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स्वास्थ्य विभाग न सजग, न दूसरों को कर रहा जागरूक

Wed, 18 Mar 2020 10:30 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 18 Mar 2020 10:30 PM IST
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Health department is neither alert nor aware of others
श्रावस्ती। कोरोना वायरस के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए अभी स्वास्थ्य महकमा खुद ही तैयार नहीं नजर आ रहा है। जिले के किसी भी सरकारी अस्पताल में न तो विसंक्रमण की व्यवस्था कराई गई है, और न ही मरीजों को कोई जानकारी ही उपलब्ध कराई जा रही है। यही नहीं अस्पतालों में कार्यरत संविदा व नियमित पैरामेडिकल व अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के लिए कार्य स्थल पर सेनेटाइजर व मास्क की व्यवस्था नहीं है।
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वहीं जिला प्रशासन ने एहतियात के तहत तहसील भिनगा क्षेत्र में धारा 144 लगाकर तीन साप्ताहिक बाजार को 31 मार्च तक बंद कर दिया गया। संस्कृत बोर्ड की गुरुवार से आयोजित होने वाली परीक्षा स्थगित हो गई। बोर्ड परीक्षा मूल्यांकन कार्य भी बंद कर दिया गया। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग न तो लोगों को जागरूक कर पा रहा है और न ही स्वयं जागरूक हो रहा है।
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कोरोना वायरस को महामारी घोषित किए जाने के बाद प्रशासन पूरी तरह से सतर्क है। एक ओर जहां स्कूल कॉलेज दो अप्रैल तक बंद कर दिए गए। वहीं परीक्षाएं भी अग्रिम आदेश तक निलंबित कर दी गई है। इस वायरस के प्रति शासन की गंभीरता इसी बात से जांची जा सकती है कि मुख्यमंत्री ने इसके लिए डीएम से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर कई निर्देश जारी किए है।
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खास तौर पर नेपाल सीमा पर बसे जनपदों को विशेष निर्देश दिया है। इनमें श्रावस्ती भी शामिल है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है विभिन्न चिकित्सालयों में वायरस की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही कार्यालयों में फर्नीचर, सीढ़ियां, रेलिंग, डोर हैंडिल को नियमित विसंक्रमण किया जाए।
इसके साथ ही मास्क, सेनेटाइजर, ग्लप्स व गाउन भी अस्पतालों में उपलब्ध रहे, लेकिन इस निर्देश का जिले में पालन नहीं हो रहा है। अस्पतालों में मरीजों की भीड़ है। मरीज आम दिनों की तरह एक दूसरे से सट कर भीड़ के बीच अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। इन मरीजों को जागरूक करने के लिए वहां कोई नहीं है। न ही इनके लिए किसी प्रकार का कोई सेनेटाइजर ही अस्पताल में उपलब्ध है।
मरीज तो मरीज अस्पतालों में काम करने वाले संविदा व नियमित कर्मचारियों की स्थिति भी कुछ इसी तरह है। चिकित्सकों की मेज पर तो सेनेटाइजर उपलब्ध है, लेकिन मरीजों के बीच में रहने वाले कर्मचारियों के लिए न तो मास्क की व्यवस्था है और न ही किसी प्रकार के सेनेटाइजर की। अस्पतालों को विसंक्रमण करने के लिए किसी प्रकार का छिड़काव भी अभी तक नहीं किया गया है।
ओपीडी व अल्ट्रासाउंड विंडो पर काफी भीड़ नजर आई। यहां लोगों को कोरोना वायरस के प्रति जागरूक करने के लिए कोई नहीं था। इससे लोग एक दूसरे से न केवल सट कर खड़े थे, बल्कि धक्का मुक्की भी हो रही थी। ओपीडी में आए हुए अधिकांश मरीज बुखार, जुकाम व खांसी से पीड़ित थे। यहां के पैरामेडिकल कर्मचारियों ने बताया कि वह बराबर यहां आने वाले सभी मरीजों के संपर्क में रहते हैं। किसी को इंजेक्शन तो किसी को मरहम पट्टी की, लेकिन उनके लिए कहीं भी सेनेटाइजर की व्यवस्था नहीं की गई है।
