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नारी! तेरी हिम्मत से हर मुसीबत हारी

Sun, 07 Mar 2021 12:01 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Mar 2021 12:01 AM IST
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Woman Lost every trouble with your courage
शामली। महिलाओं को हिम्मत का दूसरा नाम यूं ही नहीं कहा जाता। खुद पर या परिवार पर जब भी कुछ मुसीबत आती है, तो महिलाओं ने आगे बढ़कर उसका सामना किया। विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और कामयाबी की नई इबारत लिखी। महिला दिवस पर अमर उजाला ने जिले की कुछ ऐसी महिलाओं से बात की जिन्होंने साबित किया है कि वे वास्तव में अपराजिता हैं...
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पोलियो ने पैर कमजोर किए, हौसला नहीं
शामली। पांच माह की उम्र में पोलियो ने कविता गोयल के दोनों पैरों को तो कमजोर कर दिया, लेकिन उसका हौसला नहीं तोड़ पाया। पिता के जीवित रहते और अब उनके जाने के बाद भी कविता अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। पांच बहनों और एक भाई में चौथे नंबर की कविता अपने पिता के 1970 में शुरू किए गए कुमार टाइपिंग सेंटर को चलाती हैं। बहन शालिनी अग्रवाल, रीना जिंदल, गीता, भावना और सबसे छोटे भाई मोहित गोयल की शादी हो चुकी है। वह अपने भाई, भाभी रश्मि, भतीजी जीवा के साथ बुढ़ाना रोड बलभद्र मंदिर के पास रहती है और नया बाजार में टाइपिंग सेंटर चलाती हैं। रोजाना उनके पास 50 से ज्यादा छात्र-छात्राएं टाइपिंग और शॉर्टहैंड सीखने आते हैं। कविता बताती हैं कि फरवरी 2020 में पिता किशन गोयल का देहांत हो गया था। उन्होंने 1997 से पिता के साथ इस सेंटर पर काम शुरू कर दिया था। इसी सेंटर पर रहकर उसने इंटर की परीक्षा पास की। पिता के जाने के बाद अब इसकी पूरी जिम्मेदारी वही संभालती हैं। सेंटर पर इतना काम है कि उसे होश ही नहीं मिलता।
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पति के जाने के बाद बच्चों को बनाया कामयाब
गढ़ीपुख्ता। गांव हथछौया में निवासी श्यामो देवी के पति महिपाल सिंह का 1989 में निधन हो गया था। दो बेटे और बेटी छोटे थे। श्यामो देवी ने घर की खेती के साथ ही बच्चों की जिम्मेदारी भी बखूबी संभाली और बच्चों को कामयाब बनाया। उनका संघर्ष रंग लाया और बड़ा बेटा प्रदीप कुमार 2009 में सहायक अध्यापक बन गया। साथ में पुत्रवधू रचना भी बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका के रूप में नियुक्त हुई। दूसरा बेटा संदीप कुमार 2012 में बीटेक करने के बाद प्राइवेट जॉब कर रहा है। बेटी की भी शादी हो चुकी है। श्यामो देवी अपने भरे-पूरे परिवार के साथ बेहद खुश रहती हैं। कहती हैं कि बच्चों की कामयाबी ने उसके सूने जीवन में खुशी के रंग भर दिए हैं।
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मजदूरी कर किया बच्चों का पालन-पालन
गढ़ीपुख्ता। गांव पेलखा निवासी राजेश देवी ने मेहनत-मजदूरी कर अपने बच्चों का पालन-पोषण किया। पति शोभाराम ट्रैक्टर रिपेयरिंग का कार्य करते थे। उनकी लगभग बीस वर्ष पहले मालैंडी व पेलखा के बीच ट्रैक्टर पलटने के दौरान मौत हो गई थी। राजेश के तीन पुत्र एक पुत्री है। इनका पालन-पोषण एवं शिक्षण उन्होंने मजदूरी करके किया। सबसे बड़ा बेटा कुलदीप इंटर और आईटीआई करने के बाद 2020 में सिंचाई विभाग नलकूप ऑपरेटर के पद पर पिलखवा हापुड़ में कार्यरत है। दूसरा बेटा नवनीत स्नातक करने के बाद एक प्राइवेट कंपनी में जॉब कर रहा है। उससे छोटी बेटी शालू बीएड कर रही है, जबकि चौथे नंबर का पुत्र सचिन इंटर और आईटीआई करने के बाद प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है।
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