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पूरा हो रहा अटल-कलाम का नदियों को जोड़ने का सपना
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श्रावस्ती। पांच प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ने वाली सरयू योजक राष्ट्रीय परियोजना के लोकार्पण के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी व पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम का सपना भी साकार हो जाएगा। दोनों ने ही देश की प्रमुख नदियों को आपस में जोड़ कर सिंचित क्षेत्र बढ़ाने व बाढ़ की त्रासदी कम करने का सपना देखा था। सरयू परियोजना के तहत प्रदेश में सरयू, घाघरा, राप्ती, बाणगंगा व रोहिणी को जोड़ने का कार्य पूरा किया गया है। इसके माध्यम से 14.04 लाख हेक्टेअर भूमि को सिंचित बनाया जा सकेगा।
राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि सपने वह नहीं है जो हम नींद में देखते हैं। सपने वह हैं जो हमें नींद नहीं आने देते। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने प्रधानमंत्री रहते हुए सपना देखा था कि उनके शासन काल में ही देश की 37 प्रमुख नदियां आपस में जुड़ जाएं। इसके बावजूद वर्ष 2012 में राष्ट्रीय परियोजना में चयनित होने के बाद भी यूपीएकी केंद्र सरकार ने पांच नदियों को जोड़ने वाली इस परियोजना को कोई तवज्जो नहीं दी। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की सरकार आने के बाद अटल-कलाम के इस सपने को साकार करने के लिए फिर से जोरशोर से प्रयास शुरू हुए। इसका उद्देश्य सूखा और बाढ़ की समस्या को खत्म कर यूपी समेत आस पास के प्रदेश के किसानों को खेती किसानी में पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना था।
मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट का जिम्मा राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण को सौंपा। इसी के बाद सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को गतिमान बनाया गया और सरयू, घाघरा, राप्ती, रोहिणी, व बाणगंगा लिंक चैनल व नहरों के माध्यम से आपस में जुड़ने लगी। परियोजना का कार्य अब पूरा हो चुका है। अगले माह प्रधानमंत्री मोदी इस परियोजना का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थ नगर महाराजगंज व गोरखपुर में सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ ही बाढ़ से भी छुटकारा मिलेगा।
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परियोजना एक नजर में
बहराइच में घाघरा नदी पर निर्मित गिरजापुरी बैराज के बाएं से बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की सरयू योजक नहर (17.035 किलोमीटर) निकाली गई है। इससे सरयू नदी पर निर्मित सरयू बैराज के अपस्ट्रीम दाएं किनारे में पानी लाया जाएगा। सरयू बैराज के बाएं बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की 63.15 किलोमीटर की सरयू नहर निकाली गई है। सरयू मुख्य नहर के 21.4 किलोमीटर के दाएं बैक से इमामगंज शाखा प्रणाली निकाली गयी है। सरयू मुख्य नहर के 34.70 किलोमीटर के बाएं किनारे से राप्ती योजक नहर 21.4 किलोमीटर लंबाई में निर्मित कराई गई है। यह राप्ती नदी पर निर्मित राप्ती बैराज के अपस्ट्रीम में राप्ती नदी को पानी उपलब्ध कराएगी। इसका उपयोग 125.682 किलोमीटर लंबी राप्ती मुख्य नहर के लिए किया जाएगा।
सरयू मुख्य नहर के 63.150 किलोमीटर से दो शाखा प्रणाली बस्ती व गोंडा निकाली गई हैं। बस्ती शाखा से 4.20 लाख हेक्टेयर एवं गोंडा शाखा से 3.96 लाख हेक्टेयर सिंचाई होगी। राप्ती के मुख्य नहर के टेल से कैम्पियरगंज शाखा राप्ती मुख्य नहर प्रणाली से 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्रदान किया जाना भी प्रस्तावित है। इसी क्रम में श्रावस्ती में लक्ष्मनपुर कोठी के निकट निर्मित राप्ती बैराज के बाएं तट से राप्ती मुख्य नहर का निर्माण किया गया है। इसकी कुल लंबाई 125.682 किलोमीटर है।
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राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने कहा था कि सपने वह नहीं है जो हम नींद में देखते हैं। सपने वह हैं जो हमें नींद नहीं आने देते। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई ने प्रधानमंत्री रहते हुए सपना देखा था कि उनके शासन काल में ही देश की 37 प्रमुख नदियां आपस में जुड़ जाएं। इसके बावजूद वर्ष 2012 में राष्ट्रीय परियोजना में चयनित होने के बाद भी यूपीएकी केंद्र सरकार ने पांच नदियों को जोड़ने वाली इस परियोजना को कोई तवज्जो नहीं दी। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की सरकार आने के बाद अटल-कलाम के इस सपने को साकार करने के लिए फिर से जोरशोर से प्रयास शुरू हुए। इसका उद्देश्य सूखा और बाढ़ की समस्या को खत्म कर यूपी समेत आस पास के प्रदेश के किसानों को खेती किसानी में पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना था।
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मोदी सरकार ने इस प्रोजेक्ट का जिम्मा राष्ट्रीय जल विकास प्राधिकरण को सौंपा। इसी के बाद सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना को गतिमान बनाया गया और सरयू, घाघरा, राप्ती, रोहिणी, व बाणगंगा लिंक चैनल व नहरों के माध्यम से आपस में जुड़ने लगी। परियोजना का कार्य अब पूरा हो चुका है। अगले माह प्रधानमंत्री मोदी इस परियोजना का लोकार्पण कर राष्ट्र को समर्पित करेंगे। इससे बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थ नगर महाराजगंज व गोरखपुर में सिंचाई सुविधा बढ़ने के साथ ही बाढ़ से भी छुटकारा मिलेगा।
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परियोजना एक नजर में
बहराइच में घाघरा नदी पर निर्मित गिरजापुरी बैराज के बाएं से बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की सरयू योजक नहर (17.035 किलोमीटर) निकाली गई है। इससे सरयू नदी पर निर्मित सरयू बैराज के अपस्ट्रीम दाएं किनारे में पानी लाया जाएगा। सरयू बैराज के बाएं बैक से 360 क्यूसेक क्षमता की 63.15 किलोमीटर की सरयू नहर निकाली गई है। सरयू मुख्य नहर के 21.4 किलोमीटर के दाएं बैक से इमामगंज शाखा प्रणाली निकाली गयी है। सरयू मुख्य नहर के 34.70 किलोमीटर के बाएं किनारे से राप्ती योजक नहर 21.4 किलोमीटर लंबाई में निर्मित कराई गई है। यह राप्ती नदी पर निर्मित राप्ती बैराज के अपस्ट्रीम में राप्ती नदी को पानी उपलब्ध कराएगी। इसका उपयोग 125.682 किलोमीटर लंबी राप्ती मुख्य नहर के लिए किया जाएगा।
सरयू मुख्य नहर के 63.150 किलोमीटर से दो शाखा प्रणाली बस्ती व गोंडा निकाली गई हैं। बस्ती शाखा से 4.20 लाख हेक्टेयर एवं गोंडा शाखा से 3.96 लाख हेक्टेयर सिंचाई होगी। राप्ती के मुख्य नहर के टेल से कैम्पियरगंज शाखा राप्ती मुख्य नहर प्रणाली से 3.27 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा प्रदान किया जाना भी प्रस्तावित है। इसी क्रम में श्रावस्ती में लक्ष्मनपुर कोठी के निकट निर्मित राप्ती बैराज के बाएं तट से राप्ती मुख्य नहर का निर्माण किया गया है। इसकी कुल लंबाई 125.682 किलोमीटर है।