स्वास्थ्य केंद्र पर विसंक्रमण के लिए किसी प्रकार का छिड़काव नहीं किया गया था। न ही लोगों को जागरूक करने के लिए कोई दिखा। अधिकांश चिकित्सक बिना मास्क के ही ओपीडी कर रहे थे। जबकि यहां औसतन 800 से 900 मरीज विभिन्न प्रकार के रोगों से ग्रसित होकर आते हैं। यहां आने वाले मरीजों के लिए न तो सेनेटाइजर की व्यवस्था है और न ही साफ सफाई का कोई माकूल इंतजाम।
स्वास्थ्य पर्यवेक्षक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इकौना जेपी गौतम ने बताया कि 12 मार्च को सीएचसी में मैलाथियान का छिड़काव कराया था। उसके बाद फिर से छिड़काव का प्रबंध किया जा रहा है। चीफ फार्मेसिस्ट केके सिंह ने बताया कि जिला मुख्यालय से उन्हें 50 एमएल की दो बोतल सेनेटाइजर, 200 सुरक्षा मास्क और सरकार की ओर से कोरोना से बचाव के लिए जारी करीब 500 पर्चे उपलब्ध कराए गए है जो पर्याप्त नहीं है।
सीएचसी गिलौला में भी कोरोना से लोगों को जागरूक करने के लिए न तो किसी प्रकार का पर्चा, बैनर लगाया गया और न ही लोगों को व्यक्तिगत रूप से बताने के लिए किसी व्यक्ति की व्यवस्था की गई है। आने वाले मरीज रोजमर्रा के दिनों की तरह भीड़ के रूप में अस्पताल पहुंचे। ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के बाहर सभी गेट पर एक दूसरे से सट कर खड़े थे। यहां भी विसंक्रमण के लिए न तो किसी प्रकार के छिड़काव की व्यवस्था थी और न ही मरीजों के लिए सेनेटाइजर की व्यवस्था नजर आई। परिसर भी काफी गंदा दिखा।
कोरोेना वायरस के प्रकोप को देखते हुए 19 मार्च से जिले में आयोजित संस्कृत बोर्ड की परीक्षा अग्रिम आदेशों तक स्थगित कर दी गई है। जिले में बोर्ड परीक्षा कराने के लिए एक केंद्र बनाया गया था। इसमें 141 परीक्षार्थी पंजीकृत हैं।
कोरोना वायरस को लेकर प्रशासन सतर्क है। उनकी सतर्कता पर दिल्ली व चंडीगढ़ से प्रतिदिन आने वाली चार बसें पानी फेर रही हैं। यह बसें प्र्रतिदिन सेमरी व खरगौरा में आकर रुकती हैं। चंडीगढ़ की एक बस बहराइच के आसाम रोड पर रुकती है। इस बस पर प्रतिदिन 80 से 90 यात्री जिले में आ रहे हैं। इन यात्रियों पर निगाह रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिसको लेकर परेशान हैं।
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. विजय कुमार ने बताया कि मास्क की कमी नहीं है। जिला अस्पताल में करीब 2000 मास्क उपलब्ध है। यदि किसी कर्मचारी ने मास्क नहीं लिया है तो उसे उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा अस्पताल में सफाई और विसंक्रमण की व्यवस्था की गई है।
कोरोना वायरस के प्रभाव को देखते हुए बोर्ड परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन का कार्य बुधवार से बंद कर दिया गया है। यह अवकाश दो अप्रैल तक रहेगा। इसके बाद मूल्यांकन कार्य किया जाएगा। यह जानकारी जिला विद्यालय निरीक्षक चंद्रपाल ने दी है।

कोरोना वायरस को लेकर प्राथमिक विद्यालय बंद कर दिए गए हैं। इसको देखते हुए अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा ने निर्देश दिया है कि प्राथमिक विद्यालयों में परीक्षा कराने के बजाए यहां के छात्रों को बिना एग्जाम के ही अगली कक्षा में नामांकित कर दिया जाए। इसके चलते इस वर्ष जिले में पंजीकृत एक लाख 46 हजार 419 छात्र बिना परीक्षा के ही अगली कक्षा में प्रवेश पा जाएंगे।
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