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पंचायत भवन में एक माह से बंद 75 गोवंश
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श्रावस्ती। सिरसिया के जानकी नगर ग्राम पंचायत भवन में विगत एक माह से 75 गोवंश बंद हैं। चारे के नाम पर कुछ दिन पूर्व कैंपस में फेंका गया पुआल भी गोबर से अब बर्बाद हो चुका है।
इससे मवेशियों की जान पर बन आई है। जानकारी के बाद भी अधिकारी मौन हैं। सिरसिया ब्लॉक के ग्राम जानकी नगर में लोगों ने एक माह पूर्व छुट्टा जानवरों को पंचायत भवन परिसर में बंद कर दिया था।
मौजूदा समय में लगभग 75 गोवंश इस भवन में बंद हैं। ग्रामीणों की ओर से बंद किए गए मवेशियों के चारे की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ दिन पूर्व ग्रामीणों ने थोड़ा पुआल परिसर में फेंक दिया था।
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इसे जानवर खत्म कर चुके हैं, कुछ पुआल गोबर से पट गया। परिसर में पेय जल के लिए लगा हैंडपंप जब कोई ग्रामीण चलाता है, तो वहां बने गड्ढे में पानी एकत्र हो जाता है।
इसी से मवेशियों की प्यास बुझती है। एक माह से भी अधिक समय तक एक ही परिसर में इतने मवेशी के बंद होने के कारण वहां परिसर काफी गंदा हो चुका है।
मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी राजकुमार यादव ने बताया कि अधिकारियों की ओर से छुट्टा मवेशियों को एकत्र करने का आदेश हुआ था।
इसी के बाद ग्रामीणों ने इन मवेशियों को पंचायत भवन में बंद किया था। इनके चारे आदि का कोई भी प्रावधान नहीं है। ग्रामीण देते होंगे पर जानकारी नहीं है। जांच कर होगी कार्रवाई
न्याय पंचायत स्तर पर पशु आश्रय स्थल बनवाए जा रहे हैं। जहां चारा व पानी दोनों मौजूद हैं। यदि किसी पंचायत भवन में मवेशी बंद हैं तो यह गलत है। इसकी जांच कराकर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई कर मवेशियों को आश्रय स्थल भेजा जाएगा।
- दीपक मीणा, डीएम
पशु क्रूरता अधिनियम के तहत हो सकती कार्रवाई
पशुओं के संरक्षण के लिए कानून बनाया गया है। इसके लिए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का गठन भी किया गया है। ऐसी दशा में पालतू पशुओं को किसी भी हालत में भूखा प्यासा नहीं रखा जा सकता है। ऐसा करने वालों को अर्थदंड के साथ जेल भेजने का नियम है। - दिनेश शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट माडल बार एसोसिएशन भिनगा
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इससे मवेशियों की जान पर बन आई है। जानकारी के बाद भी अधिकारी मौन हैं। सिरसिया ब्लॉक के ग्राम जानकी नगर में लोगों ने एक माह पूर्व छुट्टा जानवरों को पंचायत भवन परिसर में बंद कर दिया था।
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मौजूदा समय में लगभग 75 गोवंश इस भवन में बंद हैं। ग्रामीणों की ओर से बंद किए गए मवेशियों के चारे की यहां कोई व्यवस्था नहीं है। कुछ दिन पूर्व ग्रामीणों ने थोड़ा पुआल परिसर में फेंक दिया था।
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इसे जानवर खत्म कर चुके हैं, कुछ पुआल गोबर से पट गया। परिसर में पेय जल के लिए लगा हैंडपंप जब कोई ग्रामीण चलाता है, तो वहां बने गड्ढे में पानी एकत्र हो जाता है।
इसी से मवेशियों की प्यास बुझती है। एक माह से भी अधिक समय तक एक ही परिसर में इतने मवेशी के बंद होने के कारण वहां परिसर काफी गंदा हो चुका है।
मामले में ग्राम पंचायत अधिकारी राजकुमार यादव ने बताया कि अधिकारियों की ओर से छुट्टा मवेशियों को एकत्र करने का आदेश हुआ था।
इसी के बाद ग्रामीणों ने इन मवेशियों को पंचायत भवन में बंद किया था। इनके चारे आदि का कोई भी प्रावधान नहीं है। ग्रामीण देते होंगे पर जानकारी नहीं है। जांच कर होगी कार्रवाई
न्याय पंचायत स्तर पर पशु आश्रय स्थल बनवाए जा रहे हैं। जहां चारा व पानी दोनों मौजूद हैं। यदि किसी पंचायत भवन में मवेशी बंद हैं तो यह गलत है। इसकी जांच कराकर संबंधितों के विरुद्ध कार्रवाई कर मवेशियों को आश्रय स्थल भेजा जाएगा।
- दीपक मीणा, डीएम
पशु क्रूरता अधिनियम के तहत हो सकती कार्रवाई
पशुओं के संरक्षण के लिए कानून बनाया गया है। इसके लिए भारतीय पशु कल्याण बोर्ड का गठन भी किया गया है। ऐसी दशा में पालतू पशुओं को किसी भी हालत में भूखा प्यासा नहीं रखा जा सकता है। ऐसा करने वालों को अर्थदंड के साथ जेल भेजने का नियम है। - दिनेश शुक्ला, पूर्व अध्यक्ष डिस्ट्रिक्ट माडल बार एसोसिएशन भिनगा