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यमुना में घटे जलस्तर ने बढ़ाया जल संकट
अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Fri, 24 Jun 2016 12:34 AM IST
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कैराना में नाम मात्र पानी के साथ यमुना नदी।
- फोटो : अमर उजाला
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शामली में यमुना जल बंटवारे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलो को हरियाणा से बहुत कम पानी मिल रहा है। जिससे फसलें तो सूख रही हैं, साथ ही यमुना और उससे नहर-रजवाहे बरसाती नाला बनकर रह गए हैं। लगातार जलस्तर गिरने से शामली-बागपत जिले डार्क जोन में शामिल हो गए हैं।
हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर बह रही यमुना नदी दो दशक पूर्व पूरे साल पानी से लबालब रहती थी। पिछले अब यमुना में पानी का टोटा रहने लगा है। बरसात के बाद यमुना में मुश्किल से छह माह तक पानी रहता है। छह माह के बाद गर्मी के मौसम में बागपत और गाजियाबाद जिले में यमुना सूख जाती है। यमुना में पानी कम होने का कारण यमुना जल बंटवारे माना जा रहा है।
यमुना जल बंटवारे में दो तिहाई पानी हरियाणा और एक तिहाई पानी यूपी के हिस्से में आता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यमुना में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर- शामली जिलों में दो सौ लेकर से तीन सौ क्यूसेक पानी बह रहा है। बागपत और गाजियाबाद जिले में जाते जाते पानी सूख जाता है।
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मौजूदा दौर में हथनीकुंड-ताजेवाला बैराज पर कुल 9 हजार 750 क्यूसेक पानी है। जिसमें से हरियाणा को 6500 क्यूसेक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ताजेवाला बैराज पर 2600 क्यूसेक पानी हिस्से में आ रहा है। ताजे वाला बैराज से मिले पानी को यमुना और उसकी सहायक नहरों में छोड़ा जा रहा है, जिससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है और फसलें बर्बाद हो रही हैं। हिंडन- कृष्णा, काठा, खोखरी आदि नदियां पानी के अभाव में सूख चुकी हैं।
ताजेवाला सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि यमुना नदी में पानी बहुत कम है। प्रतिदिन जीव जंतुओं के लिए ताजेवाला बैराज से 160 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। पहाड़ो पर बारिश होने के बाद यमुना में अधिक पानी आ पाएगा।
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हरियाणा-उत्तर प्रदेश की सीमा पर बह रही यमुना नदी दो दशक पूर्व पूरे साल पानी से लबालब रहती थी। पिछले अब यमुना में पानी का टोटा रहने लगा है। बरसात के बाद यमुना में मुश्किल से छह माह तक पानी रहता है। छह माह के बाद गर्मी के मौसम में बागपत और गाजियाबाद जिले में यमुना सूख जाती है। यमुना में पानी कम होने का कारण यमुना जल बंटवारे माना जा रहा है।
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यमुना जल बंटवारे में दो तिहाई पानी हरियाणा और एक तिहाई पानी यूपी के हिस्से में आता है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के मुताबिक यमुना में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर- शामली जिलों में दो सौ लेकर से तीन सौ क्यूसेक पानी बह रहा है। बागपत और गाजियाबाद जिले में जाते जाते पानी सूख जाता है।
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मौजूदा दौर में हथनीकुंड-ताजेवाला बैराज पर कुल 9 हजार 750 क्यूसेक पानी है। जिसमें से हरियाणा को 6500 क्यूसेक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के ताजेवाला बैराज पर 2600 क्यूसेक पानी हिस्से में आ रहा है। ताजे वाला बैराज से मिले पानी को यमुना और उसकी सहायक नहरों में छोड़ा जा रहा है, जिससे खेतों की सिंचाई नहीं हो पा रही है और फसलें बर्बाद हो रही हैं। हिंडन- कृष्णा, काठा, खोखरी आदि नदियां पानी के अभाव में सूख चुकी हैं।
ताजेवाला सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता अशोक कुमार ने बताया कि यमुना नदी में पानी बहुत कम है। प्रतिदिन जीव जंतुओं के लिए ताजेवाला बैराज से 160 क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। पहाड़ो पर बारिश होने के बाद यमुना में अधिक पानी आ पाएगा।