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नए पूर्वांचल में मिलेंगे बेहतर शिक्षा व रोजगार के अवसर
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श्रावस्ती में मुख्य अतिथि का स्वागत करते लोग।
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। पूर्वांचल विकास बोर्ड एक नया पूर्वांचल बनाने की तैयारी कर रहा है। इसमें बेहतर शिक्षा व रोजगार के अवसर होंगे, उन्नत कृषि, उद्योग स्थापित करने का मौका मिलेगा। इस नए परिवर्तन को हकीकत में बदलने के लिए रविवार को पूर्वांचल विकास बोर्ड के सलाहकार जिले के दौरे पर थे। इस दौरान उन्होंने कई स्थानों पर बैठक कर लोगों से संभावनाओं पर चर्चा की।
बैठक के दौरान पूर्वांचल विकास बोर्ड के सलाहकार साकेत मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि बोर्ड केवल सड़क नाली खड़ंजे तक ही सीमित न रहे, वह इससे आगे की रूपरेखा तैयार करें। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रोजगार व उन्नत कृषि के साथ लाभकारी कृषि उत्पाद व एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण का माहौल तैयार करना हो। इस नए ताने बाने से नए पूर्वांचल की रूपरेखा बननी है।
उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के लोगों ने भारत ही नहीं विदेशों में भी व्यापार करके उच्च मुकाम हासिल किया है। इसके बाद भी यहां की स्थिति बदल नहीं रही है। इससे स्पष्ट है कि पहले चरण में मानसिक परिवर्तन की आवश्यकता है। लोग अपने घर, जिले व क्षेत्र में रह कर भी विकास की पटकथा लिख सकते हैं। पूर्वांचल विकास बोर्ड इसके लिए माहौल देगा। पूर्वांचल वाले जनपदों में नए विकास को पांच चरणों में लागू किया जाएगा।
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पहले चरण में रोजगार के लिए लाभकारी कृषि व इससे जुड़े सेक्टर व वाटर रिसोर्स पर कार्य किया जाना प्रस्तावित है। इसमें मत्स्य पालन की छोटी इकाई का विकास कर स्वत: रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। ऐसे ही इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य सेक्टरों में भी विकास की रूपरेखा तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि 70 साल में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल के विकास को लेकर इतना फोकस किया है।
वह चाहते हैं कि पूर्वांचल का समग्र विकास हो। इसीलिए जल्द ही एक सेमिनार होने वाला है। इसमें विश्व विद्यालयों के प्रोफेसर, सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र के विद्वान शामिल होंगे। वह यह तय करेंगे कि किस प्रकार पूर्वांचल को विकासांचल में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भी लोगों से मिल कर जमीनी हकीकत को परखना है। इस दौरान भिनगा, इकौना सहित कई स्थानों पर हुई बैठकों में उन्होंने जनप्रतिनिधियों से चर्चा की।
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बैठक के दौरान पूर्वांचल विकास बोर्ड के सलाहकार साकेत मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री चाहते हैं कि बोर्ड केवल सड़क नाली खड़ंजे तक ही सीमित न रहे, वह इससे आगे की रूपरेखा तैयार करें। इसमें सबसे महत्वपूर्ण रोजगार व उन्नत कृषि के साथ लाभकारी कृषि उत्पाद व एक बेहतर शैक्षणिक वातावरण का माहौल तैयार करना हो। इस नए ताने बाने से नए पूर्वांचल की रूपरेखा बननी है।
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उन्होंने कहा कि पूर्वांचल के लोगों ने भारत ही नहीं विदेशों में भी व्यापार करके उच्च मुकाम हासिल किया है। इसके बाद भी यहां की स्थिति बदल नहीं रही है। इससे स्पष्ट है कि पहले चरण में मानसिक परिवर्तन की आवश्यकता है। लोग अपने घर, जिले व क्षेत्र में रह कर भी विकास की पटकथा लिख सकते हैं। पूर्वांचल विकास बोर्ड इसके लिए माहौल देगा। पूर्वांचल वाले जनपदों में नए विकास को पांच चरणों में लागू किया जाएगा।
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पहले चरण में रोजगार के लिए लाभकारी कृषि व इससे जुड़े सेक्टर व वाटर रिसोर्स पर कार्य किया जाना प्रस्तावित है। इसमें मत्स्य पालन की छोटी इकाई का विकास कर स्वत: रोजगार के अवसर दिए जाएंगे। ऐसे ही इन्फ्रास्ट्रक्चर सहित अन्य सेक्टरों में भी विकास की रूपरेखा तैयार हो रही है। उन्होंने कहा कि 70 साल में पहली बार किसी मुख्यमंत्री ने पूर्वांचल के विकास को लेकर इतना फोकस किया है।
वह चाहते हैं कि पूर्वांचल का समग्र विकास हो। इसीलिए जल्द ही एक सेमिनार होने वाला है। इसमें विश्व विद्यालयों के प्रोफेसर, सामाजिक व आर्थिक क्षेत्र के विद्वान शामिल होंगे। वह यह तय करेंगे कि किस प्रकार पूर्वांचल को विकासांचल में परिवर्तित किया जाए। उन्होंने कहा कि उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भी लोगों से मिल कर जमीनी हकीकत को परखना है। इस दौरान भिनगा, इकौना सहित कई स्थानों पर हुई बैठकों में उन्होंने जनप्रतिनिधियों से चर्चा की।