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गंगा दशहरा पर नदी के घट व तालाबों पर लगा मेला
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ृाप्ती नदी के तट पर गंगा दशहरा पर पूजन करती महिलाएं
- फोटो : SRAWASTI
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कटरा (श्रावस्ती)। ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष दशमी को जिले के राप्ती व बूढ़ी राप्ती नदी के विभिन्न घाटों सहित जलाशयों व तालाबों के किनारे गुरुवार को गंगा दशहरा मेले का आयोजन हुआ। इस दौरान लोगों ने स्नानदान कर अपने व कुटुंब के कल्याण की कामना किया।
राप्ती नदी के तट पर समाज सेविका रेनू गुप्ता ने पूजन कर कुटुंब के कल्याण की कामना की। वहीं पंडित संतोष तिवारी की अध्यक्षता में सीताद्वार झील में लोगों ने स्नानदान कर आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान पंडित तिवारी ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश हो जाता है। इसके साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है और शरीर शुद्ध रहता है। इस दिन गंगा पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
इस अवसर पर गंगा स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जैसा कि पौराणिक कथा में भी बताया गया है कि राजा भगीरथ अपने पूर्वजों का उद्धार करने और मोक्ष दिलाने के लिए अपनी कठोर तपस्या से मां गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। तो उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी थी। गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना जाने लगा। इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो गंगा स्तोत्र पढ़ता है वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है। स्कंद पुराण में दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र दिया हुआ है। अगर आप गंगा नदी नहीं जा पा रहे हैं तो आप घर के पास किसी नदी या तालाब में गंगा मां का ध्यान करते हुए स्नान कर सकता है।
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राप्ती नदी के तट पर समाज सेविका रेनू गुप्ता ने पूजन कर कुटुंब के कल्याण की कामना की। वहीं पंडित संतोष तिवारी की अध्यक्षता में सीताद्वार झील में लोगों ने स्नानदान कर आस्था की डुबकी लगाई। इस दौरान पंडित तिवारी ने कहा कि धार्मिक मान्यता के अनुसार, गंगा दशहरा के दिन गंगा स्नान करने से पापों का नाश हो जाता है। इसके साथ ही मानसिक शांति भी मिलती है और शरीर शुद्ध रहता है। इस दिन गंगा पूजा करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और अपना आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
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इस अवसर पर गंगा स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। जैसा कि पौराणिक कथा में भी बताया गया है कि राजा भगीरथ अपने पूर्वजों का उद्धार करने और मोक्ष दिलाने के लिए अपनी कठोर तपस्या से मां गंगा को पृथ्वी पर लाए थे। तो उस दिन ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी थी। गंगा माता के धरती पर अवतरण के दिन को ही गंगा दशहरा के नाम से पूजा जाना जाने लगा। इस दिन गंगा नदी में खड़े होकर जो गंगा स्तोत्र पढ़ता है वह अपने सभी पापों से मुक्ति पाता है। स्कंद पुराण में दशहरा नाम का गंगा स्तोत्र दिया हुआ है। अगर आप गंगा नदी नहीं जा पा रहे हैं तो आप घर के पास किसी नदी या तालाब में गंगा मां का ध्यान करते हुए स्नान कर सकता है।
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