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नो मैंस लैंड पर आकार ले रहे गांव, हो रही खेती
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नो मैंस लैंड पर बसी बस्तियों
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। नेपाल के साथ भारत के संबंध में भले ही तनाव आ गया हो लेकिन श्रावस्ती के 62 किलोमीटर से लगे नो मैंस लैंड पर अवैध रूप से बसे गांवों में दोनों देशों के लोग पूरे सद्भाव से रह रहे हैं। पहले जहां इक्का-दुक्का झोपड़ियां हुआ करती थीं वहां अब पूरी आबादी बस गई है। सीमा निर्धारण के लिए लगे पिलर गायब हो रहे हैं। भारतीय अधिकारी केवल मामले की जांच की बात कह रहे हैं तो वहीं सशस्त्र सीमा बाल (एसएसबी) के अफसर कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
भारत नेपाल बार्डर पर संकट में सीमा तय करने के लिए छोड़ी गई जमीन (नो मैंस लैंड) का अस्तित्व खतरे में है। इस पर तेजी से भारत व नेपाल दोनों ओर से अवैध कब्जा होता जा रहा है। इससे सीमा पर नो मैंस लैंड का अस्तित्व धीरे धीरे समाप्त होता जा रहा है। इस जमीन पर कहीं गांव बस गए हैं, तो कहीं फसल लहलहा रही है। हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हो पा रहा है। जिले की नेपाल सीमा पर जगह जगह अतिक्रमण है।
अधिकांश जगहों पर नेपाली नागरिकों का कब्जा है। सीमा से लगे नो मैंस लैंड पर भारतीय गांव के लोग भी कब्जा करने में पीछे नहीं हैं। दस स्थान ऐसे है जहां नो मैंस लैंड पर गांव ही बस गए हैं। सीमा क्षेत्र के दोनों ओर किसानों ने भी जमीन पर कब्जा कर लिया है। यह लोग नो मैंस लैंड पर खेती करके फसल उगा रहे हैं। कुछ स्थानों पर बाग बगीचे लगे हैं। भरथा रोशन गढ़ व ककरदरी की स्थिति और भी खराब है। यहां सीमा के दोनों ओर ऐसे बस्तियां बस गई हैं, जैसे क्षेत्र कोई गांव हो।
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इस अतिक्रमण को हटाने के लिए अभी तक जिले में कोई भी पहल नहीं हुई। सीमा सुरक्षा के लिए तैनात एसएसबी अपने समय में कोई भी कब्जा नहीं होने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है। वहीं यदि नो मैंस लैंड पर बढ़ रही बस्तियों पर यदि रोक नहीं लगी तो जल्द ही भारत नेपाल की सीमा रेखा ही समाप्त हो जाएगी।
इन जगहों पर अतिक्रमण
सीमा क्षेत्र के कई स्थानों पर अतिक्रमण है। इसमें ककरदरी, कोदिया, घुड़दौरिया, रोशनगढ़ व भारतीय सुइया क्षेत्र का नोमैंस लैंड लगभग खत्म होने को है। वहीं नेपाल की ओर से उल्लनासपुरवा, शंकरनगर कोटिया, नेपाली घुड़दौरिया व रोश्यानगढ़, बनिया गांव महतनिया व नेपाली सुइया गांव के तरफ की स्थिति ज्यादा चिंता जनक है।
यह पिलर करते जिले में सीमा का निर्धारण
जिले के एक छोर सागर गांव के पास पिलर संख्या 645/1 जो सब पिलर है वहीं दूसरी ओर गंभिरवा नाका जहां पिलर संख्या 616 (65) मेन पिलर है। इसी के बीच श्रावस्ती जनपद की लगभग 62 किलोमीटर भारत नेपाल की सीमा है। सीमा के दोनों ओर तीस-तीस फिट चौड़ी पट्टी है। जिसे नो मैंस लैंड कहा जाता है। जिले की इस सीमा क्षेत्र पर नेपाल राज्य का जिला बांके व डान सटा हुआ है। इनसे जिले के भिनगा तहसील की 27 ग्राम की सीमा जुड़ती हैं। सागर गांव का मुख्य पिलर संख्या 645 के साथ यहीं का सब पिलर 644/2, 644/1 व कोदिया गांव का मुख्य पिलर संख्या 644, 643/2 व 643/1 गायब है। इसके चलते सीमा का लगभग एक हिस्सा चिन्ह विहीन है। जिससे दोनों ओर के नागरिकों ने अपनी सुविधा अनुसार अवैध कब्जा कर लिया है।
