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कोटेदार की हत्या में साथी को आजीवन कारावास
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श्रावस्ती। कोटेदार की हत्या के मामले में उसी के साथी को सेशन कोर्ट ने गुरुवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 15 वर्ष पूर्व इकौना के साईपुरवा दाखिला भलुहिया में घटी इस घटना में आरोपी पर कारावास के साथ ही 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड न देने पर छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
इकौना के साईपुरवा दाखिला भलुहिया निवासी सहवान गांव का कोटेदार था। उसकी हत्या बारह फरवरी 2007 को कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पुत्र इजाजुद्दीन ने इकौना पुलिस को शिकायती पत्र दिया था। जिसमें लिखा था की उसके पिता कोटा चलाते थे। उनकी कोटे की दुकान निलंबित हो गई थी। कोटा बहाल कराने के लिए गांव के ही अम्बिकेश्वर प्रताप सिंह उर्फ बडे़ भइया ने काफी मदद की थी।
इसके एवज में वह उसके पिता से पैसा लेते थे। पैसा न देने पर मारपीट व हत्या की धमकी दिया करते थे। घटना के दिन वह स्कूल पढ़ने गया था। लौटते समय इकौना बाजार में उसके पिता व आरोपी एक साथ मिले थे। उसके पिता ने केरोसिन व कुछ अन्य सामान घर ले जाने के लिए दिया था। घर आने पर शाम को पता चला की उसके पिता की हत्या आरोपी के बाग में हो गई है।
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इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश वैभव श्रीवास्तव के कोर्ट पर चल रही थी। मामले में सरकार की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता केपी सिंह कर रहे थे। इस मामले की सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश ने पाया की आरोपी पर लगे आरोप सही हैं। इस पर न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ ही 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर आरोपी को छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।
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इकौना के साईपुरवा दाखिला भलुहिया निवासी सहवान गांव का कोटेदार था। उसकी हत्या बारह फरवरी 2007 को कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के पुत्र इजाजुद्दीन ने इकौना पुलिस को शिकायती पत्र दिया था। जिसमें लिखा था की उसके पिता कोटा चलाते थे। उनकी कोटे की दुकान निलंबित हो गई थी। कोटा बहाल कराने के लिए गांव के ही अम्बिकेश्वर प्रताप सिंह उर्फ बडे़ भइया ने काफी मदद की थी।
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इसके एवज में वह उसके पिता से पैसा लेते थे। पैसा न देने पर मारपीट व हत्या की धमकी दिया करते थे। घटना के दिन वह स्कूल पढ़ने गया था। लौटते समय इकौना बाजार में उसके पिता व आरोपी एक साथ मिले थे। उसके पिता ने केरोसिन व कुछ अन्य सामान घर ले जाने के लिए दिया था। घर आने पर शाम को पता चला की उसके पिता की हत्या आरोपी के बाग में हो गई है।
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इस मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायाधीश वैभव श्रीवास्तव के कोर्ट पर चल रही थी। मामले में सरकार की ओर से पैरवी जिला शासकीय अधिवक्ता केपी सिंह कर रहे थे। इस मामले की सुनवाई करते हुए जिला सत्र न्यायाधीश ने पाया की आरोपी पर लगे आरोप सही हैं। इस पर न्यायालय ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ ही 25 हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड न देने पर आरोपी को छह माह अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।