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भगवान बुद्ध के समय का है आनंद बोधि वृक्ष : देवेंद्र थेरो
Fri, 31 Oct 2025 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, श्रावस्ती
Updated Fri, 31 Oct 2025 12:48 AM IST
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श्रावस्ती स्थित आनंद बोधि के पास पूजन करते अनुयायी। -संवाद
कटरा। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती बृहस्पतिवार को मलेशिया से आए 40 अनुयायियों से गुलजार रही। सभी अनुयायियों ने यंग बोधिसत्व सोसायटी के अध्यक्ष भिक्षु देवेंद्र थेरो के नेतृत्व में आनंद बोधि पर विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान बौद्ध सभा का भी आयोजन किया गया।
बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवेंद्र थेरो ने कहा कि जेतवन विहार के ठीक सामने आनंद बोधि स्थित है। आनंद बोधि वृक्ष भगवान बुद्ध के समय का है। इसका उल्लेख पजिवलिय नामक सिंहली ग्रंथ में मिलता है।
जेतवन महाविहार में उल्लेख मिलता है कि महात्मा बुद्ध यहां केवल वर्षा ऋतु में ही ठहरते थे। शेष समय वह भ्रमण करके उपदेश देते थे। अनुयायियों के स्थायी चिह्न देने के अनुरोध पर भगवान बुद्ध अपने प्रधान शिष्य आनंद को बोधि वृक्ष की शाखा श्रावस्ती में लगाने की आज्ञा दी थी।
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महात्मा बुद्ध ने इसके नीचे पूरी एक रात ध्यानावस्था में व्यतीत कर इस वृक्ष की महत्ता एवं पवित्रता को और बढ़ा दिया था। तब से लेकर आज तक अनुयायी इसे बुद्ध का रूप मानकर पूजते हैं। सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।
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बौद्ध सभा को संबोधित करते हुए भिक्षु देवेंद्र थेरो ने कहा कि जेतवन विहार के ठीक सामने आनंद बोधि स्थित है। आनंद बोधि वृक्ष भगवान बुद्ध के समय का है। इसका उल्लेख पजिवलिय नामक सिंहली ग्रंथ में मिलता है।
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जेतवन महाविहार में उल्लेख मिलता है कि महात्मा बुद्ध यहां केवल वर्षा ऋतु में ही ठहरते थे। शेष समय वह भ्रमण करके उपदेश देते थे। अनुयायियों के स्थायी चिह्न देने के अनुरोध पर भगवान बुद्ध अपने प्रधान शिष्य आनंद को बोधि वृक्ष की शाखा श्रावस्ती में लगाने की आज्ञा दी थी।
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महात्मा बुद्ध ने इसके नीचे पूरी एक रात ध्यानावस्था में व्यतीत कर इस वृक्ष की महत्ता एवं पवित्रता को और बढ़ा दिया था। तब से लेकर आज तक अनुयायी इसे बुद्ध का रूप मानकर पूजते हैं। सभा के बाद अनुयायियों ने तपोस्थली का भ्रमण किया।