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अवधी भारत की सांस्कृतिक धरोहर है...
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इकौना(श्रावस्ती)। मकर संक्रांति पर कटरा के जैन धर्मशाला में अखिल भारतीय अवधी समाज द्वारा गत दिवस काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में अवधी मिठास अवध प्रांत के अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव तथा विशिष्ट अतिथि लक्ष्मी शिक्षण सेवा संस्थान के अवध प्रांत उपाध्यक्ष अरुण श्रीवास्तव मौजूद रहे।
अवधी मिठास के संस्थापक व महासचिव मनोज मिश्रा कप्तान ने कहा अवधी का प्राचीन साहित्य बड़ा संपन्न है। इसमें भक्ति काव्य और प्रेमाख्यान काव्य दोनों का विकास हुआ। अवधी सिर्फ एक बोली नहीं, अपितु भारत की सांस्कृतिक धरोहर भी है। इस बोली भाषा का अपना एक अलग सामाजिक सरोकार है। दिवाकर पांडे ने कहा कि अवधी भाषा की कहावतें प्रदेश के अवध क्षेत्र के ग्रामीण लोक जीवन में अत्यधिक प्रचलित हैं।
इस दौरान मनोज मिश्रा कप्तान ने पढ़ा ‘सुधि लिहौ न आजी बाबा कै, ना कीमत पता पताबा कै। काली सड़किन पर दौरत हौ, का समझौ दर्द दुआबा कै’। इस मौके पर विकास दीप मोदनवाल, अभिषेक मिश्र, वैभव रत्न पांडे, आयुष सिंह, निशांत सिंह समेत तमाम लोगों ने कविता पाठ किया।
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अवधी मिठास के संस्थापक व महासचिव मनोज मिश्रा कप्तान ने कहा अवधी का प्राचीन साहित्य बड़ा संपन्न है। इसमें भक्ति काव्य और प्रेमाख्यान काव्य दोनों का विकास हुआ। अवधी सिर्फ एक बोली नहीं, अपितु भारत की सांस्कृतिक धरोहर भी है। इस बोली भाषा का अपना एक अलग सामाजिक सरोकार है। दिवाकर पांडे ने कहा कि अवधी भाषा की कहावतें प्रदेश के अवध क्षेत्र के ग्रामीण लोक जीवन में अत्यधिक प्रचलित हैं।
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इस दौरान मनोज मिश्रा कप्तान ने पढ़ा ‘सुधि लिहौ न आजी बाबा कै, ना कीमत पता पताबा कै। काली सड़किन पर दौरत हौ, का समझौ दर्द दुआबा कै’। इस मौके पर विकास दीप मोदनवाल, अभिषेक मिश्र, वैभव रत्न पांडे, आयुष सिंह, निशांत सिंह समेत तमाम लोगों ने कविता पाठ किया।
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