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Shravasti News: मौसम की मार बढ़ाई किसानों की चिंता
Sat, 31 Oct 2026 12:01 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Sat, 31 Oct 2026 12:01 AM IST
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बारिश के दौरान खेत में भीग रही धान की फसल।
श्रावस्ती/तुलसीपुर। अर्नब तूफान के पहले झटके से किसान उबर भी नहीं पाए थे कि शुक्रवार को मौसम ने फिर करवट ले ली। सुबह बूंदाबांदी, दोपहर में रिमझिम फुहारों के बाद शाम को झमाझम बारिश शुरू हो गई। इससे खेतों में खड़ी धान की फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गई है। बारिश के चलते तराई का अधिकतम तापमान पांच डिग्री गिरकर 23 डिग्री पहुंच गया। वहीं न्यूनतम तापमान में दो डिग्री की गिरावट के साथ 19 डिग्री दर्ज किया गया। तापमान में गिरावट से लोगों को अक्तूबर के अंतिम दिनों में नवंबर के आखिरी दिनों जैसी ठंड का एहसास हुआ।
इससे पहले अर्नब तूफान के दौरान तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया था। खेतों में पानी भरने से धान की फसल प्रभावित हुई थी। किसान किसी तरह खेतों से पानी निकालकर फसल बचाने और पकी धान की मड़ाई करने में जुटे थे। इसी बीच शुक्रवार को फिर बारिश शुरू हो गई।
सुबह घने बादलों के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई तो किसानों को आसमानी राहत की उम्मीद जगी। दोपहर में रिमझिम फुहारें पड़ीं, लेकिन शाम को तेज बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी। किसान खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। हालांकि बारिश के साथ तेज हवा नहीं चलने से किसानों ने फिलहाल राहत महसूस की।
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किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
तराई में दोबारा शुरू हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जमुनहा निवासी किसान मंजूर अली और बृजलाल ने बताया कि काफी मेहनत और लागत से तैयार धान की फसल अब कटाई के लिए पक चुकी है। ऐसे में बारिश से फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है। वहीं गिलौला निवासी किसान पंकज मिश्रा, लोदीराम और महेश ने बताया कि पिछली बारिश का पानी अभी खेतों में भरा है। पानी सूखने के बाद कटाई की तैयारी थी, लेकिन दोबारा बारिश से खेतों में गिरी फसल के सड़ने और धान की बालियों में अंकुरण होने का खतरा बढ़ गया है।
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इससे पहले अर्नब तूफान के दौरान तेज हवाओं के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने किसानों को काफी नुकसान पहुंचाया था। खेतों में पानी भरने से धान की फसल प्रभावित हुई थी। किसान किसी तरह खेतों से पानी निकालकर फसल बचाने और पकी धान की मड़ाई करने में जुटे थे। इसी बीच शुक्रवार को फिर बारिश शुरू हो गई।
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सुबह घने बादलों के साथ हल्की बूंदाबांदी हुई तो किसानों को आसमानी राहत की उम्मीद जगी। दोपहर में रिमझिम फुहारें पड़ीं, लेकिन शाम को तेज बारिश ने उनकी चिंता बढ़ा दी। किसान खेतों में खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान की आशंका जता रहे हैं। हालांकि बारिश के साथ तेज हवा नहीं चलने से किसानों ने फिलहाल राहत महसूस की।
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किसानों की मेहनत पर फिरा पानी
तराई में दोबारा शुरू हुई बारिश ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। जमुनहा निवासी किसान मंजूर अली और बृजलाल ने बताया कि काफी मेहनत और लागत से तैयार धान की फसल अब कटाई के लिए पक चुकी है। ऐसे में बारिश से फसल बर्बाद होने का डर सता रहा है। वहीं गिलौला निवासी किसान पंकज मिश्रा, लोदीराम और महेश ने बताया कि पिछली बारिश का पानी अभी खेतों में भरा है। पानी सूखने के बाद कटाई की तैयारी थी, लेकिन दोबारा बारिश से खेतों में गिरी फसल के सड़ने और धान की बालियों में अंकुरण होने का खतरा बढ़ गया है।

बारिश के दौरान खेत में भीग रही धान की फसल।