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मंडी में 700 रुपये घाटे में धान बेचने को मजबूर किसान

Sun, 24 Oct 2021 11:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 24 Oct 2021 11:54 PM IST
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Farmers forced to sell paddy at a loss of Rs 700 in Mandi
श्रावस्ती। धान की फसल अब तैयार हो चुकी है। सरकारी क्रय केंद्र खुलने में अभी समय है। इसके चलते किसान अपनी फसल मंडियों में पहुंचा रहे हैं। जहां उन्हें करीब सात सौ रुपये का घाटा लग रहा है।
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बाढ़ जलभराव समाप्त होने के बाद किसान अब धीरे-धीरे अपनी फसल को तैयार कर रहा है। जिले के अधिकांश हिस्सों में धान की मड़ाई तेजी के साथ हो रही है। किसान मड़ाई के बाद फसल को तत्काल बेचना चाहता है। इसके लिए वह सरकारी क्रय केंद्र खुलने का इंतजार नहीं कर रहा है। प्रतिदिन भिनगा के आढ़तियों के यहां धान की फसल पहुंच रही है। लेकिन इस फसल के एवज में किसानों को 1230 से लेकर 1280 रुपये प्रति क्विंटल ही मिल पा रहा है। जबकि देखा जाए तो सरकार ने इस वर्ष धान की फसल के लिए 1940 व 1960 रुपये निर्धारित किया है।
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नगद भुगतान के लिए किसान उठा रहे घाटा
धान की फसल तैयार होने के बाद नवंबर माह से गेहूं व अन्य फसल लगाने की तैयारी प्रारंभ हो जाएगी। ऐसे में किसानों को नगदी की जरूरत है। इसलिए वह एक नवंबर से होने वाले क्रय केंद्र व वहां लगने वाली लंबी कतार में न लगने के कारण बिचौलियों के हाथों अपनी फसल बेच रहे हैं। देखा जाए तो भिनगा में प्रतिदिन 100 से 150 क्विंटल फसल बिकने आती है। जहां 700 से 800 रुपये का घाटा सह कर किसान इसे बेच रहे हैं।
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क्रय केंद्रों से किसानों का मोह हो रहा भंग
सरकारी क्रय केंद्रों पर मानक पर खरा नहीं उतरेगी फसल सरकारी क्रय केंद्रों पर धान का मानक इस वर्ष सख्त बनाया गया है। सप्ताह में केवल शुक्रवार व शनिवार को 50 क्विंटल से अधिक की खरीद की जाएगी। प्रति क्विंटल केंद्र पर किसानों को 20 रुपये सफाई का देना होगा। इसके साथ ही उसे पंजीकरण, धान बेचने का नंबर पाने की लंबी कतार से गुजरना होगा। इसीलिए किसानों का मोह क्रय केंद्रों से भंग दिख रहा है।

किसान बोले, नहीं कर सकते इंतजार
इस बार फसल भीग चुकी है। उसकी गुणवत्ता भी प्रभावित हुई है। ऐसे में जब फसल अच्छी होती थी तो बेचना कठिन था। अब यह फसल क्रय केंद्रों पर कैसे बिकेगी इसी से हम लोग परेशान हैं। यह कहना है भिनगा क्षेत्र के किसान रामतीरथ यादव का। वहीं किसान द्वारिका प्रसाद कहते हैं कि किसान किसी भी हालत में उधार बेचने व बोरा उपलब्ध न होने के नाम पर महीनों फसल बेचने का इंतजार नहीं कर सकता। इसलिए घाटा लगे या लाभ हो। आढ़तियों के यहां इसे बेच कर पैसा लिया जा रहा है।
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