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बौद्ध तपोस्थली में थाईलैंड से आए अनुयायियों ने की पूजा
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बौद्ध तपोस्थली में पूजन अर्चन करते थाईलैंड से आए भिक्षु।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में मंगलवार को थाईलैंड से आए बौद्ध अनुयायियों से गुलजार रही। उपासकों ने गंधकुटि पर पारंपरिक रीति रिवाज से पूजन किया। इस दौरान माता सुमेदा ने सभी को बौद्ध उपदेश सुनाया।
माता सुमेदा ने कहा कि मनुष्य को अगर अपने जीवन में खुशियां प्राप्त करनी है तो उसे अपने भूतकाल में नहीं उलझना चाहिए। न हीं अपने भविष्य की चिंता ही करनी चाहिए। मनुष्य को केवल अपने वर्तमान पर ही ध्यान देना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन में क्रोध की सजा नहीं मिलती है, बल्कि मनुष्य को क्रोध से सजा मिलती है। मनुष्य हजारों लड़ाईयां जीतकर भी विजयी नहीं होता। जिस दिन वह अपने ऊपर विजय प्राप्त कर लेता है। उस दिन वह विजयी बन जाता है।
दुनियां में तीन चीजें ऐसी हैं जो कभी नहीं छिप सकती, सूर्य, चंद्र और सत्य। मनुष्य के अपने जीवन में मंजिल या लक्ष्य को पाने से अच्छी उसकी यात्रा होनी चाहिए। जैसे हजारों शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो शांति प्रदान करता हो। जीवन में कभी भी बुराई से बुराई को खत्म नहीं किया जा सकता। मनुष्य की बुराईयां उसके जीवन से प्रेम को खत्म कर देती है। सत्य पर चलने वाला मनुष्य अपने जीवन में सिर्फ दो ही गलतियां कर सकता है या तो पूरा रास्ता तय नहीं करता या फिर शुरूआत ही नहीं करता।
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क्रोधित होने का मतलब है जलता हुआ कोयला किसी दूसरे पर फेंकना। जो सबसे पहले आपके ही हाथों को जलाता है। एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपकों को जला सकते हो फिर भी दीपक की रोशनी कम नहीं होती। उसी प्रकार यदि आप में गुण हैं तो किसी के बुराई करने से वह समाप्त नहीं हो सकती। जीवन में खुशियां बांटने से बढ़ती हैं कभी कम नहीं होती। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा दूसरों की खुशियों का ध्यान रखना चाहिए। पूजन के बाद उपासकों ने तपोस्थली का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।
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माता सुमेदा ने कहा कि मनुष्य को अगर अपने जीवन में खुशियां प्राप्त करनी है तो उसे अपने भूतकाल में नहीं उलझना चाहिए। न हीं अपने भविष्य की चिंता ही करनी चाहिए। मनुष्य को केवल अपने वर्तमान पर ही ध्यान देना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन में क्रोध की सजा नहीं मिलती है, बल्कि मनुष्य को क्रोध से सजा मिलती है। मनुष्य हजारों लड़ाईयां जीतकर भी विजयी नहीं होता। जिस दिन वह अपने ऊपर विजय प्राप्त कर लेता है। उस दिन वह विजयी बन जाता है।
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दुनियां में तीन चीजें ऐसी हैं जो कभी नहीं छिप सकती, सूर्य, चंद्र और सत्य। मनुष्य के अपने जीवन में मंजिल या लक्ष्य को पाने से अच्छी उसकी यात्रा होनी चाहिए। जैसे हजारों शब्दों से अच्छा वह एक शब्द है जो शांति प्रदान करता हो। जीवन में कभी भी बुराई से बुराई को खत्म नहीं किया जा सकता। मनुष्य की बुराईयां उसके जीवन से प्रेम को खत्म कर देती है। सत्य पर चलने वाला मनुष्य अपने जीवन में सिर्फ दो ही गलतियां कर सकता है या तो पूरा रास्ता तय नहीं करता या फिर शुरूआत ही नहीं करता।
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क्रोधित होने का मतलब है जलता हुआ कोयला किसी दूसरे पर फेंकना। जो सबसे पहले आपके ही हाथों को जलाता है। एक जलते हुए दीपक से हजारों दीपकों को जला सकते हो फिर भी दीपक की रोशनी कम नहीं होती। उसी प्रकार यदि आप में गुण हैं तो किसी के बुराई करने से वह समाप्त नहीं हो सकती। जीवन में खुशियां बांटने से बढ़ती हैं कभी कम नहीं होती। इसलिए मनुष्य को अपने जीवन में हमेशा दूसरों की खुशियों का ध्यान रखना चाहिए। पूजन के बाद उपासकों ने तपोस्थली का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की।