फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Shamli News ›   What will the package do when the goods do not sell

पैकेज क्या करेगा, जब माल ही नहीं बिकेगा

Thu, 14 May 2020 11:39 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Thu, 14 May 2020 11:39 PM IST
विज्ञापन
What will the package do when the goods do not sell
शामली में चम्मच फैक्ट्री के गोदाम में भरा माल। - फोटो : SHAMLI
रोहित अग्रवाल
विज्ञापन

शामली। लॉकडाउन में बंद पड़े उद्योगों को चालू कर दिया है। राहत देने को केंद्र सरकार ने भारी भरकम पैकेज की घोषणा भी की है, लेकिन हकीकत ये है कि जिले की फैक्टरियों में बन रहे माल के ग्राहक ही नहीं है। लॉकडाउन से पूर्व तैयार कराए माल के आर्डर भी पार्टियों ने कैंसल कर दिए हैं। हालत ये है कि फैक्टरियों के गोदामों में करोड़ों का माल डंप हो रहा है। गोदाम भरने के कारण हाल ही में चली कुछ फैक्टरियों के फिर से बंद करने के हालात बन रहे हैं। शहर का प्रसिद्ध बर्तन उद्योग का बुरा हाल है। अमर उजाला ने उद्योगों का हाल जाना और उद्यमियों से बात की। पेश है रिपोर्ट...
पेपर मिलों के गोदाम भरे, बंद करने की नौबत
निकिता पेपर मिल के एमडी अशोक बंसल कहते हैं कि लॉकडाउन में छूट मिलने पर एक मई को फैक्टरी चलाई। तीन मई से उत्पादन शुरू हुआ। अब तक करीब 1100 टन माल तैयार हो चुका है, लेकिन बिक्री केवल 200 टन की हुई है। लॉकडाउन से पहला भी स्टॉक पड़ा है। तीन करोड़ से अधिक का माल गोदाम में है। हालत ये है कि गोदाम भर गए हैं। उनका अधिकतर माल दिल्ली जाता है। दूसरे राज्यों में भी सप्लाई है, लेकिन वहां उद्योग शुरू नहीं हुए। इसलिए मांग नहीं है।
विज्ञापन

बर्तन उद्योग का बुरा हाल
शहर के बर्तन फैक्टरी के एमडी और बर्तन व्यापारी एसोसिएशन के सचिव कुलदीप शर्मा कहते हैं कि उनके यहां प्रेशर कुकर, सिल्वर के बर्तन बनते हैं। मुरादाबाद, गोरखपुर, संभल, लखनऊ समेत पूरे यूपी में सप्लाई है। लॉकडाउन से सब जगह काम बंद है। आर्डर नहीं आ रहे। लॉकडाउन से पहले तैयार लाखों का माल गोदाम में पड़ा है। जिले में करीब 40 बर्तन फैक्टरियां हैं सबकी यही स्थिति है। हर कोई परेशान है।
विज्ञापन
विज्ञापन

पुराने ऑर्डर भी पार्टियों ने कैंसल किए
उद्यमी अनुज गर्ग की इंडस्ट्रीयल एरिया में आइसक्रीम, क्राकरी की चम्मच बनाने की फैक्टरी है। बड़ी कंपनियों आइसक्रीम कप, चम्मच आदि आर्डर पर बनते हैं, लेकिन लॉकडाउन में आइसक्रीम फैक्टरियां बंद हैं। शादी विवाह नहीं हो रहे। ऐसे में क्राकरी की मांग खत्म हो गई। कई कंपनियों ने मार्च से पहले ऑर्डर भी दिए थे, जिनका माल तैयार कर गोदामों में लगाया, लेकिन लॉकडाउन के बाद पार्टियों ने माल के आर्डर कैंसल कर दिए। डेढ़ करोड़ से अधिक का माल गोदाम में डंप पड़ा है। जिसके खराब होने का भी डर सता रहा है।

कोट
केंद्र सरकार ने उद्योगों के लिए पैकेज दिया उसका स्वागत है, लेकिन उद्योगों की वर्तमान हालत बहुत खराब है। इस समय जिले की करीब 300 छोटी बड़ी इकाइयों में करीब 200 चल चुकी हैं, लेकिन उनकी हालत खराब है। माल नहीं बिक रहा। उद्यमियों को तीन महीने के लिए बैंक लोन की किश्तों को भरने से राहत दी गई है। लेकिन तीन महीने बाद ये पूरी किश्त एक साथ देनी ही होंगी। बंद फैक्टरी में बिजली का बिल लगातार चालू रहेगा। छोटा उद्यमी को इसी में टूट जाएगा। इस तरफ भी सरकार को सोचना चाहिए। - अशोक मित्तल, अध्यक्ष इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

शामली के एक पेपर मिल में तैयार माल का स्टॉक।

शामली के एक पेपर मिल में तैयार माल का स्टॉक।- फोटो : SHAMLI

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed