{"_id":"689e32a99cdf1919ac031cb7","slug":"followers-from-sri-lanka-prayed-at-anandabodhi-shravasti-news-c-104-1-srv1001-113371-2025-08-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Shravasti News: श्रीलंका से आए अनुयायियों ने आनंदबोधि पर की प्रार्थना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Shravasti News: श्रीलंका से आए अनुयायियों ने आनंदबोधि पर की प्रार्थना
Fri, 15 Aug 2025 12:32 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 15 Aug 2025 12:32 AM IST
विज्ञापन
तपोस्थली स्थित आनंदबोधि पर मौजूद अनुयायी। -संवाद
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को श्रीलंका से आए अनुयायियों से गुलजार रही। अनुयायियों ने आनंदबोधि पर भिक्षुणी माता सु़मेधा महाथेरो के नेतृत्व में प्रार्थना की। इस दौरान तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि, संघम शरणम गच्छामि, धम्मम शरणम गच्छामि से गूंजती रही।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षुणी सुमेधा महाथेरो ने बताया कि बुद्ध के अनुशासन में कल्याण की भावना थी, उनकी डांट में करुणा थी। बुद्ध ने मानव चेतना को सर्वोपरि माना। बौद्ध धर्म, धर्म के साथ एक व्यावहारिक मार्ग व आचार संहिता भी है, जो हमें बुराई से बचाते हुए अच्छे मार्ग पर चलना सिखाता है।
भिक्षुणी सुमेधा महाथेरो ने आगे बताया कि बुद्ध ने मानवता को आगे ले जाने का काम किया और स्वयं के अध्ययन का यत्न किया। अंधकार को मिटाने के लिए जिस प्रकार प्रकाश की आवश्यकता होती है, उसी तरह हमारे अंदर के अहंकार को मिटाने के लिए प्रकाश रूपी शक्ति को संजोना जरूरी है, तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है। इसके बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षुणी सुमेधा महाथेरो ने बताया कि बुद्ध के अनुशासन में कल्याण की भावना थी, उनकी डांट में करुणा थी। बुद्ध ने मानव चेतना को सर्वोपरि माना। बौद्ध धर्म, धर्म के साथ एक व्यावहारिक मार्ग व आचार संहिता भी है, जो हमें बुराई से बचाते हुए अच्छे मार्ग पर चलना सिखाता है।
विज्ञापन
भिक्षुणी सुमेधा महाथेरो ने आगे बताया कि बुद्ध ने मानवता को आगे ले जाने का काम किया और स्वयं के अध्ययन का यत्न किया। अंधकार को मिटाने के लिए जिस प्रकार प्रकाश की आवश्यकता होती है, उसी तरह हमारे अंदर के अहंकार को मिटाने के लिए प्रकाश रूपी शक्ति को संजोना जरूरी है, तभी हमारा जीवन सफल हो सकता है। इसके बाद सभी अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।
विज्ञापन