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बालिकाओं को दी स्वच्छता की जानकारी
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श्रावस्ती। अज्ञानता व शर्म के कारण उन विशेष दिनों में किशोरियां विद्यालय आने से परहेज करती हैं। इसका अब समाधान हो रहा है। प्रथम चरण में जिले के 25 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में निशुल्क सेनेटरी नैपकिन देने व उसके डिस्पोजल की व्यवस्था कराई गई है, ताकि किशोरियों को विद्यालय आने में कोई झिझक न हो।
परिषदीय विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छता की जानकारी देने के लिए कई प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत जिले के 25 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बालिकाआें के मेंस्टुअल हाईजिन मैनेजमेंट के अंतर्गत 02 प्रकार की मशीनें लगाई गई हैं। इनमें से एक वेंडिंग मशीन है, जिसके माध्यम से किशोरियों को निशुुल्क सेनेटरी नैपकिन प्रदान किया जाएगा। वहीं दूसरी मशीन के माध्यम से प्रयोग किये गये सेनेटरी नैपकिन को नष्ट किया जाएगा।
सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अजीत कुमार उपाध्याय ने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं की ओर से अचानक विद्यालय छोड़ देने या ड्राप आउट हो जाने की मुख्य समस्या माहवारी की भी है। इन बालिकाओं को जब विद्यालय में माहवारी प्रबंधन की सुविधा प्राप्त नहीं होती है तो ऐसी दशा में बालिकाएं विद्यालय नहीं आती हैं। इस समस्या के निदान के लिए जिले के 25 विद्यालयों का चयन करते हुए वहां सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता एवं उसको नष्ट करने के लिए मशीन लगाई गई है।
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इनके माध्यम से ऐसी बालिकाएं जो माहवारी प्रभावित हैं उन्हें सुुविधा प्रदान होगी। ताकि किशोरियां उन विशेष दिनों में भी बेझिझक विद्यालय आ जा सकें। जिससे उनका पठन पाठन प्रभावित न हो। योजना सफल रही तो इसे जिले के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्थापित कराया जाएगा।
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परिषदीय विद्यालयों में बालिकाओं को स्वच्छता की जानकारी देने के लिए कई प्रकार के प्रयास किए जा रहे हैं। इसी के तहत जिले के 25 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बालिकाआें के मेंस्टुअल हाईजिन मैनेजमेंट के अंतर्गत 02 प्रकार की मशीनें लगाई गई हैं। इनमें से एक वेंडिंग मशीन है, जिसके माध्यम से किशोरियों को निशुुल्क सेनेटरी नैपकिन प्रदान किया जाएगा। वहीं दूसरी मशीन के माध्यम से प्रयोग किये गये सेनेटरी नैपकिन को नष्ट किया जाएगा।
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सर्व शिक्षा अभियान के जिला समन्वयक अजीत कुमार उपाध्याय ने बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बालिकाओं की ओर से अचानक विद्यालय छोड़ देने या ड्राप आउट हो जाने की मुख्य समस्या माहवारी की भी है। इन बालिकाओं को जब विद्यालय में माहवारी प्रबंधन की सुविधा प्राप्त नहीं होती है तो ऐसी दशा में बालिकाएं विद्यालय नहीं आती हैं। इस समस्या के निदान के लिए जिले के 25 विद्यालयों का चयन करते हुए वहां सेनेटरी नैपकिन की उपलब्धता एवं उसको नष्ट करने के लिए मशीन लगाई गई है।
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इनके माध्यम से ऐसी बालिकाएं जो माहवारी प्रभावित हैं उन्हें सुुविधा प्रदान होगी। ताकि किशोरियां उन विशेष दिनों में भी बेझिझक विद्यालय आ जा सकें। जिससे उनका पठन पाठन प्रभावित न हो। योजना सफल रही तो इसे जिले के सभी उच्च प्राथमिक विद्यालयों में स्थापित कराया जाएगा।