थानाभवन। नगर की चौधरनपट्टी में चल रहे सुंदरकांड के पाठ के दौरान प्रवचन करते हुए राज राजेश्वर महाराज ने कहा कि भक्त की प्रबल भक्ति के आगे भगवान भी स्वयं के नियमों को बदलने पर विवश हो जाते हैं। प्रभु भक्ति से ही कल्याण हो सकता है।
उन्होंने कहा कि हनुमान जी ने अपनी प्रबल प्रेम ओर भक्ति के बल पर ही प्रभु के ह्रदय में स्थान प्राप्त किया।भक्ति को प्रबल बनाने के लिए निस्वार्थ भाव से समर्पण की आवश्यकता है। धर्म ,प्राण ,आर्य धारा पर शायद ऐसा कोई नगर या गांव होगा जहां पावन पुत्र हनुमान का कोई मंदिर या मूर्ति न हो,क्योंकि हनुमान भारत के तन मन एवं प्राणों में व्याप्त है व सदा ही समाज को शांति,निस्वार्थ सेवा, त्याग, भक्ति, श्रद्धा, विश्वास और समर्पण की प्रेरणा देते हैं।
कहा कि प्रभु जिस भक्त पर कृपा कर देते हैं, उसको राममय बना देते हैं। मौके पर अरुण ,हर्षित, प्रिंस, राजू, देवांश ,रानी ,सीमा,अंजली आदि उपस्थिति रहे।틯