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लिलौन में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट हुआ शुरू
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शामली के गांव खेडी करमू में ट्रीटमेंट प्लांट का फीता काट कर शुभारंभ करते पूर्व विधायक राजेश्वर ?
- फोटो : SHAMLI
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लिलौन में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट हुआ शुरू
शामली। शहर से निकलने वाले गंदे पानी को साफ कर सिंचाई योग्य बनाए जाने के लिए लगाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल और पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने किया। इसके बाद प्लांट चालू हो गया है।
दिल्ली की संस्था सेंटर फार अर्बन एंड रीजनल एक्सीलेंस (क्योर) इंडिया ने नगर पालिका के सहयोग से करीब डेढ़ साल पहले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए गांव लिलौन में मुख्य नाले के निकट सिंचाई विभाग की जमीन उपलब्ध करा दी गई थी। संस्था द्वारा 12 हजार लीटर क्षमता के प्लांट का निर्माण कार्य कई महीने पहले पूरा कर लिया गया था। प्लांट का संचालन नगरपालिका द्वारा किया जाएगा।
शहर से रोजाना करीब 25 हजार एमएलडी गंदा पानी निकलता है, जो शहर के मुख्य नाले से खेड़ी, लिलौन होते हुए आगे कृष्णा नदी में मिलता है। प्लांट में फाइटोर्मेडिमेशन तकनीक का इस्तेमाल कर पानी को स्वच्छ करने के लिए बजरी, रेत आदि से निकाला जाएगा और हानिकारक तत्वों को सोखने की क्षमता रखने वाले पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इससे पानी सिंचाई योग्य ही बन पाएगा। पालिका ने प्लांट के पास ही जैव विविधता पार्क भी बनाया है। प्लांट से साफ होकर पानी इस पार्क में पहुंचेगा, जिससे पौधों की सिंचाई होगी। पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल यह प्लांट एक मॉडल के तौर पर तैयार किया गया है। भविष्य में इस तरह के और प्लांट लगाने की योजना है। इसके बाद नाले में बहने वाला सारा पानी साफ हो सकेगा।
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शामली। शहर से निकलने वाले गंदे पानी को साफ कर सिंचाई योग्य बनाए जाने के लिए लगाए गए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का पूर्व विधायक राजेश्वर बंसल और पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने किया। इसके बाद प्लांट चालू हो गया है।
दिल्ली की संस्था सेंटर फार अर्बन एंड रीजनल एक्सीलेंस (क्योर) इंडिया ने नगर पालिका के सहयोग से करीब डेढ़ साल पहले वाटर ट्रीटमेंट प्लांट बनाने की योजना तैयार की थी। इसके लिए गांव लिलौन में मुख्य नाले के निकट सिंचाई विभाग की जमीन उपलब्ध करा दी गई थी। संस्था द्वारा 12 हजार लीटर क्षमता के प्लांट का निर्माण कार्य कई महीने पहले पूरा कर लिया गया था। प्लांट का संचालन नगरपालिका द्वारा किया जाएगा।
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शहर से रोजाना करीब 25 हजार एमएलडी गंदा पानी निकलता है, जो शहर के मुख्य नाले से खेड़ी, लिलौन होते हुए आगे कृष्णा नदी में मिलता है। प्लांट में फाइटोर्मेडिमेशन तकनीक का इस्तेमाल कर पानी को स्वच्छ करने के लिए बजरी, रेत आदि से निकाला जाएगा और हानिकारक तत्वों को सोखने की क्षमता रखने वाले पेड़-पौधे लगाए गए हैं। इससे पानी सिंचाई योग्य ही बन पाएगा। पालिका ने प्लांट के पास ही जैव विविधता पार्क भी बनाया है। प्लांट से साफ होकर पानी इस पार्क में पहुंचेगा, जिससे पौधों की सिंचाई होगी। पालिका के अधिशासी अधिकारी सुरेंद्र सिंह ने बताया कि फिलहाल यह प्लांट एक मॉडल के तौर पर तैयार किया गया है। भविष्य में इस तरह के और प्लांट लगाने की योजना है। इसके बाद नाले में बहने वाला सारा पानी साफ हो सकेगा।
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