{"_id":"62e972d6b89e0463c45120d2","slug":"yagya-is-the-best-worship-method-in-the-world-umesh-shamli-news-mrt599570581","type":"story","status":"publish","title_hn":"यज्ञ संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति : उमेश","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यज्ञ संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति : उमेश
विज्ञापन
यज्ञ संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति : उमेश
शामली। आर्य समाज के उपदेशक उमेशचंद कुलश्रेष्ठ ने कहा कि यज्ञ संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति है।
मंगलवार को आर्य समाज मंदिर में श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में वेद प्रचार सप्ताह के दूसरे दिन यज्ञ, भजन एवं प्रवचन के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ देव यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ के मुख्य यज्ञमान पूर्व प्रधान सुभाष गोयल आर्य व सुदेश आर्या, सुशील जांगिड़ व राखी जांगिड़, कालूराम व मोनिका रानी, रामकुमार जांगिड़ व पुष्पा रानी रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डॉ. रविदत्त आचार्य रहे। इसके बाद सत्संग भवन में नोएडा से आई भजनोपदेशिका अलका आर्य ने भजनों के माध्यम से परमात्मा का गुणगान किया।
आगरा से आए उपदेशक उमेश चंद कुलश्रेष्ठ ने आर्य समाज की पूजा पद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति यज्ञ है। उन्होंने बताया देवता दो प्रकार के होते हैं एक जड़ देवता और एक चेतन देवता है। जड़ देवता में सूर्य, चंद्र, अग्नि, वायु, जल आदि है और चेतन देवताओं में माता-पिता और आचार्य शामिल हैं। वेदों में अग्नि को देवताओं का मुख बताया गया है। अग्नि में दी हुई आहुति के माध्यम से प्रसाद सभी देवताओं को प्राप्त होता है। प्रतिदिन यज्ञ के माध्यम से 16 आहुतियां प्रदान करना सभी आर्यों का परम धर्म है। किसी से यदि यज्ञ विधि न आती हो तो गायत्री मंत्र का जाप कर यज्ञ करें। इस अवसर पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, प्रधान विनोद आर्य, मंत्री गिरधारी लाल गोयल आर्य, कोषाध्यक्ष देवेंद्र देव आर्य, शैलेश मुनि सत्यार्थी, रामेश्वर दयाल आर्य, लक्ष्मीचंद आर्य, दिनेश धीमान, सतपाल आर्य, हरपाल सिंह आर्य, संरक्षिका कमला आर्य, मीरा आर्य, कौशल्या आर्य, हेमलता आर्य आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुभाष धीमान व राजपाल सिंह आर्य ने किया।
विज्ञापन
शामली। आर्य समाज के उपदेशक उमेशचंद कुलश्रेष्ठ ने कहा कि यज्ञ संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति है।
मंगलवार को आर्य समाज मंदिर में श्रावणी पर्व के उपलक्ष्य में वेद प्रचार सप्ताह के दूसरे दिन यज्ञ, भजन एवं प्रवचन के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ देव यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ के मुख्य यज्ञमान पूर्व प्रधान सुभाष गोयल आर्य व सुदेश आर्या, सुशील जांगिड़ व राखी जांगिड़, कालूराम व मोनिका रानी, रामकुमार जांगिड़ व पुष्पा रानी रहे। यज्ञ के ब्रह्मा आर्य समाज के पुरोहित डॉ. रविदत्त आचार्य रहे। इसके बाद सत्संग भवन में नोएडा से आई भजनोपदेशिका अलका आर्य ने भजनों के माध्यम से परमात्मा का गुणगान किया।
आगरा से आए उपदेशक उमेश चंद कुलश्रेष्ठ ने आर्य समाज की पूजा पद्धति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संसार की सर्वश्रेष्ठ पूजा पद्धति यज्ञ है। उन्होंने बताया देवता दो प्रकार के होते हैं एक जड़ देवता और एक चेतन देवता है। जड़ देवता में सूर्य, चंद्र, अग्नि, वायु, जल आदि है और चेतन देवताओं में माता-पिता और आचार्य शामिल हैं। वेदों में अग्नि को देवताओं का मुख बताया गया है। अग्नि में दी हुई आहुति के माध्यम से प्रसाद सभी देवताओं को प्राप्त होता है। प्रतिदिन यज्ञ के माध्यम से 16 आहुतियां प्रदान करना सभी आर्यों का परम धर्म है। किसी से यदि यज्ञ विधि न आती हो तो गायत्री मंत्र का जाप कर यज्ञ करें। इस अवसर पर संरक्षक रघुवीर सिंह आर्य, प्रधान विनोद आर्य, मंत्री गिरधारी लाल गोयल आर्य, कोषाध्यक्ष देवेंद्र देव आर्य, शैलेश मुनि सत्यार्थी, रामेश्वर दयाल आर्य, लक्ष्मीचंद आर्य, दिनेश धीमान, सतपाल आर्य, हरपाल सिंह आर्य, संरक्षिका कमला आर्य, मीरा आर्य, कौशल्या आर्य, हेमलता आर्य आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन सुभाष धीमान व राजपाल सिंह आर्य ने किया।
विज्ञापन