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बौद्ध अनुयायियों ने की वर्षावास पूजा
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संस्कृतिक महासभा श्रावस्ती में वर्षावास पूजा करते भिक्षु।
- फोटो : SRAWASTI
कटरा (श्रावस्ती)। सांस्कृतिक महासभा की ओर से श्रावस्ती में वर्षावास पूजन का आयोजन किया जा रहा है। इसमें शामिल अनुयायियों ने शुक्रवार को वर्मा के बौद्धभिक्षु सतबीर परमोक्षा के नेतृत्व में विशेष प्रार्थना की।
इस दौरान बौद्धभिक्षु सतबीर परमोक्षा ने कहा कि भगवान बुद्ध ने पहला वर्षावास मृगदायन वन सारनाथ में व्यतीत किया था। यहीं पर उन्होंने आषाढ़ मास की पूर्णिमा को पंचवर्गीय भिक्षुओं को सद्धर्म की धम्मदेशना देकर संसार के समस्त प्राणियों के कल्याणार्थ पहली बार धर्मचक्र को चलाया था। इसीलिए बौद्ध धर्मावलंबी आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन को पवित्र मानते है।
उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने जीवन का अंतिम वर्षावास श्रावस्ती में व्यतीत किया था। यहां से प्रस्थान कर वह वैशाली होते हुए कुशीनगर पहुंचे थे। कुशीनगर के नजदीक मल्लों के शाल वन में वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन महा परिनिर्वाण प्राप्त किया था। वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन को त्रिविध पावनी मास माना जाता है।
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बौद्ध भिक्षु संघ आज भी वर्षाऋतु में नियमित रूप से एक निश्चित स्थान पर तीन माह ठहर कर वर्षावास के संकल्प का पालन करते हैं। बौद्धधर्म में वर्षावास के संकल्प का अपना अलग महत्व है। बुद्ध अनुयायी पहले से ही बुद्धविहार या किसी सार्वजनिक स्थान पर बौद्ध भिक्षु संघ के वर्षावास की व्यवस्था करते हैं। इस मौके पर काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।
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इस दौरान बौद्धभिक्षु सतबीर परमोक्षा ने कहा कि भगवान बुद्ध ने पहला वर्षावास मृगदायन वन सारनाथ में व्यतीत किया था। यहीं पर उन्होंने आषाढ़ मास की पूर्णिमा को पंचवर्गीय भिक्षुओं को सद्धर्म की धम्मदेशना देकर संसार के समस्त प्राणियों के कल्याणार्थ पहली बार धर्मचक्र को चलाया था। इसीलिए बौद्ध धर्मावलंबी आषाढ़ मास की पूर्णिमा के दिन को पवित्र मानते है।
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उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध ने अपने जीवन का अंतिम वर्षावास श्रावस्ती में व्यतीत किया था। यहां से प्रस्थान कर वह वैशाली होते हुए कुशीनगर पहुंचे थे। कुशीनगर के नजदीक मल्लों के शाल वन में वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन महा परिनिर्वाण प्राप्त किया था। वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन को त्रिविध पावनी मास माना जाता है।
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बौद्ध भिक्षु संघ आज भी वर्षाऋतु में नियमित रूप से एक निश्चित स्थान पर तीन माह ठहर कर वर्षावास के संकल्प का पालन करते हैं। बौद्धधर्म में वर्षावास के संकल्प का अपना अलग महत्व है। बुद्ध अनुयायी पहले से ही बुद्धविहार या किसी सार्वजनिक स्थान पर बौद्ध भिक्षु संघ के वर्षावास की व्यवस्था करते हैं। इस मौके पर काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे।