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मित्रता करने से मिटता बैर
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प्रवचन के दौरान मौजूद उपासक उपासिकाएं व धर्म गुरू।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध सांस्कृतिक महासभा की ओर से विशेष पूजा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्म गुरू ड्रिकुंग क्याबगोन चेटसांग रिपोंछे ने की। इस दौरान आयोजित प्रवचन सत्र में भगवान बुद्ध के उपदेश पर चर्चा की गई। कहा कि गौतम बुद्ध मानते थे कि मित्रता करने से बैर मिटता है।
प्रवचन सत्र के दौरान धर्म गुरू ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का कहना है कि चार आर्य सत्य हैं । इसमें दुख, दुख का कारण, दुख का निदान व वह मार्ग जिससे दुख का निदान होता है। बुद्ध के मत में अष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है, जिससे दुख का निदान होता है।
अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्मांत, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के संदर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है। मध्यम मार्ग ज्ञान देने वाला, शांति देने वाला, निर्वाण देने वाला, कल्याणकारी है। और जो कल्याणकारी है वही श्रेयस्कर है। बुद्ध विश्वकल्याण के लिए मैत्री भावना पर बल देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे महावीर स्वामी ने मित्रता के प्रसार की बात कही थी।
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गौतम बुद्ध मानते हैं कि मैत्री के मोगरों की महक से ही संसार में सद्भाव का सौरभ फैल सकता है। वह कहते हैं कि बैर से बैर कभी नहीं मिटता, बैर न कर मित्रता करने से बैर मिटता है। मित्रता ही सनातन नियम है। गौतम बुद्ध घृणा के घावों पर मुहब्बत का मरहम लगाते हैं। आज बेईमानी के बाजार में स्वार्थ के सिक्के चल रहे हैं। वहीं सोमवार की शाम कैंडल मार्च भी निकाला गया। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु जल छन लामा, केटी ग्याल टशन तथा लद्दाख, भूटान, सिक्किम, देहरादून, अमेरिका, रूस, जर्मनी से आए उपासक मौजूद रहे।
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प्रवचन सत्र के दौरान धर्म गुरू ने कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का कहना है कि चार आर्य सत्य हैं । इसमें दुख, दुख का कारण, दुख का निदान व वह मार्ग जिससे दुख का निदान होता है। बुद्ध के मत में अष्टांगिक मार्ग ही वह मध्यम मार्ग है, जिससे दुख का निदान होता है।
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अष्टांगिक मार्ग ज्ञान, संकल्प, वचन, कर्मांत, आजीव, व्यायाम, स्मृति और समाधि के संदर्भ में सम्यकता से साक्षात्कार कराता है। मध्यम मार्ग ज्ञान देने वाला, शांति देने वाला, निर्वाण देने वाला, कल्याणकारी है। और जो कल्याणकारी है वही श्रेयस्कर है। बुद्ध विश्वकल्याण के लिए मैत्री भावना पर बल देते हैं। ठीक वैसे ही जैसे महावीर स्वामी ने मित्रता के प्रसार की बात कही थी।
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गौतम बुद्ध मानते हैं कि मैत्री के मोगरों की महक से ही संसार में सद्भाव का सौरभ फैल सकता है। वह कहते हैं कि बैर से बैर कभी नहीं मिटता, बैर न कर मित्रता करने से बैर मिटता है। मित्रता ही सनातन नियम है। गौतम बुद्ध घृणा के घावों पर मुहब्बत का मरहम लगाते हैं। आज बेईमानी के बाजार में स्वार्थ के सिक्के चल रहे हैं। वहीं सोमवार की शाम कैंडल मार्च भी निकाला गया। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु जल छन लामा, केटी ग्याल टशन तथा लद्दाख, भूटान, सिक्किम, देहरादून, अमेरिका, रूस, जर्मनी से आए उपासक मौजूद रहे।