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हर हालात का डट कर करें मुकाबला
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श्री मेवालाल सियाराम पटवारी इण्टर कालेज में आयोजित अपराजिता कार्यक्रम के दौरान मौजूद छात्राएं,
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। शिक्षा के साथ साथ व्यवहारिक ज्ञान बेहद जरूरी है। कौन आपके प्रति कैसी सोच रखता है, उससे आपको फायदा है या नुकसान, इसकी समझ रखना भी जरूरी है। तभी आप पूरी तरह से खुद को सुरक्षित महसूस कर सकते हैं। आप को हर परिस्थिति का सामना करने के लिए खुद को तैयार करना है। कई बार ऐसे हालात सामने आ सकते हैं, जब कोई मदद करने वाला नहीं होगा। ऐसे में खुद को आत्मरक्षा के लिए तैयार करें, जिससे विषम परिस्थितियों में हर हालात का डटकर मुकाबला कर सकें। यह बातें अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत गिलौला के श्रीमेवालाल सियाराम पटवारी इंटर कॉलेज तुलसीपुर में आयोजित संवाद में प्रभारी थानाध्यक्ष सोनवा इंद्रदेव पांडेय ने कहीं।
उन्होंने छात्राओं से कहा कि शिक्षा से समाज में बदलाव लाया जा सकता है। इसलिए बालिका उच्च शिक्षा प्राप्त करें। इसके साथ यातायात नियम व संकेत के बारे में भी जानकारी रखें। जिससे आवागमन में कोई असुविधा न हो। पढ़ाई के साथ ही खेलकूद व आत्मरक्षा का गुर सीखना भी जरूरी है। जिससे यदि कोई आपके प्रति कोई गलत बरताव करता हो तो उसे सबक सिखाया जा सके। इतना ही नहीं हेल्प लाइन नंबरों की जानकारी होना भी जरूरी है, जिससे आपात स्थिति में पुलिस का सहयोग प्राप्त कर सकें। घर से बाहर निकलते समय एहतियात बरतना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्रधानाचार्य ने किया।
बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस न करें। पुलिस हर कदम आपके साथ है। आवश्यकता इस बात की है कि आप हेल्प लाइन नंबर, यातायात नियम व संकेत की जानकारी रखें। पढ़ने के साथ ही खेलकूद में भी रुचि रखें। - इंद्रदेव पांडेय, प्रभारी थानाध्यक्ष
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बालिकाओं को यदि बेहतर माहौल मिले तो वह न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करेंगी, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी होकर सम्मानजनक जीवन भी जी सकेंगी। बशर्ते माता पिता उन्हें पढ़ने का पूरा मौका दें । - सतीश चंद्र वर्मा, प्रधानाचार्य
छात्राओं को गुड व बैड टच की जानकारी जरूरी है। साथ ही वह यह भी देखें कि कौन ऐसा है जो उन्हें विद्यालय आते जाते परेशान करता है। इसकी जानकारी शिक्षक सहित माता पिता व पुलिस या हेल्प लाइन नंबर पर दें। - शोभाराम वर्मा शिक्षक
बच्चों को चाहिए कि वह नियमित समय सारिणी के अनुसार पठन पाठन के साथ ही खेलकूद व व्यायाम भी करें। अपने खान पान व दैनिक दिनचर्या का पूरा ख्याल रखें। बिना स्वस्थ रहे शिक्षा व आत्मरक्षा संभव नहीं है। - सुशांत वर्मा शिक्षक
बाक्स-
शिक्षा व संस्कार वह धन है जो कदम कदम पर हमारा सहयोगी बनता है। इसके साथ ही स्वस्थ शरीर भी आवश्यक है। ताकि हम हर क्षेत्र में अपने प्रतिभा का परचम लहरा सकें। - शहनाज
