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Shravasti News: बौद्ध संस्कृत महासभा में आयोजित पूजा में शामिल हुए लामा
Wed, 18 Oct 2023 11:45 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Wed, 18 Oct 2023 11:45 PM IST
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध संस्कृत महासभा में एक माह से चल रहे विशेष पूजन का समापन मंगलवार देर शाम हो गया। इस मौके पर लामाओं के प्रसिद्ध गुरु भिक्षु ड्रिकुंग क्याबगोन रिनपोन्छे मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन गंध कुटि में दीप प्रज्वलन के साथ हुआ।
विशेष वर्षावास पूजा के लिए बौद्ध भिक्षु तिब्बत सहित आसपास के क्षेत्रों से भी आते हैं। एक माह यहां रह कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसी के तहत बौद्ध संस्कृत महासभा श्रावस्ती में भी लामाओं द्वारा विशेष पूजन किया जा रहा था। जिसका समापन मंगलवार देर शाम हुआ। इस मौके पर मौजूद लामाओं के प्रसिद्ध गुरु बौद्ध भिक्षु ड्रिकूग रिनपोन्छे के साथ आए अन्य लामा गुरुओं ने गंध कुटि में दीप प्रज्वलित कर विशेष पूजा की।
इस मौके पर बौद्ध भिक्षु ड्रिकूग रिनपोन्छे ने कहा कि दीपक जीवन में नीरसता से सरसता, अंधकार से प्रकाश, दुख से सुख, सुख से शांति, चिंता से मुक्ति और स्वयं को आहुत करते हुए सभी के लिए अपना जीवनदान कर प्रसन्नता का पथ प्रशस्त करने की दिशा दिखलाता है। दीप प्रज्वलन का हमारे धर्मग्रंथों में आध्यात्मिक एवं पौराणिक उल्लेख रहा है। इस दौरान जलछन लामा ,शानतानेगी सहित उत्तराखंड, बिहार, मणिपुर व महाराष्ट्र से आए बौद्ध उपासक मौजूद रहे।
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विशेष वर्षावास पूजा के लिए बौद्ध भिक्षु तिब्बत सहित आसपास के क्षेत्रों से भी आते हैं। एक माह यहां रह कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसी के तहत बौद्ध संस्कृत महासभा श्रावस्ती में भी लामाओं द्वारा विशेष पूजन किया जा रहा था। जिसका समापन मंगलवार देर शाम हुआ। इस मौके पर मौजूद लामाओं के प्रसिद्ध गुरु बौद्ध भिक्षु ड्रिकूग रिनपोन्छे के साथ आए अन्य लामा गुरुओं ने गंध कुटि में दीप प्रज्वलित कर विशेष पूजा की।
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इस मौके पर बौद्ध भिक्षु ड्रिकूग रिनपोन्छे ने कहा कि दीपक जीवन में नीरसता से सरसता, अंधकार से प्रकाश, दुख से सुख, सुख से शांति, चिंता से मुक्ति और स्वयं को आहुत करते हुए सभी के लिए अपना जीवनदान कर प्रसन्नता का पथ प्रशस्त करने की दिशा दिखलाता है। दीप प्रज्वलन का हमारे धर्मग्रंथों में आध्यात्मिक एवं पौराणिक उल्लेख रहा है। इस दौरान जलछन लामा ,शानतानेगी सहित उत्तराखंड, बिहार, मणिपुर व महाराष्ट्र से आए बौद्ध उपासक मौजूद रहे।
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