{"_id":"60411aea8ebc3edb5372f83f","slug":"figures-changed-formula-not-changed-effect-shown-on-reservation-srawasti-news-lko56793212","type":"story","status":"publish","title_hn":"आंकड़े बदले, नहीं बदला फार्मूला, आरक्षण पर दिखा प्रभाव","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
आंकड़े बदले, नहीं बदला फार्मूला, आरक्षण पर दिखा प्रभाव
विज्ञापन
श्रावस्ती। जनसंख्या का आंकड़ा इन दस वर्षों में बदल गया है। लेकिन त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में आरक्षण के लिए बनाया गया फार्मूला जस का तस है। इस विसंगतियों का असर पंचायत चुनाव आरक्षण में देखने को मिला। जहां जिस वर्ग की अधिकता थी वहां उसको अपना प्रतिनिधि मिलना मुश्किल हुआ।
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण नीति का आधार 2011 की जनगणना को बनाया गया है। यह आधार पांच वर्ष पूर्व हुए चुनाव में भी था। जबकि देखा जाए तो इन दस वर्षों में जिले की जनसंख्या की सूरत ही बदल दी। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में कुल 10 लाख 67 जहजार 535 लोग श्रावस्ती में निवास करते थे। यदि जातीय आंकड़ों पर भी गौर किया जाए तो अनुसूचित जनजाति के लोग 5514, अनुसूचित जाति के लोग 187422, अन्य पिछड़ा वर्ग 544621 व सामान्य वर्ग के लोग 329978 थे। जबकि 2015 में हुए आर्थिक सर्वेक्षण में ही यह आंकड़े बदल गए।
अब जिले के सरकारी अभिलेखों में कुल 12 लाख लोग दर्ज हैं। ऐसे में देखा जाए तो इन दस वर्ष के अंदर करीब एक लाख 32 हजार 465 लोगों की वृद्धि हुई। जो 2011 की जनगणना के सापेक्ष 12.40 प्रतिशत है। इस दस वर्ष के दौरान जिले में केवल जनसंख्या ही नहीं बढ़ी बल्कि कई तरह के अन्य आंकड़े भी बदल गए। इसमें से सबसे महत्वपूर्ण अनुसूचित जनजाति वाले गांव पंचायतें भी हैं।
विज्ञापन
2011 की जनगणना के अनुसार श्रावस्ती जनपद में सिरसिया के खैरी तराई में अनुसूचित जनजाति की संख्या दो, भचकाही में 1657, कटकुइयां कला में 753, मोतीपुर कला में 3015, शाहपुर बरगदवा में एक, परसा देवतहा में एक, डोमाई में एक, पटखौली में एक व रामपुर देवमन में सात थी। लेकिन मौके पर मोतीपुर, भचकाही व कटकुइयां कला को छोड़ दिया जाए तो शेष गांवों में एक भी अनुसूचित जनजाति के लोग मौजूद नहीं हैं।
इसी प्रकार वर्ष 2001 की जनगणना में बलनपुर बसंतपुर में अनुसूचित जनजातियों की संख्या चार थी। लेकिन 2011 में वहां पर जनसंख्या शून्य बताई गई थी। इन आंकड़ों की विसंगतियों से जिले में एक नई समस्या खड़ी हो गई है। इसका कारण है कि जहां जिस वर्ग के प्रतिनिधि मौजूद ही नहीं है। वहां पर उस वर्ग का प्रधान बनाने की तैयारी है।
नौकर रखना पड़ गया भारी
श्रावस्ती जिले में केवल सिरसिया विकास खंड के भचकाही, कटकुइयां कला व मोतीपुर कला में ही अनुसूचित जनजाति के लोग मूल रूप से रहते हैं। इस वर्ग का पहले मुख्य व्यवसाय मजदूरी ही था। जिसके चलते यहां के लोग जनपद ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में जाकर मजदूरी किया करते थे। यह परंपरा आज भी कायम है। इसी परंपरा के तहत 2001 की जनगणना व 2011 में हुई जनगणना में नौकर के रूप में कार्यरत मजदूरों को उनके मूल गांव के बजाए जहां वह नौकरी करते थे। वहां का निवासी बता कर दर्ज कर दिया गया। इसीलिए कहीं पर अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या एक तो कहीं दो केवल रामपुर देवमन में ही सात लोग दर्ज हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो 2011 की जनगणना के समय गांव में किसी का मकान बन रहा था। उस समय थारु समुदाय के लोगों को गांव में ही रोक कर मजदूरी का काम लिया जा रहा था। जनगणना करने वाले की लापरवाही के कारण इन मजदूरों को उनके मूल गांव के बजाए इसी गांव में दर्ज कर दिया गया। जो अब मुसीबत के रूप में आम जन के सामने ही नहीं प्रशासन के सामने भी आंकड़े खड़े हैं। गांव में एक भी व्यक्ति उस समुदाय का न होने के बाद भी वहां इसी वर्ग का प्रधान चुनने की कवायद प्रशासन कर रहा है।
