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कन्या भ्रूण हत्या, दहेज, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ रोके बिना महिला सशक्तिकरण का दावा अधूरा
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श्रावस्ती। बेटियों को घर के चूल्हा चौका से मुक्ति दिलाकर उन्हें शिक्षित बनाया जाए। देश में जब तक कन्या भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा जैसी कुरीतियों पर रोक नहीं लगती सब तक महिला सशक्तीकरण का दावा अधूरा है। बेटियों को बेहतर शिक्षा दिलाने के साथ कुरीतियों पर रोक लगाकर उन्हें सशक्त बनाया जा सकता है। यह बातें शनिवार को ककंधू गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र पर अमर उजाला की मुहिम अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स के तहत महिला सशक्तीकरण पर आयोजित संवाद में महिलाओं ने कहीं।
इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिलाओं की सुरक्षा व स्वास्थ्य को लेकर चर्चा की। इस दौरान सभी ने कहा कि बेटियां आज किसी भी मामले में बेटों से पीछे नहीं हैं। इसलिए उन्हें घर की चारदिवारी से बाहर निकलने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए, ताकि वह भी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन बिना प्रयास के ही महिला सशक्तीकरण की आवाज बुलंद हो जाएगी। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सोच बदलनी होगी।
जब तक कन्या भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ जैसी घटनाएं होती रहेंगी तब तक महिला सशक्तीकरण नहीं हो सकता। बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए हमें इन कुप्रथाओं को समाप्त करना होगा। - कल्पना श्री
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नारी दीपक तो पुरुष बाती है। जब तक दोनों एक साथ न हो, प्रकाश संभव नहीं है। यह लोगों को समझना होगा। वेद शास्त्रों में भी महिलाओं को पुरुषों से पहले स्थान दिया गया है। इसे अब साकार करना होगा। - सीता देवी
समय के साथ अब हम सबको अपनी सोच बदलनी होगी। अपमान, अत्याचार व दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाओं का हमें खुल कर विरोध करना होगा। लोगों को बताना होगा कि हम भी किसी से कम नहीं हैं। - सरिता शर्मा
नारी दो घरों में उजाला लाती है। जब तक वह खुद अंधेरे में रहेगी तब तक देश के चहुंमुखी विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। हमें इन परंपराओं को तोड़ कर मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आना होगा। - मालती देवी
नारियां जागरूक हो रही हैं। वह अपने कर्तव्य व अधिकार को समझती हैं। जागरूक महिला होने के नाते हमें अपने व दूसरों के साथ हो रहे अत्याचार पर खुल कर लड़ाई लड़नी होगी। इसके लिए जरूरी है कि हम संगठित हों। - राजेश कुमारी
अमर उजाला ने महिलाओं को अपनी बात रखने के लिए जो अवसर दिया वह बहुत सराहनीय है। संवाद के द्वारा समाज में महिलाओं के प्रति लोगों के मन में फैला अंधेरा मिटेगा और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। - मुन्नी देवी
भगवान बुद्ध की इस धरती से दुनिया को शांति का संदेश मिला। आज हम बुद्ध की इस धरती पर संकल्प लेते हैं कि लड़के और लड़की का भेदभाव पूरी तरह से मिटाएंगे। इसके लिए लोगों को भी जागरूक करेंगे। - उर्मिला देवी
बेटे एक ही घर को रोशन करते हैं, जबकि बेटियां दो घरों में उजाला लाती हैं। यदि इन्हें भेद भाव रहित खुला आसमान मिले तो निश्चित ही समाज व देश में संपन्नता आएगी। इसके लिए हम सभी को मिलकर आगे आना होगा। - फूलमती
अमर उजाला ने बालिकाओं व महिलाओं की सम्मान की रक्षा के लिए जो पहल की है वह बेहद ही सराहनीय है। हम इसे अन्य लोगों के साथ साझाकर उन्हें भी बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे। - कृष्णावती
अमर उजाला के इस कार्यक्रम में हमें आज अपनी बात रखने का मौका मिला। इस दौरान बहुत सी जानकारियां मिलीं। अब हम अन्य लोगों के साथ अपनी जानकारी को साझा करेंगे, जो सभी के हर कदम काम आएगी। - मैना देवी
