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रोजमर्रा की वस्तुुओं की खरीदारी भी हुई कम
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, शामली
Updated Sun, 27 Nov 2016 12:03 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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शामली। नोटबंदी से थोक व्यापार भी बुरी तरह प्रभावित हो गया। थोक व्यापारियों और फुटकर विक्रेताओं ने बताया कि स्थिति इतनी खराब हो गई है कि आम आदमी रोजमर्रा की वस्तुओं को ज्यादा मात्रा में न खरीदकर केवल खर्चे लायक ही खरीद रहा है। जिससे बाजार और चीनी तेल मंडियों में भी सन्नाटा पसरा रहता है।
नोटबंदी से आज स्थिति इतनी भयानक हो गई है कि आदमी घरों में रोज प्रयोग होने वाली वस्तुओं को भी बडे़ ही सोच समझकर खरीद रहा है। लोगों ने दूध, ब्रेड, चीनी, आटा, सब्जी, तेल, चावल व अन्य वस्तुएं भी ज्यादा मात्रा में नहीं खरीद रहा है। जिससे बाजारों में थोक विक्रेता व फुटकर विक्रेता और दूध व सब्जी विक्रेता भी सुबह से शाम तक ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं। जिससे ब्रिकी में 50 से 60 प्रतिशत की कमी हो गई है।
ट्रांसपोर्ट रोड स्थित मधुसूदन डेयरी व्यापारी दीपक कुमार ने बताया कि दूध तो घर में रोज प्रयोग करने वाली वस्तु है। नोटबंदी के कारण दूध के दाम पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन बिक्री में 50 प्रतिशत तक कमी आ गई है।
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मार्शगंज मंडी स्थित चीनी व तेल के थोक व्यापारी अजय कुमार और पवन केडिया ने बताया कि नोटबंदी के कारण धंधा बिल्कुल चौपट हो गया है। जिससे न तो ज्यादा मात्रा में तेल व चीनी बाजारों में जा रहा और न ही गांव में दुकान करने वाले व किसान लोग ले जा पा रहे हैं। चीनी के भाव में 40 से 50 रुपये क्विंटल तक कम हो गई है, लेकिन कोई खरीदार नहीं।
चावल व्यापारी अरुण कुमार ने बताया कि दुकान पर सुबह से दोपहर दो बजे तक भी कोई ग्राहक नहीं आया। नोटबंदी से दुकान पर काम करने वालों को भी पैसा नहीं दिया जा रहा है।
सब्जी विक्रेता बब्बू का कहना है कि सब्जी तो घर में रोज बनती है, लेकिन बाजारों में सब्जी खरीदने के लिए भी लोगों के पास पैसा नहीं है जिसके कारण बिक्री आधी से कम हो गई। वही नोटबंदी से सब्जियों के दाम में कुछ हद तक गिरावट दर्ज हुई है। फिर भी बाजार में ग्राहक नहीं दिख रहा है।
थोक पंसारी महेश कुमार और फुटकर विक्रेता संजय गोयल ने बताया कि बाजार में सुबह से शाम तक केवल 20 प्रतिशत ही ग्राहक बाजारों में आ रहे हैं। जिससे स्थिति बहुत ही दयनीय होती जा रही है। बाजारों से मंगाए हुए माल का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।
वही ब्रेड विक्रेता विकास गुप्ता ने बताया कि आदमी पहले की तरह ब्रेड व अन्य खाने वाली वस्तुओं को भी पैसों के कारण खरीदने को मजबूर हो रहा है। सिर्फ घरेलू वस्तुओं से ही काम चला रहा है।
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नोटबंदी से आज स्थिति इतनी भयानक हो गई है कि आदमी घरों में रोज प्रयोग होने वाली वस्तुओं को भी बडे़ ही सोच समझकर खरीद रहा है। लोगों ने दूध, ब्रेड, चीनी, आटा, सब्जी, तेल, चावल व अन्य वस्तुएं भी ज्यादा मात्रा में नहीं खरीद रहा है। जिससे बाजारों में थोक विक्रेता व फुटकर विक्रेता और दूध व सब्जी विक्रेता भी सुबह से शाम तक ग्राहकों का इंतजार करते रहते हैं। जिससे ब्रिकी में 50 से 60 प्रतिशत की कमी हो गई है।
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ट्रांसपोर्ट रोड स्थित मधुसूदन डेयरी व्यापारी दीपक कुमार ने बताया कि दूध तो घर में रोज प्रयोग करने वाली वस्तु है। नोटबंदी के कारण दूध के दाम पर तो कोई प्रभाव नहीं पड़ा है, लेकिन बिक्री में 50 प्रतिशत तक कमी आ गई है।
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मार्शगंज मंडी स्थित चीनी व तेल के थोक व्यापारी अजय कुमार और पवन केडिया ने बताया कि नोटबंदी के कारण धंधा बिल्कुल चौपट हो गया है। जिससे न तो ज्यादा मात्रा में तेल व चीनी बाजारों में जा रहा और न ही गांव में दुकान करने वाले व किसान लोग ले जा पा रहे हैं। चीनी के भाव में 40 से 50 रुपये क्विंटल तक कम हो गई है, लेकिन कोई खरीदार नहीं।
चावल व्यापारी अरुण कुमार ने बताया कि दुकान पर सुबह से दोपहर दो बजे तक भी कोई ग्राहक नहीं आया। नोटबंदी से दुकान पर काम करने वालों को भी पैसा नहीं दिया जा रहा है।
सब्जी विक्रेता बब्बू का कहना है कि सब्जी तो घर में रोज बनती है, लेकिन बाजारों में सब्जी खरीदने के लिए भी लोगों के पास पैसा नहीं है जिसके कारण बिक्री आधी से कम हो गई। वही नोटबंदी से सब्जियों के दाम में कुछ हद तक गिरावट दर्ज हुई है। फिर भी बाजार में ग्राहक नहीं दिख रहा है।
थोक पंसारी महेश कुमार और फुटकर विक्रेता संजय गोयल ने बताया कि बाजार में सुबह से शाम तक केवल 20 प्रतिशत ही ग्राहक बाजारों में आ रहे हैं। जिससे स्थिति बहुत ही दयनीय होती जा रही है। बाजारों से मंगाए हुए माल का भी भुगतान नहीं किया जा रहा है।
वही ब्रेड विक्रेता विकास गुप्ता ने बताया कि आदमी पहले की तरह ब्रेड व अन्य खाने वाली वस्तुओं को भी पैसों के कारण खरीदने को मजबूर हो रहा है। सिर्फ घरेलू वस्तुओं से ही काम चला रहा है।