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राप्ती की धारा में समाई 65 बीघा कृषि भूमि
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श्रावस्ती। जिले में विगत पांच दिनों से बरसात नहीं हुई। आसमान पर उमड़ घुमड़ रहे बादल बिना बरसे लौट रहे हैं। इससे बढ़ी उमस के कारण लोग परेशान हैं। वहीं बरसात थमने के बाद राप्ती का जलस्तर धीरे धीरे सामान्य होने लगा है। ऐसे में नदी की लहरों ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। इससे बुधवार को करीब 65 बीघा कृषि योग्य भूमि कटकर नदी की धारा में विलीन हो गई है। वहीं केन नाले का जलस्तर घटने के कारण लक्ष्मनपुर मार्ग पर आवागमन और सुगम हो गया है।
तराई में विगत पांच दिनों से मौसम सामान्य बना है। आसमान पर उमड़ घुमड़ रहे घने काले बादल बिना बरसे वापस लौट रहे हैं। ऐसे में सुबह का मौसम पूरी तरह खुशगवार रहता है। वहीं दोपहर में निकलने वाली धूप व पुरवा हवा के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोगों को पसीने से तरबतर देखा जा रहा है। इस बीच दोपहर में होने वाली अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है।
वहीं इसके विपरीत पांच दिनों से बरसात न होने के कारण राप्ती का जलस्तर भी सामान्य हो रहा है। ऐसे में जहां कछार के गांवों में उत्पन्न बाढ़ का खतरा टल जाने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। वहीं घटते जल स्तर के साथ ही नदी की धाराओं ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। इससे बुधवार को विभिन्न गांवों में करीब 65 बीघा कृषि भूमि कट कर नदी की धारा में विलीन हो गई। वहीं नेपाल सहित पहाड़ों पर बरसात न होने के कारण सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों सहित भिनगा जंगल के मध्य बहने वाले केन नाले का जलस्तर भी घटा है।
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ऐसे में जंगल के अधिकांश क्षेत्र में जलभराव की समस्या से निजात मिली है। जिससे जंगली जीव जंतुओं को भी राहत मिली है। वहीं भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली विशुनपुर के निकट डिप पर जलस्तर कम होने व बहाव धीमा हो जाने के कारण लोगों को आवागमन में सहूलियत मिली है। यदि यही हाल रहा तो दो एक दिन में लक्ष्मनपुर मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन प्रारंभ हो सकता है।
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तराई में विगत पांच दिनों से मौसम सामान्य बना है। आसमान पर उमड़ घुमड़ रहे घने काले बादल बिना बरसे वापस लौट रहे हैं। ऐसे में सुबह का मौसम पूरी तरह खुशगवार रहता है। वहीं दोपहर में निकलने वाली धूप व पुरवा हवा के कारण लोगों को उमस का सामना करना पड़ता है। ऐसे में लोगों को पसीने से तरबतर देखा जा रहा है। इस बीच दोपहर में होने वाली अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है।
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वहीं इसके विपरीत पांच दिनों से बरसात न होने के कारण राप्ती का जलस्तर भी सामान्य हो रहा है। ऐसे में जहां कछार के गांवों में उत्पन्न बाढ़ का खतरा टल जाने से लोग राहत महसूस कर रहे हैं। वहीं घटते जल स्तर के साथ ही नदी की धाराओं ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। इससे बुधवार को विभिन्न गांवों में करीब 65 बीघा कृषि भूमि कट कर नदी की धारा में विलीन हो गई। वहीं नेपाल सहित पहाड़ों पर बरसात न होने के कारण सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों सहित भिनगा जंगल के मध्य बहने वाले केन नाले का जलस्तर भी घटा है।
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ऐसे में जंगल के अधिकांश क्षेत्र में जलभराव की समस्या से निजात मिली है। जिससे जंगली जीव जंतुओं को भी राहत मिली है। वहीं भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली विशुनपुर के निकट डिप पर जलस्तर कम होने व बहाव धीमा हो जाने के कारण लोगों को आवागमन में सहूलियत मिली है। यदि यही हाल रहा तो दो एक दिन में लक्ष्मनपुर मार्ग पर भारी वाहनों का आवागमन प्रारंभ हो सकता है।