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तपोस् थली में 970 उपासकों ने की पूजा
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कटरा (श्रावस्ती)। बौद्ध तपोस्थली श्रावस्ती रविवार को बुद्धम् शरणम् गच्छाम् िके उद्घोष से गूंजायमान रही। विभिन्न देशों से आए 970 उपासकों ने विश्व शांति के लिए विशेष प्रार्थना की।
इस दौरान दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी भी ली। बौद्ध तपोस्थली रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही।
विश्व शांति की कामना के लिए थाईलैंड से 300, नेपाल से 40, वियतनाम से 30, महाराष्ट्र से 300 सहित 300 अन्य सदस्यीय दल तपोस्थली पहुंचा। दल के सदस्यों ने विश्व शांति के लिए आनंद बोधि व गंध कुटि पर विशेष प्रार्थना की।
इसके बाद दल में मौजूद सदस्यों ने शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, सूर्यकुंड, सभामंडप, आनंद भवन, राहुल कुटी, संघाराम बिहार, अंगुलिमाल स्तूप आदि मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली।
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इस दौरान भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने सभी को भगवान बुद्ध की जीवन के विषय में जानकारी दी। कहा कि उनका जीवन बड़ा ही सरल एवं मार्मिक था।
वह कभी भी नैतिकता को न भूल कर समाज के कल्याण में लगे रहते थे। श्रावस्ती पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां का कण-कण पूजनीय है। भगवान बुद्ध ने यहां 24 वर्षावास बिताया था।
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इस दौरान दल के सदस्यों ने तपोस्थली के विभिन्न मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी भी ली। बौद्ध तपोस्थली रविवार को अनुयायियों से गुलजार रही।
विश्व शांति की कामना के लिए थाईलैंड से 300, नेपाल से 40, वियतनाम से 30, महाराष्ट्र से 300 सहित 300 अन्य सदस्यीय दल तपोस्थली पहुंचा। दल के सदस्यों ने विश्व शांति के लिए आनंद बोधि व गंध कुटि पर विशेष प्रार्थना की।
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इसके बाद दल में मौजूद सदस्यों ने शिवली स्तूप, कौशांबी कुटी, सूर्यकुंड, सभामंडप, आनंद भवन, राहुल कुटी, संघाराम बिहार, अंगुलिमाल स्तूप आदि मूमेंटों का भ्रमण कर उसकी ऐतिहासिक जानकारी ली।
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इस दौरान भिक्षु दीपालोक महाथेरो ने सभी को भगवान बुद्ध की जीवन के विषय में जानकारी दी। कहा कि उनका जीवन बड़ा ही सरल एवं मार्मिक था।
वह कभी भी नैतिकता को न भूल कर समाज के कल्याण में लगे रहते थे। श्रावस्ती पवित्र तीर्थ स्थल है। यहां का कण-कण पूजनीय है। भगवान बुद्ध ने यहां 24 वर्षावास बिताया था।