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5650 को होम क्वारंटीन की सलाह लेकिन गांवों में चक्कर काट रहे परदेशी
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श्रावस्ती। कोरोना वायरस (कोविड-19) को लेकर जिले में भले ही चारों तरफ सतर्कता हो लेकिन होम क्वारंटीन के लिए गांव भेजे गए लोग आदेश मानने को तैयार नहीं हैं। गांवों में गुमटी से लेकर चाय की दुकान पर बाहर से आने वाले लोगों की बैठकी बढ़ी है। ये लोग घूम-घूम कर अपनी यात्रा के अनुभव सुना रहे हैं। इनके चलते गांवों में भी सुरक्षा चक्र टूटने का खतरा मंडरा रहा है।
कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन में कई महानगरों से लोग जिले में आए हैं जिनकी संख्या लगभग दस हजार के आसपास है। इनमें से 5650 ऐसे लोग हैं जिनकी चेकपोस्टों पर जांच हुई है और उनका नाम-पता प्रशासन के पास है। इन लोगों को गांव में जाकर चौदह दिनों तक अलग रहने, अलग खाने का निर्देश दिया गया था ताकि यदि उनके अंदर भविष्य में कोरोना का लक्षण पाया जाए तो उसका असर परिवार के अन्य सदस्यों पर न पड़े लेकिन ये लोग गांव जाकर प्रशासन की इस सलाह का मखौल उड़ा रहे हैं।
ऐसे ही बुधवार को सोनवा के चौगोई गांव में कई लोग मस्ती करते देखे गए। गांव स्थित चाय की दुकान खुली हुई थी जहां दस से पंद्रह ग्रामीण बैठे हुए थे। यहां एक व्यक्ति जो दो दिन पहले दिल्ली से लौटा है, वह अपनी यात्रा के अनुभव लोगों को सुना रहा था। रास्ते में क्या कठिनाई हुइ, कहां खाना मिला, कैसे वह जांच करने वालों की नजर बचाकर ग्रामीण रास्ते से होता हुआ पहुंचा, यह सब सुना रहा था।
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यही स्थिति इसी क्षेत्र के बढ़ईपुरवा गांव में देखने को मिला। यहां भी एक चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठे थे जिनमें से दो लोग सहारनपुर से गांव तक पैदल आए थे। ये भी रास्ते की घटनाओं को लोगों को सुना रहे थे। यही स्थिति जिले के अन्य गांवों की है। जहां होम क्वारंटीन की सलाह वाले लोग न केवल गांव स्थित गुमटी, चाय की दुकान या फिर अन्य लोगों के घरों में जाकर यात्रा की दास्तान सुना रहे हैं। इसके साथ ही सुरक्षा चक्र को भी तोड़ रहे हैं।
फील्ड हास्पिटल व संयुक्त जिला चिकित्सालय में अब क्वारंटीन किए गए लोगों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। इन लोगों में कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं पाया गया। इसलिए इन्हें घर में ही क्वारंटीन की सलाह दी गई है लेकिन अभी भी पच्चीस लोग संस्थागत क्वारंटीन में रखे गए हैं। इसमें कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में दो, एटीएस भयापुरवा में तीन, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय इकौना में दो व संयुक्त जिला चिकित्सालय में 18 लोग हैं।
क्वारंटीन का एक प्रोटोकाल है। इसके तहत जो लोग बाहर से आ रहे हैं जिनमें संक्रमण का कोई लक्षण फिलहाल नहीं मिला है, उन्हें होम क्वारंटीन रखने की व्यवस्था है। जो लोग बाहर से आए हैं लेकिन उन्हें किन्हीं कारणों से बुखार व अन्य कोई समस्या है उन्हें फील्ड क्वारंटीन में रखने की व्यवस्था है। यहां उनके खाने-पीने की व्यवस्था उनके परिवार वाले करते हैं जिससे वे लोग अलग रहकर सुरक्षित रहें।
यदि कोई गंभीर बीमार हो तो उसे हास्पिटल में क्वारंटीन किया जाता है जिससे वे चिकित्सकों की देखरेख में रहें लेकिन कोई संदिग्ध है जिसमें कोरोना के पूर्ण व आंशिक लक्षण पाए जाते हैं तो उसे आइसोलेशन वार्ड में रख कर उसके नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे जाते हैं। यदि कोई पाजिटिव पाया जाता है तो उसे कोविड-19 अस्पताल में एक अलग वार्ड में रखे जाने की व्यवस्था है।
सिरसिया के गुलरा हेमपुर निवासी गुड्डू कुछ दिन पूर्व मसकट से लौटा था। जिस फ्लाइट से वह आ रहा था उसमें एक व्यक्ति कोरोना पाजिटिव पाया गया था। इसके चलते एहतियातन गुड्डू को भी स्वास्थ्य टीम संयुक्त जिला चिकित्सालय में लाई थी। जहां लिए गए हिस्ट्री में कोरोना से संक्रमित होने का कोई भी लक्षण नहीं पाया गया।
लगभग 11 दिन उसे वापस लौटे हो चुका है। परिवार के अन्य सदस्यों में भी कोरोना संक्रमित से संबंधित कोई लक्षण नहीं पाया गया है। एहतियातन स्वास्थ्य विभाग ने गुड्डू के अन्य नमूने लेकर लखनऊ भेजा है। वहीं उसे संदिग्ध मानते हुए संयुक्त जिला चिकित्सालय में आईसोलेट किया गया है।
