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पांच माह बीते स्कूलों तक नहीं पहुंचीं पुस्तकें
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श्रावस्ती के भिनगा स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय के निकट एक भवन में पहुंची किताबें
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। स्कूल खुले पांच माह बीत चुके हैं। अभी तक सभी बच्चों को पुस्तकें नहीं मिली हैं। किताबें अभी आ रही हैं। जो आ चुकी हैं उन्हें एक भवन में डंप किया गया है। जिनके वितरण की कोई व्यवस्था-नहीं है। वैसे भी किताबें बच्चों की संख्या से काफी कम आई हैं।
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को किताबें मुफ्त दी जाती हैं। लेकिन यह किताबें लगभग सत्र समाप्त होने के बाद ही मिल पाती हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक किताबें जिले में आपूर्ति की जा रही हैं। यही नहीं किताबें जिला मुख्यालय पर अभी भी डंप हैं। जिनका वितरण नहीं हुआ है। आंकड़े भी ऐसे हैं जो यह बता रहे हैं कि पंजीकृत सभी बच्चों के लिए जिले में किताबें आई ही नहीं हैं।
यदि आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जिले में एक लाख 68 हजार 400 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में पंजीकृत हैं। जबकि जिले में कुल एक लाख 42 हजार 249 बच्चों के लिए ही किताबें मंगाने का आर्डर बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया है। ऐसे में देखा जाए तो करीब 26 हजार बच्चों के लिए किताबें ऑर्डर ही नहीं हुई हैं। इसका कारण यह बताया जाता है कि किताबों का आर्डर पिछले शैक्षिक सत्र में पंजीकरण के आधार पर दिया जाता है। लेकिन कोविड काल में बच्चों की संख्या में अचानक परिषदीय स्कूलों में बढ़ गई। इससे किताबें कम पड़ गई।
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किताबें आपूर्ति फिर भी वितरण का इंतजार
परिषदीय विद्यालयों में कुछ किताबें आपूर्ति तो हुई। लेकिन उसका वितरण सही ढंग से नहीं हो रहा है। ऐसा ही कुछ मामला शनिवार को देखने को मिला। भिनगा के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका के निकट माध्यमिक शिक्षा विभाग के छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाया गया था। इस हॉस्टल के बरामदे में पुस्तकें डंप हैं।
इन किताबों की नहीं हुई आपूर्ति
बेसिक शिक्षा विभाग में होने वाली किताबों की आपूर्ति पूरी नहीं हुई है। कक्षा एक में वर्क बुक, दिनतारा व कलरव, कक्षा दो में वर्क बुक, दिनतारा व किसलय, कक्षा तीन में पंखुड़ी, संस्कृत प्यूसन, वर्क बुक जिसमें अंकों का जादू व रेनबो शामिल है। कक्षा चार में संस्कृत सुधा, वर्क बुल जिसमें अंक जगत व स्प्रिंग शामिल है। कक्षा पांच में गणित ज्ञान, अंग्रेजी, वर्क बुक जिसमें गणित ज्ञान सहित एक अन्य पुस्तक की आपूर्ति आज तक नहीं हुई है। ऐसे ही जूनियर हाईस्कूल की स्थिति है। जहां छात्रों को सभी पुस्तकें नहीं मिल पाईं।
जितनी किताबों की आपूर्ति हुई है। वह बच्चों को उपलब्ध हो चुकी हैं। कुछ किताबें अभी आ रही हैं उन्हें स्कूलों को भेजा जा रहा है। -प्रभुराम चौहान, बीएसए
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परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को किताबें मुफ्त दी जाती हैं। लेकिन यह किताबें लगभग सत्र समाप्त होने के बाद ही मिल पाती हैं। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अभी तक किताबें जिले में आपूर्ति की जा रही हैं। यही नहीं किताबें जिला मुख्यालय पर अभी भी डंप हैं। जिनका वितरण नहीं हुआ है। आंकड़े भी ऐसे हैं जो यह बता रहे हैं कि पंजीकृत सभी बच्चों के लिए जिले में किताबें आई ही नहीं हैं।
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यदि आंकड़ों पर गौर करें तो इस वर्ष जिले में एक लाख 68 हजार 400 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में पंजीकृत हैं। जबकि जिले में कुल एक लाख 42 हजार 249 बच्चों के लिए ही किताबें मंगाने का आर्डर बेसिक शिक्षा विभाग ने जारी किया है। ऐसे में देखा जाए तो करीब 26 हजार बच्चों के लिए किताबें ऑर्डर ही नहीं हुई हैं। इसका कारण यह बताया जाता है कि किताबों का आर्डर पिछले शैक्षिक सत्र में पंजीकरण के आधार पर दिया जाता है। लेकिन कोविड काल में बच्चों की संख्या में अचानक परिषदीय स्कूलों में बढ़ गई। इससे किताबें कम पड़ गई।
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किताबें आपूर्ति फिर भी वितरण का इंतजार
परिषदीय विद्यालयों में कुछ किताबें आपूर्ति तो हुई। लेकिन उसका वितरण सही ढंग से नहीं हो रहा है। ऐसा ही कुछ मामला शनिवार को देखने को मिला। भिनगा के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका के निकट माध्यमिक शिक्षा विभाग के छात्राओं के लिए हॉस्टल बनाया गया था। इस हॉस्टल के बरामदे में पुस्तकें डंप हैं।
इन किताबों की नहीं हुई आपूर्ति
बेसिक शिक्षा विभाग में होने वाली किताबों की आपूर्ति पूरी नहीं हुई है। कक्षा एक में वर्क बुक, दिनतारा व कलरव, कक्षा दो में वर्क बुक, दिनतारा व किसलय, कक्षा तीन में पंखुड़ी, संस्कृत प्यूसन, वर्क बुक जिसमें अंकों का जादू व रेनबो शामिल है। कक्षा चार में संस्कृत सुधा, वर्क बुल जिसमें अंक जगत व स्प्रिंग शामिल है। कक्षा पांच में गणित ज्ञान, अंग्रेजी, वर्क बुक जिसमें गणित ज्ञान सहित एक अन्य पुस्तक की आपूर्ति आज तक नहीं हुई है। ऐसे ही जूनियर हाईस्कूल की स्थिति है। जहां छात्रों को सभी पुस्तकें नहीं मिल पाईं।
जितनी किताबों की आपूर्ति हुई है। वह बच्चों को उपलब्ध हो चुकी हैं। कुछ किताबें अभी आ रही हैं उन्हें स्कूलों को भेजा जा रहा है। -प्रभुराम चौहान, बीएसए