जनसंख्या वृद्धि एक नजर में
1991- 675898
2001 - 855864
2011 - 1117361
2020 - 1294574
विज्ञापन
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए जारी आरक्षण नीति का आधार 2011 की जनगणना को बनाया गया है। यह आधार पांच वर्ष पूर्व हुए चुनाव में भी था। जबकि देखा जाए तो इन दस वर्षों में जिले की जनसंख्या की सूरत ही बदल दी। 2011 की जनगणना के अनुसार जिले में कुल 10 लाख 67 जहजार 535 लोग श्रावस्ती में निवास करते थे। यदि जातीय आंकड़ों पर भी गौर किया जाए तो अनुसूचित जनजाति के लोग 5514, अनुसूचित जाति के लोग 187422, अन्य पिछड़ा वर्ग 544621 व सामान्य वर्ग के लोग 329978 थे। जबकि 2015 में हुए आर्थिक सर्वेक्षण में ही यह आंकड़े बदल गए।
विज्ञापन
अब जिले के सरकारी अभिलेखों में कुल 12 लाख लोग दर्ज हैं। ऐसे में देखा जाए तो इन दस वर्ष के अंदर करीब एक लाख 32 हजार 465 लोगों की वृद्धि हुई। जो 2011 की जनगणना के सापेक्ष 12.40 प्रतिशत है। इस दस वर्ष के दौरान जिले में केवल जनसंख्या ही नहीं बढ़ी बल्कि कई तरह के अन्य आंकड़े भी बदल गए। इसमें से सबसे महत्वपूर्ण अनुसूचित जनजाति वाले गांव पंचायतें भी हैं।
विज्ञापन
2011 की जनगणना के अनुसार श्रावस्ती जनपद में सिरसिया के खैरी तराई में अनुसूचित जनजाति की संख्या दो, भचकाही में 1657, कटकुइयां कला में 753, मोतीपुर कला में 3015, शाहपुर बरगदवा में एक, परसा देवतहा में एक, डोमाई में एक, पटखौली में एक व रामपुर देवमन में सात थी। लेकिन मौके पर मोतीपुर, भचकाही व कटकुइयां कला को छोड़ दिया जाए तो शेष गांवों में एक भी अनुसूचित जनजाति के लोग मौजूद नहीं हैं।
इसी प्रकार वर्ष 2001 की जनगणना में बलनपुर बसंतपुर में अनुसूचित जनजातियों की संख्या चार थी। लेकिन 2011 में वहां पर जनसंख्या शून्य बताई गई थी। इन आंकड़ों की विसंगतियों से जिले में एक नई समस्या खड़ी हो गई है। इसका कारण है कि जहां जिस वर्ग के प्रतिनिधि मौजूद ही नहीं है। वहां पर उस वर्ग का प्रधान बनाने की तैयारी है।
नौकर रखना पड़ गया भारी
श्रावस्ती जिले में केवल सिरसिया विकास खंड के भचकाही, कटकुइयां कला व मोतीपुर कला में ही अनुसूचित जनजाति के लोग मूल रूप से रहते हैं। इस वर्ग का पहले मुख्य व्यवसाय मजदूरी ही था। जिसके चलते यहां के लोग जनपद ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों में जाकर मजदूरी किया करते थे। यह परंपरा आज भी कायम है। इसी परंपरा के तहत 2001 की जनगणना व 2011 में हुई जनगणना में नौकर के रूप में कार्यरत मजदूरों को उनके मूल गांव के बजाए जहां वह नौकरी करते थे। वहां का निवासी बता कर दर्ज कर दिया गया। इसीलिए कहीं पर अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या एक तो कहीं दो केवल रामपुर देवमन में ही सात लोग दर्ज हैं। स्थानीय लोगों की मानें तो 2011 की जनगणना के समय गांव में किसी का मकान बन रहा था। उस समय थारु समुदाय के लोगों को गांव में ही रोक कर मजदूरी का काम लिया जा रहा था। जनगणना करने वाले की लापरवाही के कारण इन मजदूरों को उनके मूल गांव के बजाए इसी गांव में दर्ज कर दिया गया। जो अब मुसीबत के रूप में आम जन के सामने ही नहीं प्रशासन के सामने भी आंकड़े खड़े हैं। गांव में एक भी व्यक्ति उस समुदाय का न होने के बाद भी वहां इसी वर्ग का प्रधान चुनने की कवायद प्रशासन कर रहा है।
जनसंख्या वृद्धि एक नजर में
1991- 675898
2001 - 855864
2011 - 1117361
2020 - 1294574