बेटियां ईश्वर का दिया उपहार हैं। ऐसे में माता पिता को चाहिए कि वह बेटियों की मुस्कान बनाए रखने के लिए उन्हें शिक्षित व स्वावलंबी बनाने बनाने का हर संभव प्रयास करें। - हिना
कार्यक्रम में बहुत कुछ सीखने को मिला। जो हर कदम पर काम आएगा। इससे दूसरों को भी फायदा मिले इसके लिए सभी ड्डश्चड्डह्म्ड्डद्भद्बह्लड्ड.ड्डद्वड्डह्म्ह्वद्भड्डद्यड्ड.ष्शद्व से जुड़े। - साजिया जमील
प्रत्येक माता पिता का यह सपना होता है कि उनकी बेटियां दुनिया व समाज में बेटों के समान उनका नाम रोशन करें। इसलिए बेटियों को भी चाहिए कि वह शिक्षा पर ध्यान दें। - लक्ष्मी यादव
शिक्षा वह रत्न है जिसे कोई चुरा नहीं सकता। जिसके पास शिक्षा व संस्कार हैं वह समाज में सम्मान जनक जीवन जी सकता है। इसलिए हमें शिक्षा पर ध्यान देना होगा। - लज्जा देवी
बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मरक्षा का गुर भी सिखाना चाहिए। ताकि बच्चियां बेखौफ हो विद्यालय आ जा सकें। यदि कोई उनकी राह रोके तो उसे सबक सिखा सकें। - प्रियंका विश्वकर्मा
बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं है। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। माता पिता भी बेटियों को बेटों के समान माहौल दें, ताकि वह सबके सपनों को पूरा कर सकें। - आरती पोरवाल
लड़का लड़की में भेद, बाल विवाह व कन्या भ्रूण हत्या समाज में कलंक है। इसे मिटाए बिना महिला सशक्तिकरण का सपना पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए बेटियां आगे आएं। - आंचल टंडन
शिक्षा से समाज में बदलाव लाया जा सकता है। इसलिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। वहीं वह सम्मानजनक जीवन जी सकें, इसके लिए उन्हें आत्मनिर्भर बनना होगा। - नैन्सी टंडन
सभी क्षेत्रों में सरकार बेटियों को समान मौका दे रही है। ऐसे में समाज को चाहिए कि वह भेदभाव भूल कर बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करें। - माही टंडन
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम के माध्यम से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। अपराजिता मुहिम ने हमको अपनी बात रखने के लिए मंच दिया उसके लिए धन्यवाद। - मिनी सिंह
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उन्होंने छात्राओं से कहा कि शिक्षा से समाज में बदलाव लाया जा सकता है। इसलिए बालिका उच्च शिक्षा प्राप्त करें। इसके साथ यातायात नियम व संकेत के बारे में भी जानकारी रखें। जिससे आवागमन में कोई असुविधा न हो। पढ़ाई के साथ ही खेलकूद व आत्मरक्षा का गुर सीखना भी जरूरी है। जिससे यदि कोई आपके प्रति कोई गलत बरताव करता हो तो उसे सबक सिखाया जा सके। इतना ही नहीं हेल्प लाइन नंबरों की जानकारी होना भी जरूरी है, जिससे आपात स्थिति में पुलिस का सहयोग प्राप्त कर सकें। घर से बाहर निकलते समय एहतियात बरतना आवश्यक है। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय के प्रधानाचार्य ने किया।
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बेटियां खुद को असुरक्षित महसूस न करें। पुलिस हर कदम आपके साथ है। आवश्यकता इस बात की है कि आप हेल्प लाइन नंबर, यातायात नियम व संकेत की जानकारी रखें। पढ़ने के साथ ही खेलकूद में भी रुचि रखें। - इंद्रदेव पांडेय, प्रभारी थानाध्यक्ष
