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महिला की हालत बिगड़ने पर हंगामा
ब्यूरो, अमर उजाला/शामली।
Updated Sat, 07 Jul 2018 12:29 AM IST
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revel
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
शामली। सरकारी अस्पताल में शिफ्ट किए गए आर्यन अस्पताल के मरीजों की हालत बुरी है। नियमित देखरेख और इलाज की कमी के कारण शुक्रवार को एक महिला की हालत बिगड़ गई। सूचना पर पहुंचे भाकियू नेताओं ने हंगामा कर दिया। तब बाहर से सर्जन को बुलवाकर महिला की हालत चेक कराई गई।
तीन दिन पूर्व आर्यन अस्पताल को स्वास्थ्य मंत्री सिद्घार्थनाथ सिंह के निर्देश पर सील कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने वहां भर्ती मरीजों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया था। तब से उनका इलाज सरकारी अस्पताल में चल रहा है। पर इनकी हालत में सुधरने की बजाय बिगड़ रही है।
शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती रिहाना निवासी लोनी की हालत अचानक बिगड़ गई। डाक्टरों को कई बार बुलवाया गया, डाक्टर आए भी, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। सूचना पर भाकियू नेता विनोद निर्वाल, मास्टर जाहिद अस्पताल में पहुंच गए और हंगामा कर दिया।
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जिसके बाद डाक्टर हरकत में आए। तब जाकर बाहर से सर्जन को बुलवाया गया और महिला की हालत दिखवाई गई। चिकित्साधीक्षक डाक्टर रमेश चंद्रा ने कहा कि महिलाओं का इलाज कराया जा रहा है और उनकी नियमित देखभाल की जा रही है। आर्यन अस्पताल में से लाए गए मरीजों में रिहाना निवासी लोनी, नसीमा सोंता रसूलपुर, ममतेश निवासी कच्ची गढ़ी, नोशिदा भर्ती है। इन सभी का आर्य अस्पताल में आपरेशन किया गया था। जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
अस्पताल में भी मरीजों का नहीं रखा ध्यान
सरकारी अस्पताल में न सर्जन नहीं है, न ही फिजिशियन। फिर भी महकमे ने आर्यन अस्पताल में आपरेशन किए हुए आठ मरीजों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कर दिया। उसका नतीजा यह रहा कि दो दिन में मरीजों की इतनी बेकदरी हुई कि एक महिला की हालत गंभीर हो गई। जिला अस्पताल के रूप में काम कर रहे शामली सरकारी अस्पताल में ना तो सर्जन है और ना ही फिजिशियन है।
प्लेन एमबीबीएस के भरोसे ही सरकारी अस्पताल में मरीज टिके हुए हैं। हालांकि अस्थाई तौर पर एक सर्जन सौरभ अग्रवाल की सेवा ली जा रही है, लेकिन उनके जाने के बाद अस्पताल में कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता। दो दिन पूर्व आर्यन अस्पताल को सील कर दिया गया था। जिसके बाद सरकारी अस्पताल में इन मरीजों को लाया गया। इसके बाद संविदा पर तैनात सर्जन दो दिन की छुट्टी चले गए। ऐसे में मरीजों लावारिस हो गए। यही कारण रहा कि यहां देखरेख के अभाव में शुक्रवार को महिला रिहाना की हालत बिगड़ गई। सर्जन नहीं मिलने के कारण मजबूरी वश एक प्राइवेट नर्सिंग होम से आनन-फानन में एक सर्जन को बुलवाया गया और उसको दिखवाया गया।
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तीन दिन पूर्व आर्यन अस्पताल को स्वास्थ्य मंत्री सिद्घार्थनाथ सिंह के निर्देश पर सील कर दिया गया था। स्वास्थ्य विभाग ने वहां भर्ती मरीजों को सरकारी अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया था। तब से उनका इलाज सरकारी अस्पताल में चल रहा है। पर इनकी हालत में सुधरने की बजाय बिगड़ रही है।
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शुक्रवार को अस्पताल में भर्ती रिहाना निवासी लोनी की हालत अचानक बिगड़ गई। डाक्टरों को कई बार बुलवाया गया, डाक्टर आए भी, लेकिन हालत में सुधार नहीं हुआ। सूचना पर भाकियू नेता विनोद निर्वाल, मास्टर जाहिद अस्पताल में पहुंच गए और हंगामा कर दिया।
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जिसके बाद डाक्टर हरकत में आए। तब जाकर बाहर से सर्जन को बुलवाया गया और महिला की हालत दिखवाई गई। चिकित्साधीक्षक डाक्टर रमेश चंद्रा ने कहा कि महिलाओं का इलाज कराया जा रहा है और उनकी नियमित देखभाल की जा रही है। आर्यन अस्पताल में से लाए गए मरीजों में रिहाना निवासी लोनी, नसीमा सोंता रसूलपुर, ममतेश निवासी कच्ची गढ़ी, नोशिदा भर्ती है। इन सभी का आर्य अस्पताल में आपरेशन किया गया था। जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।
अस्पताल में भी मरीजों का नहीं रखा ध्यान
सरकारी अस्पताल में न सर्जन नहीं है, न ही फिजिशियन। फिर भी महकमे ने आर्यन अस्पताल में आपरेशन किए हुए आठ मरीजों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कर दिया। उसका नतीजा यह रहा कि दो दिन में मरीजों की इतनी बेकदरी हुई कि एक महिला की हालत गंभीर हो गई। जिला अस्पताल के रूप में काम कर रहे शामली सरकारी अस्पताल में ना तो सर्जन है और ना ही फिजिशियन है।
प्लेन एमबीबीएस के भरोसे ही सरकारी अस्पताल में मरीज टिके हुए हैं। हालांकि अस्थाई तौर पर एक सर्जन सौरभ अग्रवाल की सेवा ली जा रही है, लेकिन उनके जाने के बाद अस्पताल में कोई दूसरा विकल्प नहीं रह जाता। दो दिन पूर्व आर्यन अस्पताल को सील कर दिया गया था। जिसके बाद सरकारी अस्पताल में इन मरीजों को लाया गया। इसके बाद संविदा पर तैनात सर्जन दो दिन की छुट्टी चले गए। ऐसे में मरीजों लावारिस हो गए। यही कारण रहा कि यहां देखरेख के अभाव में शुक्रवार को महिला रिहाना की हालत बिगड़ गई। सर्जन नहीं मिलने के कारण मजबूरी वश एक प्राइवेट नर्सिंग होम से आनन-फानन में एक सर्जन को बुलवाया गया और उसको दिखवाया गया।