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हाईकोर्ट के आदेश से दावेदारों को लगेगा झटका
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श्रावस्ती। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट द्वारा दी गई व्यवस्था ने कइयों के सपने चकनाचूर कर दिए। जहां नए रोस्टर में सीट आरक्षित व अनारक्षित हुई थी। वहां फिर से कुछ न कुछ नया हो सकता है। आरक्षण आधार वर्ष 2015 होने के बाद यह माना जा रहा है कि जिला पंचायत सहित ग्राम पंचायत सदस्यों तक के समस्त आरक्षण सूची में उलटफेर संभव है।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है। यह आदेश उन पंचायतों के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं है जो दूसरी व तीसरी बार रोस्टर का लाभ पाते हुए अनारक्षित रह गई थीं। या फिर ऐसी तमाम ग्राम पंचायतें हैं जो रोस्टर के बावजूद दूसरी बार पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित होने में सफल रहीं।
इस तरह की सबसे ज्यादा ग्राम पंचायतें गिलौला विकास खंड में थीं। इस विकास खंड में पहले हुए आरक्षण के दौरान तीसरे राउंड में अन्य पिछड़े वर्ग का कोटा पूरा हुआ था। वहीं हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब आधार वर्ष 2015 को बनाया गया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि आरक्षण के रोस्टर में पुन: फेरबदल होगा। ऐसे में जिन लोगों ने अब तक अपने मनमाफिक सीट होने के कारण अब तक मिठाइयां बांटने का दौर जारी रखा था उन्हें झटका लगना स्वाभाविक है।
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एससी सीटों के लिए आरक्षण में फेरबदल की संभावना कम
आरक्षण सूची निर्धारण करते समय भले ही जिले में वर्ष 1995 को आधार बनाया गया था। लेकिन आरक्षण निर्धारित करते समय 2015 के आरक्षण का महत्व सबसे ज्यादा था। ऐसे में जिले में 34 ऐसी पंचायतें थीं जो 2015 में अनारक्षित श्रेणी में थीं। इन्हीं से आरक्षण की शुरुआत की गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि कहीं न कहीं 2015 के आरक्षण के आंकड़ों के आधार पर ही सीटें आरक्षित हुईं।
इस तरह हो सकता आरक्षण में परिवर्तन
यदि पुराने फार्मूले के आधार पर वर्ष 2015 को आरक्षण का आधार बनाया जाए तो आरक्षण का शुरुआत अनुसूचित जाति महिला से होना है। ऐसे में अब तक की अनारक्षित समस्त सीटें सबसे ऊपर के क्रम में रखी जाएंगी। उसके बाद जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति बाहुल्य पंचायतों को घटते हुए क्रम में रखा जाएगा। यही प्रक्रिया अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी अपनाई जाती है। यदि कोई पंचायत 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी तो रोस्टर के मुताबिक उसे अन्य पिछड़े वर्ग में जाना चाहिए। ऐसे में इस वर्ग की सभी पंचायतों में पिछड़े वर्ग के 2011 के अनुसार दी गई जनसंख्या को घटते हुए क्रम में रखा जाएगा। जहां आरक्षण का रोस्टर पूरा होगा। वह पंचायतें आरक्षण की श्रेणी में आ जाएंगी। अवशेष सामान्य या फिर महिला की रेणी में जा सकती है।
होर्डिंग व पोस्टर लगाना हो सकता बेकार
आरक्षण की अंतिम सूची का इंतजार किए बिना ही चुनाव लड़ने वालों ने जिला पंचायत ही नहीं प्रधान पदों के लिए भी होर्डिंग व पोस्टर लगवाना प्रारंभ कर दिया था। यहां तक कि जिला पंचायत के लिए लगभग लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों ने लाखों रुपये खर्च कर डाले थे। लेकिन आरक्षण की नई व्यवस्था से सभी सशंकित हैं, संभव है कि जिन क्षेत्रों में वह होर्डिंग व पोस्टर लगाए हैं वहां नई व्यवस्था में परिवर्तन भी हो जाए।