सीएमओ डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि होम क्वारंटीन में रखे गए लोगों पर निगरानी के लिए एएनएम, आशा, ग्राम सचिव व प्रधान को निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति होम क्वारंटीन का उल्लंघन करता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जाएगी। उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई होगी। इसलिए पुन: ग्राम प्रधान से अपील की जाती है कि वे अपने पंचायत में ऐसे लोगों पर निगाह रखें।
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कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन में कई महानगरों से लोग जिले में आए हैं जिनकी संख्या लगभग दस हजार के आसपास है। इनमें से 5650 ऐसे लोग हैं जिनकी चेकपोस्टों पर जांच हुई है और उनका नाम-पता प्रशासन के पास है। इन लोगों को गांव में जाकर चौदह दिनों तक अलग रहने, अलग खाने का निर्देश दिया गया था ताकि यदि उनके अंदर भविष्य में कोरोना का लक्षण पाया जाए तो उसका असर परिवार के अन्य सदस्यों पर न पड़े लेकिन ये लोग गांव जाकर प्रशासन की इस सलाह का मखौल उड़ा रहे हैं।
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ऐसे ही बुधवार को सोनवा के चौगोई गांव में कई लोग मस्ती करते देखे गए। गांव स्थित चाय की दुकान खुली हुई थी जहां दस से पंद्रह ग्रामीण बैठे हुए थे। यहां एक व्यक्ति जो दो दिन पहले दिल्ली से लौटा है, वह अपनी यात्रा के अनुभव लोगों को सुना रहा था। रास्ते में क्या कठिनाई हुइ, कहां खाना मिला, कैसे वह जांच करने वालों की नजर बचाकर ग्रामीण रास्ते से होता हुआ पहुंचा, यह सब सुना रहा था।
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यही स्थिति इसी क्षेत्र के बढ़ईपुरवा गांव में देखने को मिला। यहां भी एक चाय की दुकान पर कुछ लोग बैठे थे जिनमें से दो लोग सहारनपुर से गांव तक पैदल आए थे। ये भी रास्ते की घटनाओं को लोगों को सुना रहे थे। यही स्थिति जिले के अन्य गांवों की है। जहां होम क्वारंटीन की सलाह वाले लोग न केवल गांव स्थित गुमटी, चाय की दुकान या फिर अन्य लोगों के घरों में जाकर यात्रा की दास्तान सुना रहे हैं। इसके साथ ही सुरक्षा चक्र को भी तोड़ रहे हैं।
फील्ड हास्पिटल व संयुक्त जिला चिकित्सालय में अब क्वारंटीन किए गए लोगों की संख्या धीरे-धीरे घट रही है। इन लोगों में कोरोना वायरस का कोई लक्षण नहीं पाया गया। इसलिए इन्हें घर में ही क्वारंटीन की सलाह दी गई है लेकिन अभी भी पच्चीस लोग संस्थागत क्वारंटीन में रखे गए हैं। इसमें कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में दो, एटीएस भयापुरवा में तीन, कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय इकौना में दो व संयुक्त जिला चिकित्सालय में 18 लोग हैं।
क्वारंटीन का एक प्रोटोकाल है। इसके तहत जो लोग बाहर से आ रहे हैं जिनमें संक्रमण का कोई लक्षण फिलहाल नहीं मिला है, उन्हें होम क्वारंटीन रखने की व्यवस्था है। जो लोग बाहर से आए हैं लेकिन उन्हें किन्हीं कारणों से बुखार व अन्य कोई समस्या है उन्हें फील्ड क्वारंटीन में रखने की व्यवस्था है। यहां उनके खाने-पीने की व्यवस्था उनके परिवार वाले करते हैं जिससे वे लोग अलग रहकर सुरक्षित रहें।
यदि कोई गंभीर बीमार हो तो उसे हास्पिटल में क्वारंटीन किया जाता है जिससे वे चिकित्सकों की देखरेख में रहें लेकिन कोई संदिग्ध है जिसमें कोरोना के पूर्ण व आंशिक लक्षण पाए जाते हैं तो उसे आइसोलेशन वार्ड में रख कर उसके नमूने जांच के लिए लखनऊ भेजे जाते हैं। यदि कोई पाजिटिव पाया जाता है तो उसे कोविड-19 अस्पताल में एक अलग वार्ड में रखे जाने की व्यवस्था है।
सिरसिया के गुलरा हेमपुर निवासी गुड्डू कुछ दिन पूर्व मसकट से लौटा था। जिस फ्लाइट से वह आ रहा था उसमें एक व्यक्ति कोरोना पाजिटिव पाया गया था। इसके चलते एहतियातन गुड्डू को भी स्वास्थ्य टीम संयुक्त जिला चिकित्सालय में लाई थी। जहां लिए गए हिस्ट्री में कोरोना से संक्रमित होने का कोई भी लक्षण नहीं पाया गया।
लगभग 11 दिन उसे वापस लौटे हो चुका है। परिवार के अन्य सदस्यों में भी कोरोना संक्रमित से संबंधित कोई लक्षण नहीं पाया गया है। एहतियातन स्वास्थ्य विभाग ने गुड्डू के अन्य नमूने लेकर लखनऊ भेजा है। वहीं उसे संदिग्ध मानते हुए संयुक्त जिला चिकित्सालय में आईसोलेट किया गया है।
सीएमओ डॉ. एपी भार्गव ने बताया कि होम क्वारंटीन में रखे गए लोगों पर निगरानी के लिए एएनएम, आशा, ग्राम सचिव व प्रधान को निर्देश दिए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति होम क्वारंटीन का उल्लंघन करता है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जाएगी। उनके विरुद्ध विधिक कार्रवाई होगी। इसलिए पुन: ग्राम प्रधान से अपील की जाती है कि वे अपने पंचायत में ऐसे लोगों पर निगाह रखें।