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तहसीलदार के स्थानांतरण को लेकर लामबंद हुए अधिवक्ता
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श्रावस्ती विधायक को ज्ञापन सौंपते अधिवक्ता
- फोटो : SRAWASTI
इकौना (श्रावस्ती)। इकौना के अधिवक्ता तहसीलदार के खिलाफ लामबंद हैं। जिनके द्वारा विगत दिनों तहसीलदार को बंधक बनाया गया था। वहीं शनिवार को इकौना तहसील अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन श्रावस्ती विधायक को देकर तहसीलदार के स्थानांतरण की मांग की है।
श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडे को सौंपे मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कहा है कि तहसीलदार इकौना पीके राय भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उनके द्वारा बैनामे के अमल दरामद के नाम पर वसूली की जाती है। जिसका अधिवक्ताओं द्वारा विरोध किया गया था। इसके बावजूद उनकी कार्य प्रणाली में बदलाव न आने के कारण अधिवक्ता कई दिनों से आंदोलनरत हैं। साथ ही तहसीलदार इकौना सामान्य नामांतरण आदेश पारित नहीं कर रहे है। जिससे क्षेत्र की जनता को महीनों तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
वहीं 115 सी के मामलों में एकतरफा कार्रवाई कर गांव में जाकर अवैध वसूली कर रहे हैं। तहसीलदार खुले आम कहते हैं कि मेरे कोर्ट से 250 रुपये में दाखिल खारिज नहीं होगा। अगर दाखिल खारिज कराना हो तो 1500 रुपये लेकर आना। इस मामले को लेकर गत दिनों तहसीलदार व अधिवक्ताओं के बीच काफी झड़प हो गई थी। यही नहीं वकीलों ने तहसीलदार को उन्हीं के चेंबर में एक घंटे तक बंदी बना रखा था। बाद में प्रभारी निरीक्षक वकील पांडेय ने मौके पर पहुंचकर तहसीलदार को मुक्त कराया था।
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अधिवक्ताओं की शिकायत व ज्ञापन के बाद श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय ने डीएम से वार्ता कर तहसीलदार को हटवाने व उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया। इस मौके पर संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा, महामंत्री श्रीधर द्विवेदी, एके सिंह, उदयराज त्रिपाठी, दिलीप शर्मा, वीरेंद्र मिश्रा, पाटेश्वरी प्रसाद मिश्र सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। (संवाद)
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श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडे को सौंपे मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने कहा है कि तहसीलदार इकौना पीके राय भ्रष्टाचार में लिप्त हैं। उनके द्वारा बैनामे के अमल दरामद के नाम पर वसूली की जाती है। जिसका अधिवक्ताओं द्वारा विरोध किया गया था। इसके बावजूद उनकी कार्य प्रणाली में बदलाव न आने के कारण अधिवक्ता कई दिनों से आंदोलनरत हैं। साथ ही तहसीलदार इकौना सामान्य नामांतरण आदेश पारित नहीं कर रहे है। जिससे क्षेत्र की जनता को महीनों तहसील का चक्कर लगाना पड़ रहा है।
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वहीं 115 सी के मामलों में एकतरफा कार्रवाई कर गांव में जाकर अवैध वसूली कर रहे हैं। तहसीलदार खुले आम कहते हैं कि मेरे कोर्ट से 250 रुपये में दाखिल खारिज नहीं होगा। अगर दाखिल खारिज कराना हो तो 1500 रुपये लेकर आना। इस मामले को लेकर गत दिनों तहसीलदार व अधिवक्ताओं के बीच काफी झड़प हो गई थी। यही नहीं वकीलों ने तहसीलदार को उन्हीं के चेंबर में एक घंटे तक बंदी बना रखा था। बाद में प्रभारी निरीक्षक वकील पांडेय ने मौके पर पहुंचकर तहसीलदार को मुक्त कराया था।
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अधिवक्ताओं की शिकायत व ज्ञापन के बाद श्रावस्ती विधायक रामफेरन पांडेय ने डीएम से वार्ता कर तहसीलदार को हटवाने व उनकी मांग को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने का आश्वासन भी दिया। इस मौके पर संघ के अध्यक्ष सुरेंद्र मिश्रा, महामंत्री श्रीधर द्विवेदी, एके सिंह, उदयराज त्रिपाठी, दिलीप शर्मा, वीरेंद्र मिश्रा, पाटेश्वरी प्रसाद मिश्र सहित अन्य अधिवक्ता मौजूद रहे। (संवाद)