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चार सत्य जान लेने से संभव है दुख का निवारण : भंवरानंद
Sun, 05 Apr 2026 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sun, 05 Apr 2026 12:32 AM IST
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गंध कुटी में प्रार्थना करते महाराष्ट्र के बौद्ध अनुयायी।- संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शनिवार को महाराष्ट्र से आए अनुयायियों के 60 सदस्यीय दल से गुलजार रही। सभी ने बौद्ध भिक्षु भंवरानंद के नेतृत्व में गंध कुटी में दर्शन-पूजन किया। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु भंवरानंद ने अध्यात्म और दुख निवारण पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य का दुख दूर ही नहीं करता, बल्कि यह जानकारी भी देता है, कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। इसलिए दुख की अवस्था भी अवश्य बीतती है और सुख आता है।
दुख का निवारण चार सत्य को जान लेने से संभव हो जाता है। संसार में दुख है, दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है और मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता है।
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उन्होंने माध्यमिक मार्ग को बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा बताया, जिसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु में न तो आधिक्य हो और न ही कमी। सब कुछ संतुलित अनुपात में होना चाहिए, जिसे सम्यक आचरण भी कहा जाता है। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग हैं। व्यक्ति को इन सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु भंवरानंद ने अध्यात्म और दुख निवारण पर विचार रखे। उन्होंने कहा कि अध्यात्म मनुष्य का दुख दूर ही नहीं करता, बल्कि यह जानकारी भी देता है, कि संसार में हर वस्तु परिवर्तनशील है। इसलिए दुख की अवस्था भी अवश्य बीतती है और सुख आता है।
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दुख का निवारण चार सत्य को जान लेने से संभव हो जाता है। संसार में दुख है, दुख का कारण है, दुख का कारण दूर करने से दुख दूर किया जा सकता है और मध्यम मार्ग पर आचरण करने से दुख दूर होता है।
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उन्होंने माध्यमिक मार्ग को बौद्ध दर्शन की दूसरी शिक्षा बताया, जिसका अर्थ यह है कि किसी भी वस्तु में न तो आधिक्य हो और न ही कमी। सब कुछ संतुलित अनुपात में होना चाहिए, जिसे सम्यक आचरण भी कहा जाता है। बौद्ध दर्शन सम्यक आचरण पर बल देता है, जिसके आठ अंग हैं। व्यक्ति को इन सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।