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बालिकाओं को यदि बेहतर माहौल मिले तो वह न सिर्फ शिक्षा के क्षेत्र में अपना नाम रोशन करेंगी, बल्कि अपने पैरों पर खड़ी होकर सम्मानजनक जीवन भी जी सकेंगी। बशर्ते माता पिता उन्हें पढ़ने का पूरा मौका दें । - सतीश चंद्र वर्मा, प्रधानाचार्य
छात्राओं को गुड व बैड टच की जानकारी जरूरी है। साथ ही वह यह भी देखें कि कौन ऐसा है जो उन्हें विद्यालय आते जाते परेशान करता है। इसकी जानकारी शिक्षक सहित माता पिता व पुलिस या हेल्प लाइन नंबर पर दें। - शोभाराम वर्मा शिक्षक
बच्चों को चाहिए कि वह नियमित समय सारिणी के अनुसार पठन पाठन के साथ ही खेलकूद व व्यायाम भी करें। अपने खान पान व दैनिक दिनचर्या का पूरा ख्याल रखें। बिना स्वस्थ रहे शिक्षा व आत्मरक्षा संभव नहीं है। - सुशांत वर्मा शिक्षक
बाक्स-
शिक्षा व संस्कार वह धन है जो कदम कदम पर हमारा सहयोगी बनता है। इसके साथ ही स्वस्थ शरीर भी आवश्यक है। ताकि हम हर क्षेत्र में अपने प्रतिभा का परचम लहरा सकें। - शहनाज
बेटियां ईश्वर का दिया उपहार हैं। ऐसे में माता पिता को चाहिए कि वह बेटियों की मुस्कान बनाए रखने के लिए उन्हें शिक्षित व स्वावलंबी बनाने बनाने का हर संभव प्रयास करें। - हिना
कार्यक्रम में बहुत कुछ सीखने को मिला। जो हर कदम पर काम आएगा। इससे दूसरों को भी फायदा मिले इसके लिए सभी ड्डश्चड्डह्म्ड्डद्भद्बह्लड्ड.ड्डद्वड्डह्म्ह्वद्भड्डद्यड्ड.ष्शद्व से जुड़े। - साजिया जमील
प्रत्येक माता पिता का यह सपना होता है कि उनकी बेटियां दुनिया व समाज में बेटों के समान उनका नाम रोशन करें। इसलिए बेटियों को भी चाहिए कि वह शिक्षा पर ध्यान दें। - लक्ष्मी यादव
शिक्षा वह रत्न है जिसे कोई चुरा नहीं सकता। जिसके पास शिक्षा व संस्कार हैं वह समाज में सम्मान जनक जीवन जी सकता है। इसलिए हमें शिक्षा पर ध्यान देना होगा। - लज्जा देवी
बालिकाओं को शिक्षा के साथ आत्मरक्षा का गुर भी सिखाना चाहिए। ताकि बच्चियां बेखौफ हो विद्यालय आ जा सकें। यदि कोई उनकी राह रोके तो उसे सबक सिखा सकें। - प्रियंका विश्वकर्मा
बेटियां किसी भी मामले में बेटों से कम नहीं है। लोगों को अपनी सोच बदलनी होगी। माता पिता भी बेटियों को बेटों के समान माहौल दें, ताकि वह सबके सपनों को पूरा कर सकें। - आरती पोरवाल
लड़का लड़की में भेद, बाल विवाह व कन्या भ्रूण हत्या समाज में कलंक है। इसे मिटाए बिना महिला सशक्तिकरण का सपना पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए बेटियां आगे आएं। - आंचल टंडन
शिक्षा से समाज में बदलाव लाया जा सकता है। इसलिए बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना होगा। वहीं वह सम्मानजनक जीवन जी सकें, इसके लिए उन्हें आत्मनिर्भर बनना होगा। - नैन्सी टंडन
सभी क्षेत्रों में सरकार बेटियों को समान मौका दे रही है। ऐसे में समाज को चाहिए कि वह भेदभाव भूल कर बेटियों को बेटों के समान आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करें। - माही टंडन
अमर उजाला के संवाद कार्यक्रम के माध्यम से हमें बहुत कुछ सीखने को मिला। अपराजिता मुहिम ने हमको अपनी बात रखने के लिए मंच दिया उसके लिए धन्यवाद। - मिनी सिंह