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Shravasti News: गांव में दिवाली जैसा माहौल, लौट आईं खुशियां, खूब दगे पटाखे

Sat, 02 Dec 2023 12:07 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 02 Dec 2023 12:07 AM IST
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Diwali like atmosphere in the village, happiness returned, lots of firecrackers burst
श्रावस्ती। उत्तराखंड में फंसे मजदूर शुक्रवार देर शाम अपने गांव लौट आए। उनका स्वागत बाबा जबदहा के जयकारों व फूल मालाओं के साथ हुआ। गांव पहुंचते ही अपनों को देख मजदूरों की आंखें भर आईं। मां अपने बेटे को व बेटियां अपने पिता को देख उनसे लिपट गईं। पूरे गांव में एक बार फिर दिवाली जैसा माहौल रहा। लोगों ने पटाखे दगाकर खुशी का इजहार किया।उत्तराखंड के टनल में 16 दिन रहने के बाद 17वें दिन जिले के छह मजदूर बाहर निकल आए। मुख्यमंत्री से मिलने के बाद शुक्रवार देर शाम सभी अपने गांव मोतीपुर कलां पहुंच गए। गांव में जैसे ही मजदूरों से भरी बस पहुंची तो परिवारीजनों के साथ ही गांव के लोगों ने बस को घेर लिया। हर कोई मजदूरों को एक बार देखना चाहता था।
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इस बीच अपने बेटों को सकुशल देख उनकी मां के आंखों से आंसू छलक आए। मां अपने बेटों से लिपट कर फफक कर रोने लगीं। इसी बीच कुछ मजदूरों की बेटियों उनसे लिपट गईं। इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ अपनों से मिलने का। पत्नी अपने पति के सकुशल लौटने पर भगवान का शुक्रिया अदा कर रहीं थीं, जबकि पिता की आंखें अब भी नम थीं।
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गांव ने पहले नहीं मनाई थी दिवाली
मजदूर ठीक दीपावली के दिन ही टनल में फंस गए थे, इसलिए गांव में दीपावली नहीं मनाई गई थी। मजदूर जब गांव पहुंचे तो पूरा दीपावली का माहौल था। गांव में उनका स्वागत घर के बाहर बने रंगाेली व पटाखों के साथ किया गया। पूरे गांव में बिजली होने के बावजूद दीपक की रोशनी ज्यादा तीखी लग रही थी।
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डीजे की धुन पर थिरक रहे थे लोग
दीपावली का माहौल गांव में सबके सिर पर चढ़ कर बोल रहा था। गांव में कई स्थानों पर लगे डीजे पर फिल्मी गाने बज रहे थे। एक स्थान पर गांव का ही युवक गा रहा था कि टनल से आया मेरा दोस्त, दोस्त को सलाम करो।

मनो वर्षों बाद मिले हों
जैसे ही मजदूर बस से नीचे उतरे। उनके भाइयों के साथ ही दोस्तों ने उनका स्वागत गले लग कर किया। देखने से लग रहा था की वर्षों बाद मिले हों।

गांव में मना भाईदूज
टनल में भाइयों के फंसे होने के कारण गांव में भाइदूज भी नहीं मनाई गई थी, लेकिन मजदूरों के वापस लौटते ही गांव में महिलाओं ने शुक्रवार को ही भाईदूज भी मनाया।

मोदी व योगी ने जीत लिया दिल, पूरी जिंदगी रखूंगा याद
टनल में फंसने के बाद लगा था की अब घर नहीं पहुंच पाऊंगा, लेकिन भले ही बाहर निकालने में 17 दिन लग गए हों, लेकिन मोदीजी ने कोई कसर हमारी सुविधा में नहीं छोड़ी। हमें लगातार खाना, पानी ऑक्सीजन मिलता रहा। तभी हम घर वापस आ पाए। वहीं योगीजी ने भी हमारे लिए हमारे ही जिले से एक अधिकारी भेज दिया। उससे हमें बहुत बल मिला।


हो रही है खुशी
राज्य सरकार की ओर से हमें मजदूरों को सकुशल उनके गांव तक लाने की जिम्मेदारी मिली थी। उसे हमने शुक्रवार रात को मजदूरों को उनके गांव सकुशल पहुंचा कर पूरा किया। आज मुझे भी अच्छा लग रहा है कि हमारे लोग अपने परिवारों के साथ मिल पा रहे हैं। -
- अरुण कुमार मिश्रा, राज्य समन्वयक
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