। अब तक न तो आवास की व्यवस्था हो सकी है और न ही खेत का कोई मुआवजा मिला है।

घाटेपुरवा के निकट बह रही राप्ती नदी

घाटेपुरवा के निकट बह रही राप्ती नदी

घाटेपुरवा के निकट बह रही राप्ती नदी

घाटेपुरवा के निकट बह रही राप्ती नदी