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आठ बच्चों को दी सपनों की टच स्क्रीन

Fri, 02 Oct 2020 11:03 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Fri, 02 Oct 2020 11:03 PM IST
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Eight children were given the dream touch screen
श्रावस्ती। सपनों की टच स्क्रीन पाकर आठ बच्चों के चेहरे शुक्रवार को खिल गए। इन बच्चों को गांधी जयंती पर डीएम व सीडीओ ने कलेक्ट्रेट में पाठ्य सामग्री से लोड स्मार्ट फोन दिया। यह मोबाइल आम लोगों ने बच्चों के लिए दान दिए थे। इस अभियान की अपील कुछ दिन पहले डीएम ने ही की थी।
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कोरोना काल में शिक्षा के तरीके बदल गए। स्कूल के बजाए डिजिटल क्लास, डिस्टेंस लर्निंग के तहत कई नए नए तरीके उपयोग किए जाने लगे। कई साफ्टवेयर भी उभर कर सामने आए। जिससे बच्चों की क्लासें चलाई जा रही है। यह सब तरीके परिषदीय स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों के लिए बेकार दिखीं, जिनके घरों में स्मार्ट फोन ही नहीं था, या फिर वह ऐसे क्षेत्रों के निवासी थे जहां नेटवर्क की उपलब्धता नहीं है।
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देखा जाए तो इस प्रकार के करीब 175 विद्यालय जिले में हैं, जो भारत नेपाल सीमा से सटे व जंगल से घिरे हैं। जहां मोबाइल पर पढ़ाई करना तो दूर वहां ठीक से लोग फोन पर बात भी नहीं कर पाते। यही नहीं इन पंजीकृत स्कूलों में करीब एक लाख सोलह हजार बच्चों में अस्सी फीसदी ऐसे हैं जो बीपीएल परिवारों से आते हैं। जिनके घरों में रोजमर्रा खर्चे के लिए संघर्ष रहता है, और वह स्मार्ट फोन का भार वहन नहीं कर सकते। ऐसे में लगभग अस्सी हजार बच्चे इस आधुनिक शिक्षा पद्धति से जिले में वंचित हैं।
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ऐसे बच्चों के लिए जिले के बेसिक शिक्षा विभाग ने एक नई पहल करते हुए सपनों की टच स्क्रीन नाम से एक योजना चलाई। इस योजना के तहत आम लोगों से उनका खराब स्मार्ट फोन मांगा गया था। जिसे ठीक कराकर गरीब बच्चों को उपलब्ध कराना था। योजना को गति देते हुए डीएम ने भी कई संस्थाओं से इसमें शामिल होने की अपील की थी। इसी के तहत आठ लोगों ने अपना मोबाइल बेसिक शिक्षा विभाग को उपलब्ध कराया था।
जिसे ठीक कराकर उसमें बेसिक शिक्षा विभाग व नीति आयोग ने तैयार किए गए क्लास वार पाठ्य सामग्री लोड कराकर डीएम टीके शिबु व सीडीओ कुमार हर्ष ने आठ बच्चों में वितरित किया। यह बच्चे बिना आनलाइन हुए ही अपने पाठ्यक्रम को पढ़कर आधुनिक शिक्षा पद्धति से जुड़ सकेंगे। इस दौरान जिलाधिकारी टीके शिबु ने कहा कि स्मार्ट फोन आज भी गरीब परिवार की पहुंच से दूर है।

बदल रहे शिक्षा परिवेश में इसकी आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसको देखते हुए सपनों की टच स्क्रीन योजना चलाई जा रही है। इस योजना की सफलता के लिए आम लोगों से भी अपील है कि वह अपने घरों में पड़े खराब मोबाइल को हम तक पहुंचाएं। हम उन्हें ठीक कराकर जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाएंगे।
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