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रसोइयों ने अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में किया प्रदर्शन
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श्रावस्ती। मध्याह्न भोजन बनाने वाले रसोइएं अपनी समस्याओं को लेकर सोमवार मुखर हो गए। इस दौरान उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर मे प्रदर्शन किया। इस दौरान मतुख्यमंत्री को संबोधित ग्यारह सूत्रीय मांग पत्र तहसीलदार को सौंपा। जिसमें उन्होंने अपनी दशा को सुधारने के लिए कई मांगे रखी हैं।
राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइयां फ्रंट के बैनर तले तहसीलदार राजेश कुमार को सौंपे ज्ञापन में रसोईयों ने कहा है कि एमडीएम योजना में ठेकेदार प्रथा को न शामिल किया जाए। बल्कि परिसर में ही गरम व पौष्टिक भोजन बनवा कर बच्चों को दिया जाए। रसोईयों की फुल टाइम ड्यूटी को देखते हुए उन्हें दस हजार रुपये मानदेय दिया जाए। जब तक मानदेय का निर्धारण नहीं होता तब तक केंद्र सरकार द्वारा घोषित अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी दी जाए।
मानदेय पूरे वर्ष का दिया जाए, न कि स्कूल खुलने के दिनों का। मानदेय हर दस तारीख तक भुगतान कर दिया जाए। रसोइयों के लिए स्कूल में पढ़ने वाले पाल्यों की बाद्यता समाप्त किया जाए। तीस बच्चों पर एक रसोइए की तैनाती हो। रसोईयों को भी विशेष अवकाश व मातृत्व अवकाश का लाभ मिले। प्रत्येक वर्ष होने वाली चयन प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।
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कार्यरत रसोइयों को कार्य के दौरान दुर्घटना के इलाज के लिए सहायता मिले। इसके साथ ही रसोइयों को पांच लाख रुपये बीमा भी प्रदान किया जाए। इस दौरान संगीता देवी, कमला देवी, राधा, ननकून देवी, रामवती, संध्या, रेखा सहित काफी संख्या में रसोइयां मौजूद रहीं।
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राष्ट्रीय मध्याह्न भोजन रसोइयां फ्रंट के बैनर तले तहसीलदार राजेश कुमार को सौंपे ज्ञापन में रसोईयों ने कहा है कि एमडीएम योजना में ठेकेदार प्रथा को न शामिल किया जाए। बल्कि परिसर में ही गरम व पौष्टिक भोजन बनवा कर बच्चों को दिया जाए। रसोईयों की फुल टाइम ड्यूटी को देखते हुए उन्हें दस हजार रुपये मानदेय दिया जाए। जब तक मानदेय का निर्धारण नहीं होता तब तक केंद्र सरकार द्वारा घोषित अकुशल मजदूरों की न्यूनतम मजदूरी दी जाए।
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मानदेय पूरे वर्ष का दिया जाए, न कि स्कूल खुलने के दिनों का। मानदेय हर दस तारीख तक भुगतान कर दिया जाए। रसोइयों के लिए स्कूल में पढ़ने वाले पाल्यों की बाद्यता समाप्त किया जाए। तीस बच्चों पर एक रसोइए की तैनाती हो। रसोईयों को भी विशेष अवकाश व मातृत्व अवकाश का लाभ मिले। प्रत्येक वर्ष होने वाली चयन प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।
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कार्यरत रसोइयों को कार्य के दौरान दुर्घटना के इलाज के लिए सहायता मिले। इसके साथ ही रसोइयों को पांच लाख रुपये बीमा भी प्रदान किया जाए। इस दौरान संगीता देवी, कमला देवी, राधा, ननकून देवी, रामवती, संध्या, रेखा सहित काफी संख्या में रसोइयां मौजूद रहीं।