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पानी घटते ही मिलने लगीं लाशें
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बहोरवा के मजरा नौसहरा में जलभराव के बीच आते जाले ग्रामीण
- फोटो : SRAWASTI
श्रावस्ती। राप्ती नदी में आई बाढ़ ने अपने पीछे तबाही का मंजर छोड़ दिया है। पानी घटते ही गांव, घर, सड़क तटबंध टूटने के साथ तबाह फसलें दिखाई देने लगी है। यही नहीं बाढ़ में लापता हुए लोगों की लाशें भी अब अपने आप दिखाई देने लगी है। इस तबाही को कम करने के लिए लगभग 40 वर्ष पुनरोद्धार में लगने की उम्मीद जताई जा रही है।
राप्ती नदी में बरसात व नेपाल से आया हुआ पानी आठवें दिन भी खतरे के निशान से ऊपर है। बाढ़ का पानी जैसे-जैसे नीचे उतर रहा है। वैसे-वैसे बाढ़ के बाद के तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। तिलकपुर तटबंध टूट चुका है। तिलकपुर भंगहा सड़क कई जगह पर कट चुकी है। फोरलेन भी जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त है। बहराइच बलरामपुर हाईवे भी क्षतिग्रस्त है। ग्रामीण क्षेत्र की 226 से अधिक सड़कें 60 फीसदी तक क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे ही जिले में आवासीय व गैर आवासीय मिलाकर 40 से अधिक मकान ढह चुके हैं। इससे अधिक मकान को लोगों ने कटान के कारण स्वयं ही ध्वस्त कर दिया। गांवों की सड़क, नालियां सब कुछ जगह-जगह पर धंसी हुई हैं। वहीं जिले में 30 प्रतिशत से अधिक सड़क पर 50 से 60 फीसदी का नुकसान हुआ है। यही स्थिति परिषदीय स्कूलों के भवनों की है। अभी तक कई स्कूलों में पानी भरा है। जिसके कारण सही मूल्यांकन नहीं हो पाया है। लेकिन विभागीय आंकड़ों के अनुसार 90 फीसदी परिषदीय विद्यालय के भवन 30 से 40 फीसदी तक क्षतिग्रस्त हो चुके है। जबकि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के सभी विद्यालयों का पेंट, रंगरोगन, हैंडपंप बोरिंग आदि पूरी तरह से तबाह हो चुकी है।
कछार इलाकों में ढूंढ़े नहीं मिल रही फसल
राप्ती नदी के कछारी इलाकों में लगभग 25 फीसदी फसलों के ऊपर अभी भी पानी बह रहा है। जिन इलाकों में पानी उतर चुका है। वहां फसल का नामोनिशान दिखाई नहीं दे रहा है। यह फसल शिल्ट के नीचे दबी है। जबकि कुछ इलाकों में पानी उतरने के बाद फसलों में पुन: अंकुरण देखने को मिला। तो कहीं खड़ी धान की फसल सड़ कर काली हो चुकी है।
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पानी उतरने के बाद दिखने लगी लाशें
बाढ़ का पानी घटते ही बाढ़ में बह गए लेखपाल चंद्र भूषण तिवारी की लाश भौंसाए गांव के पास दिखाई पड़ी। जबकि शुकुलपुरवा के पास लापता विनोद कुमार व जोद्धी आर्य की लाश घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर शिल्ट में दबी हुई मिली। जिसे पुलिस ने बाहर निकाला। ऐसे तमाम चीजें अभी शिल्ट के नीचे दिखाई दे रही हैं। जिसमें मवेशियों की लाश व राप्ती में बहकर आने वालों का शव शामिल हो सकता है।
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राप्ती नदी में बरसात व नेपाल से आया हुआ पानी आठवें दिन भी खतरे के निशान से ऊपर है। बाढ़ का पानी जैसे-जैसे नीचे उतर रहा है। वैसे-वैसे बाढ़ के बाद के तबाही का मंजर देखने को मिल रहा है। तिलकपुर तटबंध टूट चुका है। तिलकपुर भंगहा सड़क कई जगह पर कट चुकी है। फोरलेन भी जगह-जगह पर क्षतिग्रस्त है। बहराइच बलरामपुर हाईवे भी क्षतिग्रस्त है। ग्रामीण क्षेत्र की 226 से अधिक सड़कें 60 फीसदी तक क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। ऐसे ही जिले में आवासीय व गैर आवासीय मिलाकर 40 से अधिक मकान ढह चुके हैं। इससे अधिक मकान को लोगों ने कटान के कारण स्वयं ही ध्वस्त कर दिया। गांवों की सड़क, नालियां सब कुछ जगह-जगह पर धंसी हुई हैं। वहीं जिले में 30 प्रतिशत से अधिक सड़क पर 50 से 60 फीसदी का नुकसान हुआ है। यही स्थिति परिषदीय स्कूलों के भवनों की है। अभी तक कई स्कूलों में पानी भरा है। जिसके कारण सही मूल्यांकन नहीं हो पाया है। लेकिन विभागीय आंकड़ों के अनुसार 90 फीसदी परिषदीय विद्यालय के भवन 30 से 40 फीसदी तक क्षतिग्रस्त हो चुके है। जबकि बाढ़ग्रस्त क्षेत्र के सभी विद्यालयों का पेंट, रंगरोगन, हैंडपंप बोरिंग आदि पूरी तरह से तबाह हो चुकी है।
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कछार इलाकों में ढूंढ़े नहीं मिल रही फसल
राप्ती नदी के कछारी इलाकों में लगभग 25 फीसदी फसलों के ऊपर अभी भी पानी बह रहा है। जिन इलाकों में पानी उतर चुका है। वहां फसल का नामोनिशान दिखाई नहीं दे रहा है। यह फसल शिल्ट के नीचे दबी है। जबकि कुछ इलाकों में पानी उतरने के बाद फसलों में पुन: अंकुरण देखने को मिला। तो कहीं खड़ी धान की फसल सड़ कर काली हो चुकी है।
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पानी उतरने के बाद दिखने लगी लाशें
बाढ़ का पानी घटते ही बाढ़ में बह गए लेखपाल चंद्र भूषण तिवारी की लाश भौंसाए गांव के पास दिखाई पड़ी। जबकि शुकुलपुरवा के पास लापता विनोद कुमार व जोद्धी आर्य की लाश घटना स्थल से कुछ ही दूरी पर शिल्ट में दबी हुई मिली। जिसे पुलिस ने बाहर निकाला। ऐसे तमाम चीजें अभी शिल्ट के नीचे दिखाई दे रही हैं। जिसमें मवेशियों की लाश व राप्ती में बहकर आने वालों का शव शामिल हो सकता है।