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बौद्ध धर्म संसद में भगवान बुद्ध के आत्मज्ञान पर हुई चर्चा

Sun, 17 Nov 2019 10:54 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Nov 2019 10:54 PM IST
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Discussion on enlightenment of Lord Buddha in Buddhism Parliament
बौद्ध सांस्कृतिक महासभा में पहुंचे बौद्ध धर्म गुरु। - फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध सांस्कृतिक महासभा की ओर से आयोजित पांच दिवसीय विशेष पूजा में रविवार को प्रवचन सत्र में भगवान बुद्ध के आत्मज्ञान पर चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता धर्म गुरू ड्रिकुंग क्याबगोन चेटसांग रिपोंछे ने की। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुख से मुक्ति के लिए मन के अंधकार से बाहर निकलना होगा।
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बौद्ध सांस्कृतिक महासभा की ओर से शुक्रवार से जिले में बौद्ध धर्म संसद का आयोजन किया जा रहा है। इसके तीसरे दिन धर्म गुरू ने भगवान बुद्ध के आत्मज्ञान पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने दुख व उसके कारक व उसके निदान पर आत्म मीमांसा की थी। इसी ज्ञान ने उनको बुद्ध बना दिया।
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दुख है तो उसका कारण भी है। यदि कारण का निदान हो जाए तो दुख से मुक्ति मिलेगी। दुख का कारण मन का अंधकार है। इसका कारण अज्ञान है। व्यक्ति अज्ञानता वश यह मेरा है, यह तेरा है, मैं हूं और सिर्फ मैं हूं के चक्कर में पड़ा रहता है। व्यक्ति जब से पैदा होता है तब से अपने दुख के द्वार स्वयं खोल लेता है।
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पैदा होते ही व्यक्ति अपने मन में अपनी ही एक मूर्ति स्थापित करता है। फिर धीरे धीरे उसका पोषण करता रहता है। यह मन की मूर्ति जो अज्ञान से बनती है, वह धीरे धीरे बड़ी होती जाती है। यह मूर्ति अहम की है। आदमी सोचता है कि मैं इतना बड़ा हूं, इतना महान हूं। मेरे अतिरिक्त संसार में कुछ भी नहीं। यही सोचते सोचते वह तृष्णा की चपेट में आ जाता है, और जीवन भर दुख से घिरा रहता है।
यदि व्यक्ति को इन दुखो से मुक्ति चाहिए तो उन्हें अपने अंधकार से बाहर निकलना होगा। उन्हें स्वयं व संसार के प्रति तटस्थ भाव में आना होगा। यानी कि यदि सुख की अनुभूति हो रही है तो उसके प्रति आसक्त्ता नहीं दिखानी है। इसी प्रकार यदि दुख है तो निराश नहीं होना है। क्योंकि सब कुछ क्षणभंगुर है। जो पैदा हुआ है, उसे नष्ट होना है। इसकी अपनी सतत प्रक्रिया है।

पैदा होने वाले को जब नष्ट ही होना है तो हम उसके प्रति अनुराग व द्वेष क्यों रखें। इसी तत्व ज्ञान ने राजकुमार गौतम को भगवान बुद्ध बना दिया। इस दौरान कौन छुक रिक जिन, केटीगयाटसन, बौद्ध भिक्षु जल छन लामा व लद्दाख, भूटान, नेपाल, जर्मनी, इंग्लैंड, रूस तथा सिक्किम, देहरादून, लखनऊ, सहारनपुर, दिल्ली से आए बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।
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