एडीएम योगानंद पांडेय ने बताया कि सीमा क्षेत्र के नोमैंस लैंड पर गायब पिलर की सूचना तो एसएसबी की ओर से मिली थी। इस संबंध में शासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। नोमैंस लैंड पर गांव बसने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में एसएसबी के उच्चाधिकारियों से वार्ता करके कुछ कहा जा सकता है।
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भारत नेपाल बार्डर पर संकट में सीमा तय करने के लिए छोड़ी गई जमीन (नो मैंस लैंड) का अस्तित्व खतरे में है। इस पर तेजी से भारत व नेपाल दोनों ओर से अवैध कब्जा होता जा रहा है। इससे सीमा पर नो मैंस लैंड का अस्तित्व धीरे धीरे समाप्त होता जा रहा है। इस जमीन पर कहीं गांव बस गए हैं, तो कहीं फसल लहलहा रही है। हालात दिनों दिन खराब होते जा रहे हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर कुछ भी नहीं हो पा रहा है। जिले की नेपाल सीमा पर जगह जगह अतिक्रमण है।
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अधिकांश जगहों पर नेपाली नागरिकों का कब्जा है। सीमा से लगे नो मैंस लैंड पर भारतीय गांव के लोग भी कब्जा करने में पीछे नहीं हैं। दस स्थान ऐसे है जहां नो मैंस लैंड पर गांव ही बस गए हैं। सीमा क्षेत्र के दोनों ओर किसानों ने भी जमीन पर कब्जा कर लिया है। यह लोग नो मैंस लैंड पर खेती करके फसल उगा रहे हैं। कुछ स्थानों पर बाग बगीचे लगे हैं। भरथा रोशन गढ़ व ककरदरी की स्थिति और भी खराब है। यहां सीमा के दोनों ओर ऐसे बस्तियां बस गई हैं, जैसे क्षेत्र कोई गांव हो।
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इस अतिक्रमण को हटाने के लिए अभी तक जिले में कोई भी पहल नहीं हुई। सीमा सुरक्षा के लिए तैनात एसएसबी अपने समय में कोई भी कब्जा नहीं होने की बात कह कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है। वहीं यदि नो मैंस लैंड पर बढ़ रही बस्तियों पर यदि रोक नहीं लगी तो जल्द ही भारत नेपाल की सीमा रेखा ही समाप्त हो जाएगी।
इन जगहों पर अतिक्रमण
सीमा क्षेत्र के कई स्थानों पर अतिक्रमण है। इसमें ककरदरी, कोदिया, घुड़दौरिया, रोशनगढ़ व भारतीय सुइया क्षेत्र का नोमैंस लैंड लगभग खत्म होने को है। वहीं नेपाल की ओर से उल्लनासपुरवा, शंकरनगर कोटिया, नेपाली घुड़दौरिया व रोश्यानगढ़, बनिया गांव महतनिया व नेपाली सुइया गांव के तरफ की स्थिति ज्यादा चिंता जनक है।
यह पिलर करते जिले में सीमा का निर्धारण
जिले के एक छोर सागर गांव के पास पिलर संख्या 645/1 जो सब पिलर है वहीं दूसरी ओर गंभिरवा नाका जहां पिलर संख्या 616 (65) मेन पिलर है। इसी के बीच श्रावस्ती जनपद की लगभग 62 किलोमीटर भारत नेपाल की सीमा है। सीमा के दोनों ओर तीस-तीस फिट चौड़ी पट्टी है। जिसे नो मैंस लैंड कहा जाता है। जिले की इस सीमा क्षेत्र पर नेपाल राज्य का जिला बांके व डान सटा हुआ है। इनसे जिले के भिनगा तहसील की 27 ग्राम की सीमा जुड़ती हैं। सागर गांव का मुख्य पिलर संख्या 645 के साथ यहीं का सब पिलर 644/2, 644/1 व कोदिया गांव का मुख्य पिलर संख्या 644, 643/2 व 643/1 गायब है। इसके चलते सीमा का लगभग एक हिस्सा चिन्ह विहीन है। जिससे दोनों ओर के नागरिकों ने अपनी सुविधा अनुसार अवैध कब्जा कर लिया है।
एडीएम योगानंद पांडेय ने बताया कि सीमा क्षेत्र के नोमैंस लैंड पर गायब पिलर की सूचना तो एसएसबी की ओर से मिली थी। इस संबंध में शासन की ओर से कार्रवाई की जा रही है। नोमैंस लैंड पर गांव बसने की जानकारी नहीं है। इस संबंध में एसएसबी के उच्चाधिकारियों से वार्ता करके कुछ कहा जा सकता है।