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बहन-बेटियों की शादी के लिए रकम जुटाने पंजाब गए थे शहजाब-फरीद

Sun, 29 Dec 2019 11:27 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 29 Dec 2019 11:27 PM IST
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Weeds among two families of Shamli and Kairana after death in accident in Rajpura, Punjab
कैराना (शामली) निवासी फरीद का फाइल फाटो। - फोटो : SHAMLI
पंजाब के रजपुरा में हुए हादसे में मौत के बाद शामली और कैराना के दो परिवारों में मातम
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शामली। पंजाब के राजपुरा में हादसे के शिकार हुए शामली के काजीवाड़ा निवासी शहबाज और कैराना के फरीद के परिवार में कोहराम मचा था। शामली का शहबाज परिवार में कमाई का एकमात्र जरिया था । पिता बीमार हैं, काम नहीं कर पाते। दो छोटे भाई बहन हैं। बड़ी बहन की शादी करने का सपना लेकर राजपुरा गया था, लेकिन खुदा को कुछ और ही मंजूर था। कैराना के फरीद के परिवार में तीन बेटे और पांच बेटियां हैं। सभी अविवाहित हैं। पांच बेटियों की शादी के लिए रुपयों की जरूरत थी। कैराना में काम नहीं था। लिहाजा बच्चों की खातिर फरीद भी दो बेटों के साथ वहां रोजगार करने गया था, लेकिन खुद को कुछ और ही मंजूर था। शाम को जैसे ही दोनों के शव घर पहुंचे चीख पुकार मच गई। मोहल्ले में भी मातम का माहौल था।
अधूरा रह गया बहन की शादी का सपना
शामली। पंजाब में हुए हादसे में मारे गए शहर के काजीवाड़ा निवासी शहबाज के घर में कोहराम था। परिजनों ने बताया कि कैराना से ही उनके फूफा फरीद के परिजनों ने रविवार सुबह जैसे ही शहबाज के साथ हुई घटना की जानकारी दी परिवार में कोहराम मच गया। महिलाएं चीख पुकार मचाने लगी। मोहल्ले वालों की भीड़ जमा होने लगी थी। परिवार के सदस्य उनका शव लेने पंजाब चले गए थे।
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शाम करीब साढ़े सात बजे उसका शव घर पहुंचा तो चीख पुकार मच गई। परिजनों के अनुसार शहबाज करीब तीन महीने से पंजाब गया हुआ था। परिजनों के अनुसार शहबाज परिवार में सबको बहुत प्यार करता था वो अपनी बहन का दुलारा था।
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मृतक के चाचा फरीद के अनुसार परिवार में शहबाज के अलावा एक भाई शहनवाज (12 ) और है और बहन नूरीन(16 ) है। तीनों भाई बहन अविवाहित थे। शहबाज के अब्बू खुर्शीद हैं, जो पहले पशुओं का कारोबार करते थे, लेकिन अब बीमार होने की वजह से काम नहीं कर पाते। शहबाज ही परिवार की कमाई का जरिया था। इनकी अम्मी फरजान हैं। शहबाज अपनी बहन की शादी के लिए कुछ रुपये जोड़ना चाहता था, लेकिन उनके दुनिया से चलेे जाने के बाद उसका बहन की शादी का सपना भी अधूरा रह गया।
सोनू के कंधों पर आ गई घर की जिम्मेदारी
कैराना। शाम करीब 6 बजे पंजाब से फरीद का शव एंबुलेंस द्वारा कैराना व शामली उनके आवासों पर लाए गए। इस दौरान दोनों के आवासों पर भीड़ जमा रहीं। परिजनों का रो रो कर बुरा हाल था। मृतक फरीद के साले वार्ड सभासद राशिद ने बताया कि रविवार की सुबह पंजाब पुलिस ने कैराना कोतवाली पुलिस को इस घटना की जानकारी दी थी। इसके बाद पुलिस ने फरीद के परिजनों को इस हादसे की जानकारी दी। खबर मिलते ही परिवार में चीख पुकार मच गई। परिवार के सदस्य ओर रिश्तेदार पंजाब के लिए रवाना हो गए । रात करीब सात बजे पोस्टमार्टम के बाद शव कस्बे में पहुंचा। राशिद के अनुसार उसके बहनोई फरीद के तीन बेटे और पांच बेटियां हैं, सभी बच्चे अविवाहित हैं। सबसे बड़ा बेटा सोनू (24) है और दूसरा बेटा मोहसिन (15) है। सबसे छोटा एक बेटा है। कैराना में ही परिवार के साथ रहता था। फरीद और उसके दो भाई पांच बहनों की शादी को लेकर चिंतित रहते थे। कैराना में इतना ज्यादा काम नहीं था। इसलिए ही पंजाब गए थे। वहां कपड़े की फड़ पर काम करते थे। सोचा था कि बेटियों की शादी के लिए कुछ रुपये जुड़ जाएंगे, लेकिन इस हादसे में फरीद चल बसा।
हादसे के प्रत्यक्षदर्शी सोनू ने बताई आपबीती
कैराना। इस हादसे का प्रत्यक्षदर्शी सोनू रविवार रात करीब सवा नौ बजे प्राइवेट डॉक्टर के यहां इंजेक्शन लगवाने गया था। यहीं पर उसने अपनी आपबीती बताई। बताया कि शनिवार रात वो रात साढ़े नौ बजे कमरे पर सोने के लिए गया था। उस वक्त अब्बू कपडे़ धो रहे थे। उसके भाई ने अंगीठी जलाई हुई थी। उसने कुछ देर मोबाइल देेेखा और लेट गया और नींद आ गया। रात करीब दो बजे उसे उल्टी हो गई। कुछ देर बाद वो फिर कंबल ओढकर लेट गया। कुछ देर बाद उसके अब्बू ने उसे उठाया। कहा कि शहबाज को भी उल्टी लगी है। उन्होंने शहबाज को पानी दिया और अब्बू भी लेट गया। सुबह सात बजे उसकी आंख खुली तो उसे सिर में चक्कर आ रहे थे। घबराहट हो रही थी। देखा तो उसके अब्बू और भाई मोहसिन और शाबाज भी बेसुध पड़े थे। उसने गेट खोलना चाहता तो वो भी नहीं खुला। उसने पड़ोसी को फोन करके इसकी जानकारी दी। इस हादसे में बेहोश हुआ फरीद का दूसरा बेटा अर्द्धबेहोशी की हालत में था। रात को वो घर में सो रहा था।

