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Shravasti News: बौद्ध अनुयायियों ने तपोस्थली में की प्रार्थना
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कटरा (श्रावस्ती)। बुद्ध की तपोस्थली श्रावस्ती सोमवार को अनुयायियों से गुलजार रही। वियतनाम से आए दल ने बौद्ध भिक्षु देवानंद के नेतृत्व में आनंद बोधि पर प्रार्थना की।
इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध के सम्मुख एक शेर एक बकरे को मारने जा रहा था। बुद्ध ने उसे रोक दिया और बोले कि तुम उसे नहीं मार सकते। शेर बोला वो मेरा भोजन है, बुद्ध के चेहरे का तेज और ज्यादा उभरा और बोले किसी जीवित प्राणी का शरीर किसी का भोजन नहीं होता। शेर फिर गुस्से में बोला अरे महात्मा तू हट नहीं तो बुरा हो जाएगा। बुद्ध के चेहरे का तेज और भी ज्यादा उभर चुका था, वाणी एकदम कटाक्ष हो चुकी थी। वह फिर बोले कि मुझे भी दिखा कि क्या बुरा हो जाएगा। शेर अब उनके तेज के सामने शिथिल हो रहा था। वह बहुत करुणा से बोला मैं भूखा मर जाऊंगा। बुद्ध का तेज चरम पर था, इतना ज्यादा तेज पनपा की सिर पर पीछे तेज प्रकाश पुंज और चेहरे में वात्सल्य और करुणा झलक उठी। बुद्ध ने शेर के मुंह में अपना हाथ डाला और बोले, तू आज मुझे ही खा ले, लेकिन उसे छोड़ दे। शेर वैसे ही उनके तेज के सामने विनम्र होता जा रहा था। अब वो उनके पैर चूमने लगा कि हम साधुओं का भक्षण नहीं करते, और आप तो परमात्मा की शक्ति धारण करने वाले इंसान हो। महात्मा बुद्ध से सीख मिली कभी विचलित न होना, जीवों के प्रति करुणा रखना, खुद के अंदर ईश्वर खोजना, खुद ईश्वर की शक्ति प्राप्त करने के काबिल बनना और वक्त आने पर लोगों के लिए भगवान भी बन जाना। इस मौके पर काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे। (संवाद)
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इस दौरान बौद्ध भिक्षु देवानंद ने कहा कि बुद्ध के सम्मुख एक शेर एक बकरे को मारने जा रहा था। बुद्ध ने उसे रोक दिया और बोले कि तुम उसे नहीं मार सकते। शेर बोला वो मेरा भोजन है, बुद्ध के चेहरे का तेज और ज्यादा उभरा और बोले किसी जीवित प्राणी का शरीर किसी का भोजन नहीं होता। शेर फिर गुस्से में बोला अरे महात्मा तू हट नहीं तो बुरा हो जाएगा। बुद्ध के चेहरे का तेज और भी ज्यादा उभर चुका था, वाणी एकदम कटाक्ष हो चुकी थी। वह फिर बोले कि मुझे भी दिखा कि क्या बुरा हो जाएगा। शेर अब उनके तेज के सामने शिथिल हो रहा था। वह बहुत करुणा से बोला मैं भूखा मर जाऊंगा। बुद्ध का तेज चरम पर था, इतना ज्यादा तेज पनपा की सिर पर पीछे तेज प्रकाश पुंज और चेहरे में वात्सल्य और करुणा झलक उठी। बुद्ध ने शेर के मुंह में अपना हाथ डाला और बोले, तू आज मुझे ही खा ले, लेकिन उसे छोड़ दे। शेर वैसे ही उनके तेज के सामने विनम्र होता जा रहा था। अब वो उनके पैर चूमने लगा कि हम साधुओं का भक्षण नहीं करते, और आप तो परमात्मा की शक्ति धारण करने वाले इंसान हो। महात्मा बुद्ध से सीख मिली कभी विचलित न होना, जीवों के प्रति करुणा रखना, खुद के अंदर ईश्वर खोजना, खुद ईश्वर की शक्ति प्राप्त करने के काबिल बनना और वक्त आने पर लोगों के लिए भगवान भी बन जाना। इस मौके पर काफी संख्या में बौद्ध अनुयायी मौजूद रहे। (संवाद)
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