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नेपाली आयल से साप्ताहिक बाजारो में छन रही जलेबी, बिगड़ रही ग्रामीणों की सेहत

Mon, 08 Nov 2021 11:48 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 08 Nov 2021 11:48 PM IST
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Jalebi is filtered with Nepali palm oil, health is deteriorating
जमुनहामें साप्ताहिक बाजार बनगई में रविवार को नेपाली पामआयल से बनी जलेबी - फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। नेपाली पाम आयल से साप्ताहिक बाजारों में जलेबी छन रही है। इसी तरह कई अन्य खाद्य पदार्थ इस आयल में पका कर बेचे जा रहे हैं। नेपाली पाम आयल की कीमत भारतीय तेल की अपेक्षा काफी कम है, लेकिन इन आयल की गुणवत्ता जांचने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा अब तक एक भी नमूने नही लिया गया है। जिले की जनसंख्या बारह लाख है। इसमें से लगभग 82 हजार लोग भिनगा व इकौना नगर में रहते है। इन दोनों नगरों का स्वरूप भी ग्रामीण इलाकों जैसा ही है, लेकिन इन दोनों नगरों में लोगों को बेहतर खाद्य पदार्थ खरीदने का कुछ विकल्प मिल जाता है।
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लेकिन इससे इतर 11 लाख लोगों के पास खाद्य पदार्थ खरीदने के केवल दो विकल्प हैं। इसमें से एक ब्लाक स्तर पर लगने वाला स्थाई बाजार, दूसरा सबसे बड़ा विकल्प साप्ताहिक बाजार है। यह विकल्प केवल जिले के लोगों के लिए ही नही है, बल्कि श्रावस्ती से सटे नेपाली क्षेत्र जिला बांके के लोगों के लिए भी है। इसी साप्ताहिक बाजार से वह भी सामान लेते है। देखा जाए तो जिले में प्रतिदिन नेपाल सीमा पर इस तरह का कोई न कोई बाजार जरूर लगता है। इस बाजार की सबसे बड़ी खासियत यहां की खाद्य सामग्री है। मिठाई से लेकर छोला, पकौड़ी आदि सब बनता तो भारतीय क्षेत्र में है, लेकिन इसको पकाने के लिए नेपाल से तस्करी कर लाए गए पाम आयल का इस्तेमाल किया जाता है। नेपाल से आने वाला पाम आयल भारतीय तेलों से काफी सस्ता है।
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जिले में भारतीय पाम आयल की मांग न के बराबर है, जबकि नेपाल से आने वाला पाम आयल तीस से चालीस रुपए प्रति लीटर होने के कारण इसकी मांग काफी ज्यादा है। इसकी मांग विगत दो माह से ज्यादा बढ़ गई है। नेपाली पाम आयल की कीमत कम होने के कारण साप्ताहिक बाजार में बिकने वाली जलेबी सत्तर से अस्सी रूपए किलो व अन्य मिठाईयां सौ रुपए किलो तक बिकती है। प्रत्येक बाजार में बीस से चालीस दुकानें जलेबी, चाट, मिठाई की लगाई जाती है। ऐसे में ग्रामीण जाने अनजाने में ही गुणवत्ता विहीन खाद्य पदार्थ खा कर अपनी सेहत खराब कर रहे हैं। नेपाल से आने वाला आयल पांच लीटर व दस लीटर के प्लास्टिक के गैलेन में आता है। यह देखने में सफेद भारतीय डालडा जैसा होता है। स्थानीय लोग इसे नेपाली पाम आयल के नाम से जानते है। लेकिन इस का रंग सफेद होता है, जबकि पाम आयल हल्के पीले रंग का होता है।
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नहीं लिए जाते सैंपल
साप्ताहिक बाजार में फुटपाथ पर गरीब लोग दुकान लगाते है। इस लिए वहां सख्ती नहीं बरती जाती है। क्षेत्रीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी को बाजार में जांच कर खराब खाद्य पदार्थ को नष्ट कराने का आदेश दिया गया है। -सुनील कुमार शर्मा, जिला अभिहित अधिकारी।
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