{"_id":"5da0bd8e8ebc3e013a3e4d65","slug":"buddhist-worshipers-worshiped-in-taposthali-srawasti-news-lko4863222123","type":"story","status":"publish","title_hn":"बौद्ध अनुयायियों ने तपोस्थली में की पूजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बौद्ध अनुयायियों ने तपोस्थली में की पूजा
विज्ञापन
बौद्ध तपोस्थली का भ्रमण करते उपासक।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती शुक्रवार को बुद्धम शरणम गच्छामि के उद्घोष से गूंजायमान रही। श्रीलंका व ताईवान से आए अनुयायियों ने तपोस्थली में विशेष वर्षावास पूजा की। इसके बाद दल के सदस्यों ने भ्रमण कर तपोस्थली की ऐतिहासिक जानकारी भी ली।
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में शुक्रवार को श्रीलंका से साठ सदस्यीय दल व ताईवान से आए अनुयायियों ने जेतवन व आनंद बोधि में विशेष वर्षावास पूजा की। इसके बाद श्रीलंका से आए अनुयायियों ने जेतवन का भ्रमण भी किया। इस दौरान भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने श्रीलंकाई रीति रिवाज में पूजा कराई।
पूजन के दौरान उन्होंने कहा कि वर्षावास पूजा का श्रावस्ती में विशेष महत्व है। जो भी लोग श्रावस्ती में पूजा करने आते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवन काल के 24 वर्षावास श्रावस्ती में बिताया था। इसलिए श्रावस्ती का वर्षावास पूजा बौद्ध धर्म में बहुत महत्व रखता है।
विज्ञापन
विशेष पूजन के बाद सभी उपासकों ने शिवली स्तूप, गंधकुटि, पूर्वा राम बिहार, सभामंडप, अंगुलिमाल स्तूप आदि का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर उपासकों के उद्घोष के चलते समूची तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि से गूंजायमान रही। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, नाग सागर, धम्म सागर, नाग लोक, माता विद्यावती, सुख सागर आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती में शुक्रवार को श्रीलंका से साठ सदस्यीय दल व ताईवान से आए अनुयायियों ने जेतवन व आनंद बोधि में विशेष वर्षावास पूजा की। इसके बाद श्रीलंका से आए अनुयायियों ने जेतवन का भ्रमण भी किया। इस दौरान भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने श्रीलंकाई रीति रिवाज में पूजा कराई।
विज्ञापन
पूजन के दौरान उन्होंने कहा कि वर्षावास पूजा का श्रावस्ती में विशेष महत्व है। जो भी लोग श्रावस्ती में पूजा करने आते हैं उनकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है। भगवान बुद्ध ने अपने जीवन काल के 24 वर्षावास श्रावस्ती में बिताया था। इसलिए श्रावस्ती का वर्षावास पूजा बौद्ध धर्म में बहुत महत्व रखता है।
विज्ञापन
विशेष पूजन के बाद सभी उपासकों ने शिवली स्तूप, गंधकुटि, पूर्वा राम बिहार, सभामंडप, अंगुलिमाल स्तूप आदि का भ्रमण कर ऐतिहासिक जानकारी प्राप्त की। इस मौके पर उपासकों के उद्घोष के चलते समूची तपोस्थली बुद्धम शरणम गच्छामि से गूंजायमान रही। इस मौके पर बौद्ध भिक्षु आनंद सागर, नाग सागर, धम्म सागर, नाग लोक, माता विद्यावती, सुख सागर आदि मौजूद रहे।