अमर उजाला का कार्यक्रम एक यादगार पल के रूप में हमेशा याद आता रहेगा। इसके माध्यम से जहां हमें अपनी बात रखने का मौका मिला तथा वहीं हम सब ने बहुत कुछ सीखा भी। यह जानकारी सबके काम आएगी। - सुनीता वर्मा
महिला सशक्तीकरण के लिए किए जाने वाले दावे तब तक साकार नहीं हो सकते जब तक समाज में भेद भाव बना रहेगा। हमें बेटा व बेटी में भेदभाव को मिटाना होगा। तभी वास्तव में महिला सशक्तीकरण का ख्वाब पूरा होगा। -राजकुमारी
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इस दौरान आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने महिलाओं की सुरक्षा व स्वास्थ्य को लेकर चर्चा की। इस दौरान सभी ने कहा कि बेटियां आज किसी भी मामले में बेटों से पीछे नहीं हैं। इसलिए उन्हें घर की चारदिवारी से बाहर निकलने का पूरा मौका दिया जाना चाहिए, ताकि वह भी अपने पैरों पर खड़ी हो सके। जिस दिन ऐसा हुआ उस दिन बिना प्रयास के ही महिला सशक्तीकरण की आवाज बुलंद हो जाएगी। इसके लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी सोच बदलनी होगी।
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जब तक कन्या भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा, छेड़छाड़ जैसी घटनाएं होती रहेंगी तब तक महिला सशक्तीकरण नहीं हो सकता। बेटियों को आगे बढ़ाने के लिए हमें इन कुप्रथाओं को समाप्त करना होगा। - कल्पना श्री
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नारी दीपक तो पुरुष बाती है। जब तक दोनों एक साथ न हो, प्रकाश संभव नहीं है। यह लोगों को समझना होगा। वेद शास्त्रों में भी महिलाओं को पुरुषों से पहले स्थान दिया गया है। इसे अब साकार करना होगा। - सीता देवी
समय के साथ अब हम सबको अपनी सोच बदलनी होगी। अपमान, अत्याचार व दहेज उत्पीड़न जैसी घटनाओं का हमें खुल कर विरोध करना होगा। लोगों को बताना होगा कि हम भी किसी से कम नहीं हैं। - सरिता शर्मा
नारी दो घरों में उजाला लाती है। जब तक वह खुद अंधेरे में रहेगी तब तक देश के चहुंमुखी विकास की कल्पना नहीं की जा सकती है। हमें इन परंपराओं को तोड़ कर मजबूत राष्ट्र निर्माण के लिए आगे आना होगा। - मालती देवी
नारियां जागरूक हो रही हैं। वह अपने कर्तव्य व अधिकार को समझती हैं। जागरूक महिला होने के नाते हमें अपने व दूसरों के साथ हो रहे अत्याचार पर खुल कर लड़ाई लड़नी होगी। इसके लिए जरूरी है कि हम संगठित हों। - राजेश कुमारी
अमर उजाला ने महिलाओं को अपनी बात रखने के लिए जो अवसर दिया वह बहुत सराहनीय है। संवाद के द्वारा समाज में महिलाओं के प्रति लोगों के मन में फैला अंधेरा मिटेगा और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। - मुन्नी देवी
भगवान बुद्ध की इस धरती से दुनिया को शांति का संदेश मिला। आज हम बुद्ध की इस धरती पर संकल्प लेते हैं कि लड़के और लड़की का भेदभाव पूरी तरह से मिटाएंगे। इसके लिए लोगों को भी जागरूक करेंगे। - उर्मिला देवी
बेटे एक ही घर को रोशन करते हैं, जबकि बेटियां दो घरों में उजाला लाती हैं। यदि इन्हें भेद भाव रहित खुला आसमान मिले तो निश्चित ही समाज व देश में संपन्नता आएगी। इसके लिए हम सभी को मिलकर आगे आना होगा। - फूलमती
अमर उजाला ने बालिकाओं व महिलाओं की सम्मान की रक्षा के लिए जो पहल की है वह बेहद ही सराहनीय है। हम इसे अन्य लोगों के साथ साझाकर उन्हें भी बालिकाओं की शिक्षा व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करेंगे। - कृष्णावती
अमर उजाला के इस कार्यक्रम में हमें आज अपनी बात रखने का मौका मिला। इस दौरान बहुत सी जानकारियां मिलीं। अब हम अन्य लोगों के साथ अपनी जानकारी को साझा करेंगे, जो सभी के हर कदम काम आएगी। - मैना देवी
अमर उजाला का कार्यक्रम एक यादगार पल के रूप में हमेशा याद आता रहेगा। इसके माध्यम से जहां हमें अपनी बात रखने का मौका मिला तथा वहीं हम सब ने बहुत कुछ सीखा भी। यह जानकारी सबके काम आएगी। - सुनीता वर्मा
महिला सशक्तीकरण के लिए किए जाने वाले दावे तब तक साकार नहीं हो सकते जब तक समाज में भेद भाव बना रहेगा। हमें बेटा व बेटी में भेदभाव को मिटाना होगा। तभी वास्तव में महिला सशक्तीकरण का ख्वाब पूरा होगा। -राजकुमारी