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धान में फूटने लगे अंकुर, अन्य फसलें भी बर्बाद
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श्रावस्ती। बेमौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है। खेतों में पानी भरने से धान की करीब साठ प्रतिशत फसल बर्बाद हो चुकी है। बालियां अंकुरित होने लगी हैं। अरहर को अस्सी प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। अन्य फसलें भी प्रभावित हुईं हैं।
जिले में 76559 हेक्टेअर भूमि में धान की रोपाई की गई थी। 14985 हेक्टेअर भूमि में मक्का, 2400 हेक्टेअर में अरहर, 460 हेक्टेअर में तिल, 400 हेक्टेअर में बाजरा व 59 हेक्टेअर भूमि में उदड़ की बोआई की गई थी। साथ ही करीब चार हजार हेक्टेअर भूमि में गन्ना बोया गया था। जिले में विगत एक सप्ताह से रुक रुक कर हो रही बरसात के कारण राप्ती नदी सहित पहाड़ी नाले उफान पर आ गए जिनका पानी खेतों में आ जाने से फसलें डूब गईं। नतीजा यह रहा कि खेतों में लगी फसल विगत एक सप्ताह से या तो पानी में डूबी हुई है या फिर फसल तेज बहाव के कारण गिर गई है। अगेती प्रजाति की धान की फसल पानी में गिरने व डूब जाने के कारण अब उसमें अंकुरण हो रहा है।
वहीं ज्यादातर धान की बाली काली पडने लगी है। जिसके चलते धान की फसल को साठ प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। इससे खराब स्थिति अरहर की रही। जिसेे गिरने व पानी में डूबने के कारण अस्सी प्रतिशत से अधिक का नुकसान पहुंचा। जबकि बाजरा को करीब पचास प्रतिशत नुकसान हुआ है। तिल, उड़द व ज्यादातर मक्का कट जाने के कारण इसे नुकसान नहीं हुआ, लेकिन खेतों में लगी मक्का की फसल को भी साठ प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव बताते हैं कि फसलों को साठ से अस्सी फीसदी तक नुकसान हुआ है। इसकी सूचना शासन को भेजी जा रही है।
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जिले में 76559 हेक्टेअर भूमि में धान की रोपाई की गई थी। 14985 हेक्टेअर भूमि में मक्का, 2400 हेक्टेअर में अरहर, 460 हेक्टेअर में तिल, 400 हेक्टेअर में बाजरा व 59 हेक्टेअर भूमि में उदड़ की बोआई की गई थी। साथ ही करीब चार हजार हेक्टेअर भूमि में गन्ना बोया गया था। जिले में विगत एक सप्ताह से रुक रुक कर हो रही बरसात के कारण राप्ती नदी सहित पहाड़ी नाले उफान पर आ गए जिनका पानी खेतों में आ जाने से फसलें डूब गईं। नतीजा यह रहा कि खेतों में लगी फसल विगत एक सप्ताह से या तो पानी में डूबी हुई है या फिर फसल तेज बहाव के कारण गिर गई है। अगेती प्रजाति की धान की फसल पानी में गिरने व डूब जाने के कारण अब उसमें अंकुरण हो रहा है।
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वहीं ज्यादातर धान की बाली काली पडने लगी है। जिसके चलते धान की फसल को साठ प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ है। इससे खराब स्थिति अरहर की रही। जिसेे गिरने व पानी में डूबने के कारण अस्सी प्रतिशत से अधिक का नुकसान पहुंचा। जबकि बाजरा को करीब पचास प्रतिशत नुकसान हुआ है। तिल, उड़द व ज्यादातर मक्का कट जाने के कारण इसे नुकसान नहीं हुआ, लेकिन खेतों में लगी मक्का की फसल को भी साठ प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ। जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश कुमार यादव बताते हैं कि फसलों को साठ से अस्सी फीसदी तक नुकसान हुआ है। इसकी सूचना शासन को भेजी जा रही है।
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