रोज सुबह पड़ोसियों को उठाता था नमाज के लिए
शामली/कैराना। फरीद के रिश्तेदार सभासद राशिद के अनुसार बागपत जनपद के निरपुड़ा गांव निवासी हसीन भी पंजाब के राजपुरा में ही कपड़े का काम करता है। फरीद रोज सुबह पांच बजे उठकर आसपास रहने वालों को नमाज पढ़ने के लिए उठाता था। सबको नमाज पढ़ने ले जाता था। रविवार सुबह फरीद सोकर नहीं उठा। उनका दरवाजा नहीं खुला था। आसपास रहने वालों को ये बात अजीब सी लगी जो रोज सुबह पांच बजे उन्हें उठाते हैं आज खुद क्यों नहीं उठा। कुछ देर बाद फरीद का बड़ा बेटा सोनू ने दरवाजे खोलने के प्रयास किए, लेकिन नहीं खुुल सके। इसके बाद सोनू ने सामने रहने वाले अपने पड़ोसी को फोन करके बताया कि हम लोगों की तबियत अधिक खराब हो गई है। उठा भी नहीं जा रहा। दरवाजे भी वो नहीं खोल पा रहा है। इसके बाद पड़ोसियों ने पुलिस को इसकी खबर दी। इसके बाद दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया। फरीद और शाबाज मौके पर ही मर गया था। अर्द्धबेहोशी की हालत मे सोनू और मोहसिन पड़े थे।

शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा निवासी शाहाबाज का फाइल फाटो।

शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा निवासी शाहाबाज का फाइल फाटो।- फोटो : SHAMLI

शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा में शाहाबाज का शव आने के बाद लगी भीड़।

शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा में शाहाबाज का शव आने के बाद लगी भीड़।- फोटो : SHAMLI

शामली मौहल्ला काजीवाडा शाहाबाज का शव आने के बाद देखने के लिये लोगो की लगी भीड

शामली मौहल्ला काजीवाडा शाहाबाज का शव आने के बाद देखने के लिये लोगो की लगी भीड- फोटो : SHAMLI

शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा में मृतक के घर पर लगी भीड़।

शामली के मोहल्ला काजीवाड़ा में मृतक के घर पर लगी भीड़।- फोटो : SHAMLI

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