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राप्ती में समाई 42 बीघा कृषि योग्य भूमि
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श्रावस्ती। तराई में विगत छह दिनों से बरसात थमी हुई है। ऐसे में राप्ती सहित पहाड़ी नालों का जलस्तर भी धीरे धीरे सामान्य हो रहा है। घटते जलस्तर के कारण जहां राप्ती की धारा अपने किनारों पर तेजी से कटान कर रही हैं। गुरुवार को जिले के कई गांवों में करीब 42 बीघा कृषि भूमि नदी की धारा में समाहित हो गई।
वहीं केन नाले का जलस्तर घटने से लक्ष्मनपुर मार्ग का आवागमन भी धीरे धीरे सामान्य हो रहा है। इसके विपरीत दिन में निकलने वाली चिलचिलाती धूप व उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया है। ऐसे में हो रही अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
जिले में बरसात न होने से मौसम सामान्य हो चुका है। इसके कारण राप्ती का जलस्तर भी घट रहा है। घटते जलस्तर के साथ ही राप्ती ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। गुरुवार को कछार में बसे गांवों में करीब 42 बीघा कृषि भूमि कट कर फसल सहित नदी की धारा में समाहित हो गई है।
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बरसात थमने के बाद सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों सहित भिनगा जंगल के मध्य बहने वाले केन नाले का जलस्तर भी लगातार घट रहा है। ऐसे में जहां जंगल में रहने वाले जीव जंतुओं को जलभराव की समस्या से निजात मिली है। वहीं भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली विशुनपुर के निकट डिप पर जलस्तर कम होने व बहाव धीमा हो जाने के कारण लोगों को आवागमन में सहूलियत मिली है।
उधर कई दिनों से बरसात न होने तथा सुबह से निकलने वाली चिलचिलाती धूप व पुरवा हवा के कारण उमस काफी बढ़ गई है। ऐसे में दोपहर व रात में होने वाली बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। जरूरत के वक्त आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों को न तो दिन में चैन मिल रहा है, और न ही रात को।
इसकी शिकायत के बाद भी पावर कॉर्पोरेशन के जिम्मेदार अधिकारी तकनीकी खराबी की बात कह अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में पावर कॉर्पोरेशन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।
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वहीं केन नाले का जलस्तर घटने से लक्ष्मनपुर मार्ग का आवागमन भी धीरे धीरे सामान्य हो रहा है। इसके विपरीत दिन में निकलने वाली चिलचिलाती धूप व उमस ने लोगों को बेहाल कर दिया है। ऐसे में हो रही अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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जिले में बरसात न होने से मौसम सामान्य हो चुका है। इसके कारण राप्ती का जलस्तर भी घट रहा है। घटते जलस्तर के साथ ही राप्ती ने अपने किनारों पर कटान तेज कर दी है। गुरुवार को कछार में बसे गांवों में करीब 42 बीघा कृषि भूमि कट कर फसल सहित नदी की धारा में समाहित हो गई है।
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बरसात थमने के बाद सिरसिया क्षेत्र के पहाड़ी नालों सहित भिनगा जंगल के मध्य बहने वाले केन नाले का जलस्तर भी लगातार घट रहा है। ऐसे में जहां जंगल में रहने वाले जीव जंतुओं को जलभराव की समस्या से निजात मिली है। वहीं भिनगा लक्ष्मनपुर मार्ग पर रेहली विशुनपुर के निकट डिप पर जलस्तर कम होने व बहाव धीमा हो जाने के कारण लोगों को आवागमन में सहूलियत मिली है।
उधर कई दिनों से बरसात न होने तथा सुबह से निकलने वाली चिलचिलाती धूप व पुरवा हवा के कारण उमस काफी बढ़ गई है। ऐसे में दोपहर व रात में होने वाली बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी है। जरूरत के वक्त आपूर्ति बाधित होने के कारण लोगों को न तो दिन में चैन मिल रहा है, और न ही रात को।
इसकी शिकायत के बाद भी पावर कॉर्पोरेशन के जिम्मेदार अधिकारी तकनीकी खराबी की बात कह अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ रहे हैं। इससे उपभोक्ताओं में पावर कॉर्पोरेशन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है।