अभी शासन से नहीं मिली गाइडलाइन
आरक्षण के संबंध में कोई भी गाइडलाइन अभी शासन से प्राप्त नहीं हुई है। जैसा निर्देश मिलेगा उस तरह अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। -किरनख् डीपीआरओ
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दिया है। यह आदेश उन पंचायतों के लिए किसी वज्रपात से कम नहीं है जो दूसरी व तीसरी बार रोस्टर का लाभ पाते हुए अनारक्षित रह गई थीं। या फिर ऐसी तमाम ग्राम पंचायतें हैं जो रोस्टर के बावजूद दूसरी बार पिछड़े वर्ग के लिए आरक्षित होने में सफल रहीं।
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इस तरह की सबसे ज्यादा ग्राम पंचायतें गिलौला विकास खंड में थीं। इस विकास खंड में पहले हुए आरक्षण के दौरान तीसरे राउंड में अन्य पिछड़े वर्ग का कोटा पूरा हुआ था। वहीं हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब आधार वर्ष 2015 को बनाया गया है। ऐसे में यह माना जा रहा है कि आरक्षण के रोस्टर में पुन: फेरबदल होगा। ऐसे में जिन लोगों ने अब तक अपने मनमाफिक सीट होने के कारण अब तक मिठाइयां बांटने का दौर जारी रखा था उन्हें झटका लगना स्वाभाविक है।
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एससी सीटों के लिए आरक्षण में फेरबदल की संभावना कम
आरक्षण सूची निर्धारण करते समय भले ही जिले में वर्ष 1995 को आधार बनाया गया था। लेकिन आरक्षण निर्धारित करते समय 2015 के आरक्षण का महत्व सबसे ज्यादा था। ऐसे में जिले में 34 ऐसी पंचायतें थीं जो 2015 में अनारक्षित श्रेणी में थीं। इन्हीं से आरक्षण की शुरुआत की गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि कहीं न कहीं 2015 के आरक्षण के आंकड़ों के आधार पर ही सीटें आरक्षित हुईं।
इस तरह हो सकता आरक्षण में परिवर्तन
यदि पुराने फार्मूले के आधार पर वर्ष 2015 को आरक्षण का आधार बनाया जाए तो आरक्षण का शुरुआत अनुसूचित जाति महिला से होना है। ऐसे में अब तक की अनारक्षित समस्त सीटें सबसे ऊपर के क्रम में रखी जाएंगी। उसके बाद जनसंख्या के आधार पर अनुसूचित जाति बाहुल्य पंचायतों को घटते हुए क्रम में रखा जाएगा। यही प्रक्रिया अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए भी अपनाई जाती है। यदि कोई पंचायत 2015 में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी तो रोस्टर के मुताबिक उसे अन्य पिछड़े वर्ग में जाना चाहिए। ऐसे में इस वर्ग की सभी पंचायतों में पिछड़े वर्ग के 2011 के अनुसार दी गई जनसंख्या को घटते हुए क्रम में रखा जाएगा। जहां आरक्षण का रोस्टर पूरा होगा। वह पंचायतें आरक्षण की श्रेणी में आ जाएंगी। अवशेष सामान्य या फिर महिला की रेणी में जा सकती है।
होर्डिंग व पोस्टर लगाना हो सकता बेकार
आरक्षण की अंतिम सूची का इंतजार किए बिना ही चुनाव लड़ने वालों ने जिला पंचायत ही नहीं प्रधान पदों के लिए भी होर्डिंग व पोस्टर लगवाना प्रारंभ कर दिया था। यहां तक कि जिला पंचायत के लिए लगभग लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशियों ने लाखों रुपये खर्च कर डाले थे। लेकिन आरक्षण की नई व्यवस्था से सभी सशंकित हैं, संभव है कि जिन क्षेत्रों में वह होर्डिंग व पोस्टर लगाए हैं वहां नई व्यवस्था में परिवर्तन भी हो जाए।
अभी शासन से नहीं मिली गाइडलाइन
आरक्षण के संबंध में कोई भी गाइडलाइन अभी शासन से प्राप्त नहीं हुई है। जैसा निर्देश मिलेगा उस तरह अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। -किरनख् डीपीआरओ